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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The High Court sought a response from DU and the college for not uploading the student's marks on the portal

Delhi NCR News: छात्रा के अंक पोर्टल पर अपलोड न करने पर हाईकोर्ट ने डीयू और कॉलेज से मांगा जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Aug 2025 08:04 PM IST
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अदालत ने डीयू और भगिनी निवेदिता कॉलेज को नोटिस जारी कर पक्ष रखने को कहा
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छात्रा का दावा- शिक्षक और कॉलेज की लापरवाही के कारण पूरी कक्षा हो गई फेल

संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और भगिनी निवेदिता कॉलेज से छात्रों के अंक पोर्टल पर अपलोड न करने के मामले में जवाब मांगा है। मामला एक छात्रा और उसकी पूरी कक्षा को शिक्षक और उसके संस्थान की लापरवाही के कारण फेल घोषित किए जाने का है। न्यायमूर्ति विकास महाजन ने छात्रा की याचिका पर डीयू व कॉलेज को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
याचिका कॉलेज की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ने दायर की है। उसने दावा किया कि शैक्षणिक सत्र 2024-2025 के छठे सेमेस्टर के परिणाम में देश में दिव्यांग बच्चे विषय की प्रायोगिक परीक्षा में उसे मनमाने और अन्यायपूर्ण तरीके से एफ ग्रेड दिया गया। याचिकाकर्ता ने सैद्धांतिक, आंतरिक मूल्यांकन और बाहरी प्रायोगिक परीक्षा में शामिल होने का दावा किया जिसमें प्रायोगिक फाइल मूल्यांकन, मौखिक परीक्षा और लिखित परीक्षा शामिल है। छात्रा ने दावा किया कि उन्होंने थ्योरी और आंतरिक प्रायोगिक दोनों में अच्छे अंक प्राप्त किए थे।
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छात्रा का दावा है कि संबंधित शिक्षक और कॉलेज प्रशासन की लापरवाही व कुप्रबंधन के कारण बाहरी प्रायोगिक परीक्षा के अंक विश्वविद्यालय पोर्टल पर अपलोड नहीं किए गए। इस कारण याचिकाकर्ता समेत पूरी कक्षा को उक्त विषय के व्यावहारिक भाग में अनुचित रूप से फेल घोषित किया गया है। याचिका में कहा गया है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को ईमेल और अन्य माध्यमों से बार-बार शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
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याचिका के अनुसार, संबंधित शिक्षक और कॉलेज प्रशासन गलती को सुधारने के बजाय एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे रहे जिससे याचिकाकर्ता और इसी तरह प्रभावित अन्य छात्रों को कोई राहत नहीं मिली। याचिका में कहा गया है कि इस गलत परिणाम ने छात्रा के समग्र सीजीपीए और शैक्षणिक रिकॉर्ड को सीधे तौर पर प्रभावित किया है जिसका उसकी उच्च शिक्षा, यूजीसी-नेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं और पीएचडी प्रवेश सहित भविष्य की शैक्षणिक गतिविधियों, जहां शैक्षणिक ग्रेड एक महत्वपूर्ण कारक होते हैं। उनके लिए उसकी पात्रता और संभावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मेंं छात्र ने अदालत से आग्रह किया कि वह प्राधिकारियों को निर्देश दे कि वे प्रैक्टिकल परीक्षा में प्राप्त वास्तविक अंकों को शामिल करें। साथ ही, संशोधित मार्कशीट में संबंधित विषय में उत्तीर्णता का उल्लेख करें।
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