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तो क्या यहां एक भी पेड़ नहीं बचेंगे!

Fri, 22 Aug 2014 08:37 AM IST
Updated Fri, 22 Aug 2014 08:37 AM IST
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Termite increasing in soil, eating plants

फरीदाबाद की मिट्टी में बढ़ती दीमकों की संख्या वन विभाग के साथ ही निवासियों के भी होश उड़ा रही है। हर वर्ष लाखों पौधे लगाने के बाद भी शहर में हरियाली का प्रतिशत नहीं बढ़ रहा।

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वजह मिट्टी में मौजूद दीमक पेड़ों को खा रहे हैं। लंबे समय तक दीमक लगे होने के कारण हर वर्ष करीब 25 प्रतिशत पेड़ नष्ट हो रहे हैं।

नमी ज्यादा होने और पोषक तत्वों की कमी के कारण मिट्टी में दीमकों की संख्या बढ़ गई है जिससे नए पौधे छह महीने से ज्यादा नहीं टिक रहे हैं। जब तक खाद डाली जाती है तब तक तो पौधे और पेड़ ठीक रहते हैं उसके बाद धीरे-धीरे सूखने लगते हैं।
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वन विभाग के रेंज अधिकारी विजयपाल ने बताया कि दीमक के कारण पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। जहां नियमित खाद नहीं पड़ती वहां पर पौधे सूखने लगते हैं।

स्टैंडर्ड मानक से ज्यादा है पीएच वैल्यू

Termite increasing in soil, eating plants

इस पर जब सीनियर साइंटिस्ट डॉ. देशमुख से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, 'मिट्टी में नमी ज्यादा होने और पोषक तत्वों की कमी के कारण दीमकों की संख्या बढ़ रही है। मिट्टी में पावर आफ हाइड्रोजन (पीएच) की मात्रा का स्टैंडर्ड मानक 5.30 है। जबकि शहर की मिट्टी में 8.30 पीएच होने के कारण यहां की मिट्टी लवणीय हो गई है। नतीजा मिट्टी तो खराब हो गई है लोगों के घर तक दीमक से नहीं बच रहे।'

वहीं पर्यावरणविद विजयपाल बघेल ने बताया कि, 'मिट्टी में दीमक बढ़ने से वनस्पतियां, जल, वाइल्ड लाइफ भी प्रभावित होती हैं। पेड़ को जीवधारी माना गया है। ऐसे में पेड़ों में दीमक लगता है तो बैक्टिरिया पनप जाते हैं जो उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे बचने के लिए नीम की खली सबसे अधिक उपयोगी है। इसके अलावा जैविक खाद का भी इस्तेमाल करके पेड़ों को बचाया जा रहा है।'

दीमक बढ़ने के मामले में फरीदाबाद दूसरे नंबर पर

Termite increasing in soil, eating plants
पेस्ट कंट्रोल विशेषज्ञ मंजीत सिंह ने बताया कि, एनसीआर की मिट्टी में लगातार बढ़ते दीमकों की संख्या में गुड़गांव नंबर-1 और फरीदाबाद का स्थान दूसरा है। यहां सबसे अधिक पेस्ट कंट्रोल का काम होता है। शहर में न केवल मिट्टी बल्कि घरों की दीवार और लकड़ी के वर्क में दीमक लगते हैं।


पर्यावरण संतुलन के लिए किसी भी शहर के भूभाग का करीब 33 फीसदी हिस्सा हराभरा होना चाहिए। वर्ष 2011 में सैटेलाइट से लिए गए आंकडों के मुताबिक फरीदाबाद में  मात्र 1.5 से 1.75 हिस्सा ही ग्रीन कवर एरिया बचा है।
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