{"_id":"57d011ba4f1c1b7f2f318eb4","slug":"the-number-of-malaria-patients-received-62-12-cases-of-chikungunya","type":"story","status":"publish","title_hn":"मलेरिया मरीजों की संख्या 62 पहुंची, चिकनगुनिया के 12 मामले आए सामने ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मलेरिया मरीजों की संख्या 62 पहुंची, चिकनगुनिया के 12 मामले आए सामने
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 08 Sep 2016 12:01 AM IST
विज्ञापन
डाक्टर
- फोटो : file photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औद्योगिक नगरी में इस बार मलेरिया के मरीजों की संख्या 62 पहुंच चुकी है। हालांकि दिल्ली के नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) की ओर से जिला मलेरिया विभाग को चिकनगुनिया ग्रस्त 12 और डेंगू के 10 मरीजों के नाम भेजे गए हैं।
विज्ञापन
विभाग इन मरीजों के नाम पते की पुष्टि करने में जुटा है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रामभगत ने बताया कि मंगलवार 2 और बुधवार को 4 मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए।
विज्ञापन
अब तक कुल 62 मरीज आ चुके हैं। अभी तक डेंगू संदिग्धों की संख्या 100 पहुंच गई। एनवीबीडीसीपी की ओर से जिले के नाम पते वाले 10 डेंगू पीड़ित मरीजों की सूची भेजी है। उन्होंने बताया कि एनवीबीडीसीपी की ओर से भेजे गए मरीजों के नाम पतों की पुष्टि नहीं होने की वजह से विभाग इन्हें संदिग्ध मान रहा है।
विज्ञापन
शहर में डेंगू के 11 मामले कन्फर्म हो चुके हैं। एनवीबीडीसीपी की ओर से चिकनगुनिया पीड़ितों की सूची भेजी हैं नाम पतों की पुष्टि होने तक इन्हें भी संदिग्ध माना जा रहा है।
इनमें से सिर्फ एक ही मरीज की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि एनवीबीडीसीपी की ओर से भेजी गई सूची की पुष्टि के लिए टीम गठित कर पतों की जांच कराई जा रही है।
चिकनगुनिया और वायरल बुखार के लक्षण एक जैसे जोड़ों में असहनीय दर्द और तेज बुखार सिर्फ चिकनगुनिया के ही लक्षण नहीं हैं। वायरल बुखार के पीड़ितों में भी यही लक्षण पाए जा रहे हैं।
बीके सिविल अस्पताल के आरएमओ डॉ. नवीन गर्ग के मुताबिक वर्तमान समय में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसे मच्छर से फैलने वाले बुखार के अलावा वायरस संक्रमण से भी बुखार फैल रहा है।
हालांकि दोनों बुखार के लक्षण काफी मिलते जुलते हुए हैं। उनका मानना है कि वेक्टर बोर्न डिजीज या संक्रामक बुखार दोनों की पहचान जांच के बाद ही हो सकती है।