इन वर्गों के लिए BUDGET रहा निराशाजनक
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दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केंद्र सरकार के बजट को एक संतुलित एवं विकासशील बजट बताया है।
उन्होंने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के कार्यकाल में हुए आर्थिक सुधारों का लाभ देश के हर वर्ग के लिए एक साथ लाया है।
बजट में कृषि विकास एवं फूड पार्क पर ध्यान दिया गया है, वहीं उद्योग एवं व्यापार को नई गति देकर युवाओं के लिए रोजगार के नवीन अवसर गांव एवं शहर दोनों जगह उपलब्ध होंगे।
शिक्षा, स्वास्थ्य, जन सुविधा परिसरों के व्यापक विस्तार पर ध्यान दिया गया है।
गरीबों, किसानों और पिछड़े वर्ग का ध्यान रखा
केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने बजट को देश और दिल्ली के लिए अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि यह गरीबों, किसानों और पिछड़े वर्ग के हित का बजट है और एक नए भारत की नींव की शुरुआत है।
सरकार ने हमेशा गरीबों, किसानों, महिलाओं और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किया है। यह बजट हमारे इस संकल्प को सामने लाता है।
सरकार ने वायू प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक मशीनरी पर सब्सिडी देने और दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण को रोकने को कम करने के लिए विशेष योजना लाने का संकल्प जताया है।
दिल्ली के लिए विशेष योजना का स्वागत
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने केंद्र सरकार के बजट में दिल्ली का बजट बढ़ाने, दिल्ली सरकार के लिए केंद्रीय सहायता राशि बढ़ाने, वर्ष 1984 के दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए अतिरिक्त धन और प्रदूषण से लड़ने के लिए विशेष योजनाओं का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न योजनाओं की झड़ी लगाकर केंद्र सरकार ने दिल्लीवासमियों के हितों की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध होने का प्रमाण दिया है।
आम बजट से वेतनभोगी निराश
एकीकृत दिल्ली नगर निगम में निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगांई ने सातवें वेतनय आयोग के उपरांत वेतन में हुई बढ़ोतरी व महंगाई को देखते हुए केंद्र सरकार के बजट में आयकर में छूट की सीमा की उम्मीद पूरी नहीं होने पर निराशा जताई है।
उनका कहना है कि वेतनभोगी वर्ग ईमानदार उपभोक्ता है उसे दस लाख से अधिक वार्षिक पर 30 प्रतिशत टैक्स देना है, जबकि 250 करोड़ तक कारोबार करने वालों को मात्र 25 प्रतिशत टैक्स ही देना पड़ेगा।
शिक्षा व स्वास्थ्य सेस तीन से बढ़ाकर चार प्रतिशत करने से भी आम आदमी पर बोझ बढ़ेगा। बचत के लिए खरीदे गए म्यूच्यूल फंड से होने वाली आय पर भी 10 प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया है।
किसानों के लिए खास नहीं रहा बजट
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट किसानों के लिए लुभावना नहीं है, जबकि इस बार किसानों को बजट से काफी उम्मीदें थीं।
किसानों को फसलों के मूल्य से लेकर कर्ज माफी तक बड़े फैसले होने की आस थी, लेकिन बजट इसके उलट रही। किसानों को लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर आगामी फसल से न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की घोषणा के लागू होने पर संशय है, क्योंकि देश में किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जाती है।
ऐसी स्थिति में समर्थन मूल्य का कोई मतलब नहीं है। किसानों की कर्ज माफी, फसल बीमा योजना में किसान को इकाई मानना, मौसमी नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दों को सरकार ने छुआ तक नहीं।
कर्मचारियों के लिए बजट निराशाजनक
भारतीय मजदूर संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार ने केंद्र सरकार के बजट को कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से निराशाजनक करार दिया है।
उन्होंने कहा कि बजट से बड़े उद्योगपतियों को फायदा होगा। सरकार के इस बजट से सिर्फ चंद वर्ग को फायदा मिलेगा, जबकि सरकार गरीब-गरीब करती है, मगर फायदा अमीरों का करती है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि बजट में मजदूरों के लिए क्या योजनाएं है। इसके विरोध में संघ सरकार के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करेगी।