इन्फ्लुएंसर बनने की चाह में पकड़ी गलत राह: मां के मोबाइल छीनने पर किशोर ने घर छोड़ा, इस हरकत के बाद गया पकड़ा
15 जनवरी की सुबह जीआरपी और आरपीएफ कर्मियों ने किशोर को बंगलूरू रेलवे स्टेशन पर सुरक्षित हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस टीम और किशोर के पिता बंगलूरू पहुंचे और 19 जनवरी को उसे दिल्ली वापस लाया गया।
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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने की चाह और माता-पिता द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से नाराज 14 वर्षीय एक किशोर को दिल्ली पुलिस ने ''ऑपरेशन मिलाप'' के तहत बंगलूरू रेलवे स्टेशन से सकुशल ढूंढ निकाला। मां ने जब उससे मोबाइल छीन लिया तो किशोर ने इस महीने की शुरुआत में घर छोड़ दिया था।
पुलिस के अनुसार, किशोर 11 जनवरी को बुराड़ी से लापता हो गया था। उसके मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग, ऑनलाइन गेमिंग और इन्फ्लुएंसर बनने की महत्वाकांक्षा को लेकर माता-पिता से उसका विवाद हुआ था। उत्तर जिला के पुलिस उपायुक्त राजा बंथिया ने बताया कि लड़के के लापता होने के बाद उसके पिता ने अपहरण की आशंका जताते हुए स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए नाबालिग को जल्द से जल्द तलाशने के लिए एक टीम गठित की गई। प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि किशोर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर बनना चाहता था और नियमित रूप से छोटे वीडियो ऑनलाइन अपलोड करता था।
माता-पिता उसके लंबे समय तक मोबाइल फोन इस्तेमाल और ऑनलाइन गेमिंग को लेकर नाराज थे, जिससे घर में बार-बार विवाद हो रहा था। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि स्थिति तब बिगड़ गई जब उसकी मां ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया। इसके बाद किशोर अपने पिता का फोन लेकर चुपचाप घर से निकल गया। तकनीकी निगरानी शुरू में मुश्किल रही, क्योंकि फोन अक्सर बंद रहता था। हालांकि बाद में पिता के खाते से किए गए यूपीआई लेनदेन सामने आए, जिससे पुष्टि हुई कि किशोर सफर में है और बीच-बीच में फोन का इस्तेमाल कर रहा है।
ऐसे मिला सुराग-
लोकेशन इनपुट से उसके महाराष्ट्र होते हुए ट्रेन से यात्रा करने के संकेत मिले। 14 जनवरी की देर रात फोन की लोकेशन कर्नाटक के हुब्बली में मिली, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह लंबी दूरी की ट्रेन में सवार था। पुलिस ने रेलवे मूवमेंट डेटा का विश्लेषण किया और संभावित ट्रेनों की पहचान कर विभिन्न मंडलों में सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) से समन्वय किया। ट्रेन के बंगलूरू पहुंचने से पहले किशोर की जानकारी वहां की रेलवे पुलिस को साझा की गई।
रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया-
इस समन्वित प्रयास के तहत 15 जनवरी की सुबह जीआरपी और आरपीएफ कर्मियों ने किशोर को बंगलूरू रेलवे स्टेशन से सुरक्षित हिरासत में ले लिया। इसके बाद पुलिस टीम और किशोर के पिता बंगलूरू पहुंचे और 19 जनवरी को उसे दिल्ली वापस लाया गया।
काउंसलिंग और पूछताछ के दौरान किशोर ने बताया कि वह नई दिल्ली से ट्रेन में सवार हुआ था और तमिलनाडु तक जाने का इरादा रखता था। उसने यह भी स्वीकार किया कि यात्रा के दौरान वह डिजिटल भुगतान करने और वीडियो अपलोड करने के लिए बीच-बीच में फोन चालू करता था, जिससे पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रैक करने में मदद मिली।सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किशोर को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि अपहरण या किसी आपराधिक गतिविधि के कोई सबूत नहीं मिले हैं।