तो क्या यहां एक भी पेड़ नहीं बचेंगे!
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फरीदाबाद की मिट्टी में बढ़ती दीमकों की संख्या वन विभाग के साथ ही निवासियों के भी होश उड़ा रही है। हर वर्ष लाखों पौधे लगाने के बाद भी शहर में हरियाली का प्रतिशत नहीं बढ़ रहा।
वजह मिट्टी में मौजूद दीमक पेड़ों को खा रहे हैं। लंबे समय तक दीमक लगे होने के कारण हर वर्ष करीब 25 प्रतिशत पेड़ नष्ट हो रहे हैं।
नमी ज्यादा होने और पोषक तत्वों की कमी के कारण मिट्टी में दीमकों की संख्या बढ़ गई है जिससे नए पौधे छह महीने से ज्यादा नहीं टिक रहे हैं। जब तक खाद डाली जाती है तब तक तो पौधे और पेड़ ठीक रहते हैं उसके बाद धीरे-धीरे सूखने लगते हैं।
वन विभाग के रेंज अधिकारी विजयपाल ने बताया कि दीमक के कारण पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। जहां नियमित खाद नहीं पड़ती वहां पर पौधे सूखने लगते हैं।
स्टैंडर्ड मानक से ज्यादा है पीएच वैल्यू
इस पर जब सीनियर साइंटिस्ट डॉ. देशमुख से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, 'मिट्टी में नमी ज्यादा होने और पोषक तत्वों की कमी के कारण दीमकों की संख्या बढ़ रही है। मिट्टी में पावर आफ हाइड्रोजन (पीएच) की मात्रा का स्टैंडर्ड मानक 5.30 है। जबकि शहर की मिट्टी में 8.30 पीएच होने के कारण यहां की मिट्टी लवणीय हो गई है। नतीजा मिट्टी तो खराब हो गई है लोगों के घर तक दीमक से नहीं बच रहे।'
वहीं पर्यावरणविद विजयपाल बघेल ने बताया कि, 'मिट्टी में दीमक बढ़ने से वनस्पतियां, जल, वाइल्ड लाइफ भी प्रभावित होती हैं। पेड़ को जीवधारी माना गया है। ऐसे में पेड़ों में दीमक लगता है तो बैक्टिरिया पनप जाते हैं जो उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे बचने के लिए नीम की खली सबसे अधिक उपयोगी है। इसके अलावा जैविक खाद का भी इस्तेमाल करके पेड़ों को बचाया जा रहा है।'
दीमक बढ़ने के मामले में फरीदाबाद दूसरे नंबर पर
पर्यावरण संतुलन के लिए किसी भी शहर के भूभाग का करीब 33 फीसदी हिस्सा हराभरा होना चाहिए। वर्ष 2011 में सैटेलाइट से लिए गए आंकडों के मुताबिक फरीदाबाद में मात्र 1.5 से 1.75 हिस्सा ही ग्रीन कवर एरिया बचा है।