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Delhi NCR News: अफीम की तस्करी का आतंकियों तक पहुंच रहा था पैसा, चार गिरफ्तार
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- हथियार खरीदने और आतंकी गतिविधियों में किया जा रहा था ड्रग्स की तस्करी से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और अवैध हथियार तस्करी के जाल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह अफीम को खाने-पीने के सामान के बीच छिपाकर डाक सेवा के जरिये कनाडा भेज रहा था। नशे से मिली रकम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और हथियार खरीदने में होता था।
विशेष आयुक्त क्राइम एचजीएस धालीवाल ने बताया कि इस नेटवर्क के तार खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े हैं। विदेश भेजी जा रही अफीम उसके जाल तक पहुंचाई जानी थी। अर्श डल्ला के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। 7 फरवरी को दिल्ली से कनाडा भेजे जा रहे एक पार्सल में अफीम होने की सूचना मिली थी। क्राइम ब्रांच के दल ने मोती नगर स्थित डाक सेवा कंपनी के कार्यालय से पार्सल को रोक लिया। पार्सल में ऊपर खाने का सामान और घरेलू चीजें रखी थीं। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच की। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में छापे मारे गए। पुलिस ने आरोपियों से कुल 5.138 किलोग्राम अफीम बरामद की है।
गिरफ्तार तस्करों की भूमिका
क्राइम ब्रांच ने सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यदविंदर सिंह उर्फ जशन संधू और जीवन सिंह को गिरफ्तार किया है। हरदीप सिंह भारत में अफीम की व्यवस्था और गिरोह का काम संभालता था। यदविंदर सिंह अफीम की खरीद, पैकिंग और विदेश में बैठे लोगों के बीच संपर्क का काम करता था। सिमरनजीत सिंह फर्जी दस्तावेज के जरिये डाक सेवा बुक करता और अफीम को सामान में छिपाता था। जीवन सिंह राजस्थान से खेप भेजने में मदद करता था।
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नेटवर्क का संचालन
तस्कर डाक सेवा बुक करने के लिए फर्जी केवाईसी दस्तावेज और दूसरे लोगों के नाम इस्तेमाल करते थे। अफीम को अलग-अलग लोगों के जरिये भेजा जाता था ताकि असली आरोपियों तक आसानी से न पहुंचा जा सके। बातचीत के लिए एन्क्रिप्टेड मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग होता था। नशे की कमाई और दूसरे खर्चों के लिए दूसरे लोगों के बैंक खातों और यूपीआई का भी इस्तेमाल किया गया। यह जाल पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और विदेश तक फैला था।
नशे के बदले हथियार और कीमत
जांच में पता चला कि विदेश में अफीम बेचने से मिली रकम से हथियार खरीदे जा रहे थे। ये हथियार पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिये पहुंचाए जाते थे। पुलिस ने इसे 'नशे के बदले हथियार' का जाल बताया है। भारत में करीब 1.5 लाख रुपये किलो में खरीदी जाने वाली अफीम कनाडा में 50 से 100 कनाडाई डॉलर प्रति ग्राम तक बिक सकती थी। इससे तस्करों को कई गुना अधिक लाभ मिलता था। पुलिस अब गिरोह के विदेश में बैठे तस्करों और पंजाब में सक्रिय अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ और अवैध हथियार तस्करी के जाल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में चार तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह अफीम को खाने-पीने के सामान के बीच छिपाकर डाक सेवा के जरिये कनाडा भेज रहा था। नशे से मिली रकम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और हथियार खरीदने में होता था।
विशेष आयुक्त क्राइम एचजीएस धालीवाल ने बताया कि इस नेटवर्क के तार खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला से जुड़े हैं। विदेश भेजी जा रही अफीम उसके जाल तक पहुंचाई जानी थी। अर्श डल्ला के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। 7 फरवरी को दिल्ली से कनाडा भेजे जा रहे एक पार्सल में अफीम होने की सूचना मिली थी। क्राइम ब्रांच के दल ने मोती नगर स्थित डाक सेवा कंपनी के कार्यालय से पार्सल को रोक लिया। पार्सल में ऊपर खाने का सामान और घरेलू चीजें रखी थीं। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच की। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में छापे मारे गए। पुलिस ने आरोपियों से कुल 5.138 किलोग्राम अफीम बरामद की है।
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गिरफ्तार तस्करों की भूमिका
क्राइम ब्रांच ने सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यदविंदर सिंह उर्फ जशन संधू और जीवन सिंह को गिरफ्तार किया है। हरदीप सिंह भारत में अफीम की व्यवस्था और गिरोह का काम संभालता था। यदविंदर सिंह अफीम की खरीद, पैकिंग और विदेश में बैठे लोगों के बीच संपर्क का काम करता था। सिमरनजीत सिंह फर्जी दस्तावेज के जरिये डाक सेवा बुक करता और अफीम को सामान में छिपाता था। जीवन सिंह राजस्थान से खेप भेजने में मदद करता था।
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तस्कर डाक सेवा बुक करने के लिए फर्जी केवाईसी दस्तावेज और दूसरे लोगों के नाम इस्तेमाल करते थे। अफीम को अलग-अलग लोगों के जरिये भेजा जाता था ताकि असली आरोपियों तक आसानी से न पहुंचा जा सके। बातचीत के लिए एन्क्रिप्टेड मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग होता था। नशे की कमाई और दूसरे खर्चों के लिए दूसरे लोगों के बैंक खातों और यूपीआई का भी इस्तेमाल किया गया। यह जाल पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और विदेश तक फैला था।
नशे के बदले हथियार और कीमत
जांच में पता चला कि विदेश में अफीम बेचने से मिली रकम से हथियार खरीदे जा रहे थे। ये हथियार पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिये पहुंचाए जाते थे। पुलिस ने इसे 'नशे के बदले हथियार' का जाल बताया है। भारत में करीब 1.5 लाख रुपये किलो में खरीदी जाने वाली अफीम कनाडा में 50 से 100 कनाडाई डॉलर प्रति ग्राम तक बिक सकती थी। इससे तस्करों को कई गुना अधिक लाभ मिलता था। पुलिस अब गिरोह के विदेश में बैठे तस्करों और पंजाब में सक्रिय अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।