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लॉकडाउन के बाद ट्रेन चलाने को लेकर संशय बरकरार
Sat, 11 Apr 2020 10:06 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 11 Apr 2020 10:06 AM IST
सार
- केंद्र व राज्य सरकार के कोरोना के आकलन पर टिका है ट्रेनों का संचालन
- एक साथ 13 हजार ट्रेनों को ट्रैक पर उतारना चुनौती से कम नहीं
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भारतीय रेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लॉकडाउन के बाद ट्रेनें चलेंगी या नहीं, इस पर अब भी असमंजस की स्थिति है। 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है। इस वजह से कई लोगों ने 15 अप्रैल का टिकट भी बुक करा लिया है। लेकिन अब तक रेलवे बोर्ड ने यह निर्णय नहीं लिया है कि ट्रेनें दौड़ेंगी या नहीं। हालांकि यह निर्भर करता है कि लॉकडाउन की अवधि बढ़ेगी या नहीं। साथ ही एक साथ लगभग 13 हजार ट्रेनों को ट्रैक पर उतराना भी चुनौती से कम नहीं है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन चलाने का फैसला सरकार के कोरोना वायरस के आकलन के बाद ही लिया जाएगा। रेल मंत्रालय के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आरडी वाजपेयी के अनुसार लॉकडाउन के तुरंत बाद यानी 15 अप्रैल से ट्रेनों को चलाए जाने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारों के निर्देशों और उनके कोरोना वायरस संक्रमण का सटीक आंकलन के बाद ही कोई भी निर्णय लिया जाएगा। राज्य की सरकारें केंद्र सरकार को अपने राज्य के हालात शुक्रवार को बता सकती है। दरअसल डर यह भी है कि ट्रेन के संचालन के बाद कोरोना वायरस फैलने का खतरा है। इतना ही नहीं फ्रंट लाइन रेल कर्मियों को भी पैसेंजर के साथ ही यात्रा करना होगा। स्टेशन पर सोशल डिस्टेंसिंग भी मुश्किल है। रेल कर्मियों के पास पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) भी उपलब्ध कराना रेलवे के लिए चुनौती है।
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हालांकि रेलवे अपनी तरफ से रेल ट्रैक, स्टेशन परिसर, फुटओवर ब्रिज के सैनिटाइजेशन में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। भले ही इन जगहों पर सन्नाटा फैला है, लेकिन सफाई कर्मी रोजाना प्लेटफार्म, स्टेशनों के फर्श धो रहे है। अलग-अलग राज्यों से पार्सल स्पेशल ट्रेन भी चल रही है तो स्टेशनों पर सब्जी, चीनी, दूध, चीनी, सब्जी, नमक, फल समेत कई आवश्यक सामग्री आ रही है।
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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन चलाने का फैसला सरकार के कोरोना वायरस के आकलन के बाद ही लिया जाएगा। रेल मंत्रालय के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आरडी वाजपेयी के अनुसार लॉकडाउन के तुरंत बाद यानी 15 अप्रैल से ट्रेनों को चलाए जाने पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
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गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारों के निर्देशों और उनके कोरोना वायरस संक्रमण का सटीक आंकलन के बाद ही कोई भी निर्णय लिया जाएगा। राज्य की सरकारें केंद्र सरकार को अपने राज्य के हालात शुक्रवार को बता सकती है। दरअसल डर यह भी है कि ट्रेन के संचालन के बाद कोरोना वायरस फैलने का खतरा है। इतना ही नहीं फ्रंट लाइन रेल कर्मियों को भी पैसेंजर के साथ ही यात्रा करना होगा। स्टेशन पर सोशल डिस्टेंसिंग भी मुश्किल है। रेल कर्मियों के पास पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) भी उपलब्ध कराना रेलवे के लिए चुनौती है।
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हालांकि रेलवे अपनी तरफ से रेल ट्रैक, स्टेशन परिसर, फुटओवर ब्रिज के सैनिटाइजेशन में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। भले ही इन जगहों पर सन्नाटा फैला है, लेकिन सफाई कर्मी रोजाना प्लेटफार्म, स्टेशनों के फर्श धो रहे है। अलग-अलग राज्यों से पार्सल स्पेशल ट्रेन भी चल रही है तो स्टेशनों पर सब्जी, चीनी, दूध, चीनी, सब्जी, नमक, फल समेत कई आवश्यक सामग्री आ रही है।
आईजीआई एयरपोर्ट से देशभर में पहुंच रहा जरूरी सामान
वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण के कारण इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नागरिक विमानों की उड़ान पर रोक लगी हुई है, लेकिन एयरपोर्ट पर जरूरी सामान को लाने और देशभर में ले जाने के लिए विमान उड़ान भर रहे हैं। इन विमानों की सहायता से राज्यों में मास्क, सैनिटाइजर पीपीई किट और अन्य जरूरी चिकित्सा सामान को पहुंचाए जा रहे हैं।
डायल के सीइओ विदेश कुमार ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट से प्रति दिन 20 से 22 कार्गो विमानों की आवाजाही होती हैं। इनमें विदेशों से आने वाले विमान भी शामिल हैं। एयरपोर्ट से विमानों के जरिये देश के हरेक हिस्से में जरूरी सामान भेजे जा रहे हैं। इसके लिए एयरपोर्ट पर 5 हजार स्क्वायर मीटर का एक अतिरिक्त गोदाम बनाया गया है।
वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण के कारण इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नागरिक विमानों की उड़ान पर रोक लगी हुई है, लेकिन एयरपोर्ट पर जरूरी सामान को लाने और देशभर में ले जाने के लिए विमान उड़ान भर रहे हैं। इन विमानों की सहायता से राज्यों में मास्क, सैनिटाइजर पीपीई किट और अन्य जरूरी चिकित्सा सामान को पहुंचाए जा रहे हैं।
डायल के सीइओ विदेश कुमार ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट से प्रति दिन 20 से 22 कार्गो विमानों की आवाजाही होती हैं। इनमें विदेशों से आने वाले विमान भी शामिल हैं। एयरपोर्ट से विमानों के जरिये देश के हरेक हिस्से में जरूरी सामान भेजे जा रहे हैं। इसके लिए एयरपोर्ट पर 5 हजार स्क्वायर मीटर का एक अतिरिक्त गोदाम बनाया गया है।