कोरोना से जंगः टीम-36 ने गाजियाबाद को दी बड़ी डोज, हर घर और हर पॉजिटिव मरीज पर नजर
- कंट्रोल रूम से हर घर और हर कोरोना पॉजिटिव मरीज पर नजर
- अब तक 19017 शिकायतों का किया समाधान
- शुरू में 58.66 लाख लोगों को खाने के पैकेट बांटने में निभाई भूमिका
- नौ पटल वाले कंट्रोल रूम पर तीन शिफ्ट में तैनात हैं 36 लोग
विस्तार
हैलो...मैं इंदिरापुरम से बोल रहा हूं मेरी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है लेकिन कोरोना का कोई लक्षण नहीं हैं। मैं चाहता हूं कि मुझे होम आईसोलेशन में रहने की इजाजत दी जाए। कंट्रोल रूम : आपके घर कुछ ही देर में हमारी टीम पहुंच रही हैं वह निरीक्षण करेगी फिर कंफर्म कर पाएंगे कि आपको होम आईसोलेशन में रखा जाए या नहीं...
जिले में कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने में अहम भूमिका निभा रहे कंट्रोल रूम में हर मिनट पर कुछ इसी तरह की बातचीत होती आपको सुनाई पड़ेगी। रविवार को अमर उजाला की टीम कंट्रोल रूम में पहुंची तो हर पटल पर बैठा सदस्य अपने काम में व्यस्त था।कोई शिकायतें दर्ज कर रहा था तो कोई सामने लगी स्क्रीन पर नजर गड़ाए कोविड अस्पतालों की निगरानी कर रहा था। प्रशासन का दावा है कि अभी तक की कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कंट्रोल रूम का अहम योगदान रहा है और आने वाले समय में भी कोरोना को हराने में भी बड़ी भूमिका होगी।
गाजियाबाद को कोरोना से बचाने में प्रशासनके कंट्रोल रूम की टीम-36 एक बड़े योद्धा की तरह सामने आई है। दिल्ली से जुड़ा इलाका होने के कारण शुरू में यहां जिस तेजी से कोरोना के पॉजिटिव केस सामने आए, उसने चिंता बढ़ा दी थी। हाल के कुछ दिनों में जिस तेजी से ट्रेसिंग, टेस्टिंग और ट्रीटमेंट हुआ उसने कोरोना की रफ्तार थमी है।
यहां खाना बांटने से जरूरतमंदों के इलाज और कोरोना के मरीजों की जांच में कंट्रोल रूम की टीम-36 ने बड़ी भूमिका निभाई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी इस गाजियाबाद के इस मॉडल की तारीफ की हैं। प्रदेश के बाकी जिले भी अब इस फार्मूले का अध्ययन कर रहे हैं।
जनता कर्फ्यू और उसके बाद लॉकडाउन लगने पर राज्य सरकार ने जनपद स्तर पर कंट्रोल रूम बनाने का निर्देश दिया। 26 मार्च को प्रशासन ने विकास भवन के सभागार में कंट्रोल रूम शुरू किया। जनता के लिए नौ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए। गाजियाबाद में डीएम अजयशंकर पांडेय ने कंट्रोल रूम में नौ पटल बनाए।
इन नौ पटल पर 36 लोगों की ड्यूटी लगाई गई। इसलिए इसे टीम-36 भी कहा गया। यह 36 लोग दिन रात की तीन शिफ्ट में काम करते हैं। शुरूआत में चुनौती लॉकडाउन में फंसे मजदूरों को भोजन मुहैया कराने की थी। हर जगह की शिकायतों को यहां पर दर्ज फील्ड में काम कर रही टीम को भेजकर राशन व खाने के पैकेज मुहैया कराए गए।
उसके बाद प्रवासी मजदूरों के पलायन की समस्या खड़ी हुई तो प्रदेश के बाकी जिलों व अन्य राज्यों के श्रमिकों की पूरी जानकारी नोट की गई। उसके बाद 1230 बसों से 49300 और 31 रेल गाड़ियों के माध्यम से 42056 मजदूरों के उनके गृह जनपद तक भेजा जा सका। इन समस्याओं से निजात मिली तो बढ़ते कोरोना मरीजों को समय पर इलाज मुहैया कराने और 100 फीसदी मरीजों की ट्रेसिंग करने का बड़ा काम था। यह दायित्व भी कंट्रोल रूम को सौंपा गया।
साथ में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम को लगा दिया गया और अब होम आईसोलेशन की सुविधा शुरू हुई तो उसकी निगरानी का दायित्व भी कंट्रोल रूम को सौंप दिया गया। इसी का नतीजा है कि 26 जुलाई से रविवार शाम तक प्रशासन 186 आवेदनों में से 173 को होम आईसोलेशन की अनुमति दे चुका है। असल तारीफ इस बात को लेकर हो रही है कि गाजियाबाद में कंट्रोल रूम के अंदर कार्य विभाजन बेहद शानदार तरीके से किया गया है। इसी का नतीजा है कि कंट्रोल रूम और फील्ड में काम कर रही टीम के बीच बेहतर समन्वय है, जिससे चीजों को लागू कराना आसान है।
कंट्रोल रूम बनाता है थानेवार लिस्ट
रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होते ही कंट्रोल रूम एड्रेस व थाने वाइज मरीजों की लिस्टिंग तैयार करता है। तीन थानों पर एक आरआरटी (रैपिड रिस्पांस टीम) है।कंट्रोल में ही बैठे एंबुलेंस टीम के इंचार्ज को उन मरीजों की लिस्ट दी जाती है जिन्हें भर्ती कराना होता है। मरीज भर्ती होने के बाद अस्पताल से कंफर्म किया जाता है। इसके बाद मरीज जब तक भर्ती रहता है तो उससे फीडबैक लिया जाता है।
लापता 560 मरीज खोजे
कुछ मरीज अपना पता और मोबाइल नंबर गलत लिखवाते हैं। कोरोना की पुष्टि होने पर ऐसे मरीजों को खोजने के लिए पुलिस की मदद ली जाती है। प्रतिदिन शाम को एसपी क्राइम को ऐसे लोगों की लिस्ट मुहैया कराई जाती है। उसके बाद पुलिस सर्विलांस के माध्यम से मरीजों की खोज करती है। अब तक 560 मरीजों को खोजा गया है।
कड़ी निगरानी और मैनेजमेंट ने बनाया अलग
एडीएम वित्त एवं राजस्व को कंट्रोल रूम का नोडल ऑफिसर हैं। प्रतिदिन कंट्रोल का निरीक्षण कर फीडबैक लेता हूं। कंट्रोल रूम के माध्यम से यह भी सुनिश्चित करा रहे हैं कि होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों से भी दिन में दो बार फीड बैक लिया जाए, जिससे की उनकी सेहत का पता किया जा सके। इसलिए हमारा कंट्रोल रूम बेहतर तरीके से काम कर रहा है। - अजय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी