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इस तरीके से रोका जा सकता है भूकंप का प्रभाव

Tue, 08 Dec 2015 09:40 AM IST
Updated Tue, 08 Dec 2015 09:40 AM IST
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The way in which they can prevent the effects of the earthquake

भूगर्भीय फॉल्ट (भ्रांश) से दिल्ली घिरी हुई है। ऐसे में यहां भूकंप से बड़े हादसे हो सकते हैं। बीते कुछ वर्षों में  भूकंप की घटनाएं बढ़ गई हैं।

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भूकंप का केंद्र राजधानी से दूर होने के बाद भी इसके झटकों को महसूस किया जा सकता है। इसके लिए भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन इससे होने वाले प्रभाव को कम किया जा सकता है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग का कहना है कि इसके लिए सिंथेटिक अपर्चर के उपयोग करने के साथ-साथ रेट्रोफिटिंग भी मददगार हो सकती है। विभाग भूकंप के प्रभावों को कम करने के उपायों को लेकर काम कर रहा है।
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अपर्चर रडार (एसएआर) सेंसर डाटा का इस्तेमाल हो सकता है

The way in which they can prevent the effects of the earthquake

डीयू के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष व इंटरनेशनल जियोग्राफिकल यूनियन के उपाध्यक्ष डॉ आर.बी सिंह ने बताया कि फ्रांस, जापान व अन्य विकसित देशों में भूकंप की भविष्यवाणी के लिए सेटेलाइट डाटा का प्रयोग किया जा रहा है।


हम भी यहां सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) सेंसर डाटा का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप की निगरानी की जाने की जरूरत हैं। खासकर पूर्व के भूकंप केंद्रों की नियमित रुप से निगरानी की जाए।

पुरानी इमारतों की रेट्रोफिटिंग की जाए तो भूंकप के प्रभाव को कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी इमारतों पर नया ढांचा बनाना महंगा व कठिन हो सकता है। ऐसे में इमारत को पिलर सिस्टम के जरिये सुरक्षित कर सकते हैं।

दिल्ली की ये जगहें सेफ शेल्टर बना जाएं

The way in which they can prevent the effects of the earthquake

जिस तरह से भूकंप का आना बढ़ रहा है, उसके लिए जरूरी है कि पुरानी दिल्ली, पहाड़गंज, करोल बाग सेफ शेल्टर बनाए जाएं। भूकंप आने पर टेलीकम्यूनिकेशन सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, लिहाजा सेटेलाइट फोन का प्रयोग आवश्यक है।


उन्होंने यह भी कहा कि यह वैज्ञानिक रुप से प्रमाणित तो नहीं, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि पशुओं को भूकंप आने का सबसे पहले पता चलता है।

आपदा के समय पशुओं के प्रभाव में बदलाव आता है। इसलिए उनकी निगरानी की जानी चाहिए। देश का 60 फीसदी हिस्सा भूकंप से प्रभावित हो सकता है। ऐसे में भूगर्भीय हलचलों की लगातार निगरानी की जानी चाहिए।

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