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Delhi NCR News: ‘ताजमहल का टेंडर’ में व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य, हंसी से लोटपोट हुए दर्शक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 06:52 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली।
सोचिए शाहजहां को यदि आज के जमाने में ताजमहल बनवाना हो तो कितना मुश्किल होगा। यदि शाहजहां अपने मुलाजिमों को बुलाए और दरवारी कहे हुजूर बुलावा भेजा है, व्हाट्सएप पर ब्लू टिक हो गया गई, बस आते ही होंगे…। बस कुछ ऐसा ही हंसी और चुटकुलों से भरपूर नाटक था ताजमहल टेंडर। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के ग्रीष्मकालीन नाट्य समारोह के अंतर्गत अभिमंच सभागार में शनिवार को चर्चित व्यंग्य नाटक ताजमहल का टेंडर का मंचन किया गया। अजय शुक्ल की लिखित इस नाटक का निर्देशन लगभग 28 वर्ष पहले चित्तरंजन त्रिपाठी ने किया था, जो उस समय रंगमंडल के कलाकार थे और वर्तमान में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक हैं।





नाटक की कहानी एक रोचक कल्पना पर आधारित है। यदि आज के समय में शाहजहां ताजमहल बनवाने निकलें, तो उन्हें सरकारी दफ्तरों, फाइलों, टेंडर प्रक्रिया और विभागीय जटिलताओं के बीच किस तरह भटकना पड़ेगा। इसी विचार को आधार बनाकर नाटक व्यवस्था की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिलाई पर करारा व्यंग्य करता है।
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