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बड़ा खुलासा: पराली-गाड़ियां नहीं इस वजह से घुल रहा दिल्ली की सांसों में जहर, कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Thu, 05 Dec 2024 07:21 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 05 Dec 2024 07:21 PM IST
सार

मामले की गंभीरता को समझते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने माना कि यह मामला वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन है।

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Thermal power plant poisoning Delhi air NGT strict
कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की हवा को खराब करने के लिए पराली जलाना या वाहन मुख्य कारण नहीं है, बल्कि थर्मल पावर प्लांट है। जो वातावरण में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। पावर प्लांट पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से 16 गुना अधिक वायु प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं। यही नहीं, एनसीआर में कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट सालाना 281 किलो टन सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ-2) उत्सर्जित करते हैं। फिनलैंड बेस्ड स्वतंत्र थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने इसका खुलासा अपनी एक रिपोर्ट में किया है। दरअसल, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वायु प्रदूषण को लेकर मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। इस रिपोर्ट में सीआरईए के एक अध्ययन का हवाला दिया गया है।

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कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
मामले की गंभीरता को समझते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने माना कि यह मामला वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उल्लंघन है। सुनवाई को दौरान एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी), हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसी), पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी), वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पीठ में न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी व विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल रहे।

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प्रदूषण संकट को और गहरा रही मौसम की स्थिति
रिपोर्ट में सीआरईए के एक अध्ययन का हवाला देकर कहा गया कि एनसीआर के थर्मल प्लांट से प्रतिवर्ष 281 किलो टन सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ-2) उत्सर्जित होती है। वहीं, दूसरी ओर 8.9 मिलियन टन पराली जलाने से 17.8 किलोटन एसओ-2 पैदा होती है। इसके अलावा, दिल्ली में मौसम की स्थिति प्रदूषण संकट को और गहरा रही है। यही नहीं, रुकी हुई हवा और गिरते तापमान प्रदूषकों को फैलने नहीं दे रहे। इससे हवा में धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कण फंस गए हैं। इन स्थितियों को अक्सर ठंडी हवा के जाल के रूप में जाना जाता है। इससे पराली के धुएं जैसे प्रदूषक दिल्ली और आसपास के इलाकों में बने रहते हैं, जो हवा की गुणवत्ता को जहरीला बना रहा है।

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