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शीला दीक्षित कुशल प्रबंधन, दूरदर्शी सोच की बदौलत दिल्ली को दे गईं मुकाम

Sun, 21 Jul 2019 04:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 21 Jul 2019 04:50 AM IST
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The imagination of the present Delhi is not possible without Sheila Dikshit
शीला दीक्षित

शीला दीक्षित के कुशल प्रबंधन और दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है कि राजधानी में आज मेट्रो, सीएनजी वाहन, सिग्नेचर ब्रिज, बारापूला एलीवेटेड रोड समेत फ्लाईओवर और अंडरपास का जाल का बिछा है। बिजली का निजीकरण करने के साथ ही अनधिकृत कॉलोनियों में विकास की शुरुआत का पूरा श्रेय शीला दीक्षित को जाता है। शीला अपने पीछे दिल्ली के विकास की अनगिनत निशानियां छोड़ गई हैं। कहा जा सकता है कि मौजूदा दिल्ली की कल्पना शीला दीक्षित के बिना नहीं हो सकती।


 

विकास में सियासत को नहीं बनने दिया बाधा

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दिल्ली मेट्रो - फोटो : Twitter
लगातार पंद्रह साल तक मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने वाली देश की इकलौती महिला रहीं शीला दीक्षित के प्रशासनिक कौशल पर दलीय बंदिशें भी हावी नहीं हो सकीं। पांच साल केंद्र में विरोधी भाजपा की सरकार होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली के विकास का पहिया थमने नहीं दिया। यह वही दौर था, जब दिल्ली की सबसे महत्वाकांक्षी योजना दिल्ली मेट्रो का पहिया ट्रैक पर आ रहा था। दिल्ली सरकार के तत्कालीन परिवहन मंत्री अजय माकन बताते हैं कि 24 दिसंबर 2002 को दिल्ली मेट्रो का उद्घाटन होना था। इससे हफ्ते भर पहले केंद्र सरकार ने मदन लाल खुराना को डीएमआरसी बोर्ड का चेयनमैन बना दिया। बतौर परिवहन मंत्री अजय माकन ने मुख्यमंत्री से इसके विरोध की सलाह दी। इस पर शीला दीक्षित ने कहा कि विकास के काम में सियासत नहीं करनी है। अभी दिल्ली की जरूरत मेट्रो है।

एलिवेटेड रोड तैयार करवाने में दिखाया प्रशासनिक कौशल

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फ्लाईओवर - फोटो : Social Media

कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बारापूरा नाले के ऊपर दिल्ली की पहली एलिवेटर रोड तैयार करवा ले जाना शीला दीक्षित के प्रशासनिक कौशल का ही कमाल था। हालांकि, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम की तरफ की झुग्गी-बस्तियों को लेकर केंद्र की कांग्रेस सरकार इसके लिए पहले तैयार नहीं थी। वहीं, अक्षरधाम से पंजाबी बाग के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर की रूपरेखा भी तैयार कर ली थी। इसके अलावा शांति वन से नोएडा तक सिग्नल फ्री कॉरिडोर, गाजीपुर और अप्सरा बॉर्डर, लक्ष्मी नगर चुंगी, धौला कुआं, जनकपुरी-मुकरबा चौक सिग्नल-फ्री कॉरिडोर जैसी विकास की अनगिनत निशानियां शीला दीक्षित अपने पीछे छोड़ गई हैं, जिससे दिल्लीवालों को जाम से निजात मिली और प्रदूषण में कमी लाने में भी मददगार साबित हुए। 

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केरोसिन फ्री दिल्ली के लिए केंद्र से किए दो-दो हाथ

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एलपीजी गैस - फोटो : अमर उजाला

शीला दीक्षित ने ही दिल्ली को केरोसिन फ्री करने की योजना तैयार की थी। वर्ष 2012 में लांच हुई इस योजना के तहत 3.5 लाख से ज्यादा गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और चूल्हा दिया गया। दिल्ली सरकार में तत्कालीन खाद्य व आपूर्ति मंत्री हारून युसुफ बताते हैं कि जब वह इसका प्रस्ताव लेकर मुख्यमंत्री के पास गए तो वह एक पल में तैयार हो गईं। इसके लिए केंद्र के सहयोग की जरूरत थी। अगले दिन केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी के पास पहुंच गए, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद वह तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मिलीं। तीनों के बीच इस पर लंबी चर्चा हुई। घंटे भर से ज्यादा की बातचीत के बाद प्रणब मुखर्जी इस पर तैयार हुए। आगे आई बाधाओं के बाद भी उन्होंने 2012 में योजना को लागू करवा लिया।

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दिल्ली को बनाया सांस्कृतिक राजधानी

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इंडिया गेट - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली का कायाकल्प करने के साथ शीला दीक्षित ने इसे देश की सांस्कृतिक राजधानी भी बनाया। दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी के मुताबिक, मेरा राजनीति में आने के पहले से उनसे परिचय था। बतौर डांसर मेरे ऊपर उनका बहुत स्नेह रहा। उन्होंने दिल्ली में शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों को सीरीज के तौर पर शुरू किया। वह हर कार्यक्रम में जातीं और पूरे वक्त लुत्फ उठाती थीं। कालाकारों को वह निजी तौर पर प्रोत्साहित करती थीं। पंद्रह दिन पहले उनसे मुलाकात हुई थी। मिलते ही उन्होंने कहा, अरे शर्मिष्ठा, डांस करना क्यों छोड़ दिया। उनकी सलाह थी संस्कृतिधर्मिता नहीं छोड़नी चाहिए।

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