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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Swine flu cases surge; over 100 new patients reported daily

Delhi NCR News: स्वाइन फ्लू ने पकड़ी रफ्तार, रोज 100 से ज्यादा आ रहे नए मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 07:15 PM IST
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-इस सीजन में अब तक स्वाइन फ्लू के 2,260 मामले आ चुके हैं सामने,
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डॉक्टरों का अनुमान, संक्रमण अगले महीने अपने चरम पर पहुंच सकता है

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मानसून के साथ दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक नए मरीज सामने आ रहे हैं। इस सीजन में अब तक स्वाइन फ्लू के 2,260 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 348 मरीज दिल्ली से बाहर के हैं, जो इलाज के लिए दिल्ली के अस्पतालों में पहुंचे हैं। डॉक्टरों का अनुमान है कि संक्रमण अगले महीने अपने चरम पर पहुंच सकता है। हालांकि, राहत की बात है कि ज्यादातर मरीजों में लक्षण हल्के हैं इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ रही है।

एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. ललित धर के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में इन्फ्लुएंजा के तीन प्रमुख प्रकार ज्यादा सक्रिय रहे हैं। इनमें एच1एन1, एच3एन2 और इन्फ्लुएंजा बी शामिल हैं। एच1एन1 वर्ष 2009 में महामारी के रूप में सामने आया था, लेकिन अब यह मौसमी फ्लू का हिस्सा बन चुका है। उनके अनुसार, एच1एन1 आरएनए वायरस है और समय के साथ इसमें छोटे बदलाव होते रहते हैं। एम्स की वायरोलॉजी लैब यह पता लगाने के लिए वायरस की निगरानी कर रही है कि उसमें कोई बड़ा बदलाव तो नहीं हुआ है। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय राय के अनुसार, जब तक वायरस में बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक इसे नया वायरस नहीं माना जाता।
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साल में दो बार बढ़ता है संक्रमण
डॉक्टर के अनुसार, देश में इन्फ्लुएंजा का संक्रमण साल में दो प्रमुख चरणों में बढ़ता है। पहला चरण मानसून के दौरान जुलाई से शुरू होता है और सितंबर में इसके मामले सबसे ज्यादा हो सकते हैं। इसके बाद अक्तूबर और नवंबर में संक्रमण के मामले कम होने लगते हैं। दूसरा चरण सर्दियों में जनवरी से मार्च के बीच देखने को मिलता है। डॉ. ललित धर ने बताया कि बुजुर्गों, बच्चों और पहले से अस्थमा, मधुमेह या हृदय रोग जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह से इन्फ्लुएंजा का टीका लगवाना चाहिए। विशेषज्ञों ने 2026-27 के लिए ट्राइवैलेंट फ्लू वैक्सीन लेने की सलाह दी है। हालांकि, टीका संक्रमण से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं देता, लेकिन बीमारी के गंभीर होने और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम कर सकता है।
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हर मरीज की नहीं हो रही जांच
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लू जैसे लक्षण वाले हर व्यक्ति की एच1एन1 जांच नहीं की जा रही है। गंभीर संक्रमण और अधिक जोखिम वाले मरीजों की ही जांच की जा रही है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और सांस या हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश या बदन दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सर गंगा राम अस्पताल के चेस्ट मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. बॉबी भालोत्रा के अनुसार, सामान्य मरीजों का इलाज अक्सर उनके लक्षणों के आधार पर किया जाता है। लेकिन, बुजुर्गों या पहले से किसी बीमारी से पीड़ित मरीजों में तेज बुखार, खांसी, जुकाम, बदन दर्द, सिरदर्द और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर की सलाह से शुरुआती 48 घंटे के अंदर एंटीवायरल दवा शुरू करना ज्यादा प्रभावी रहता है।

इन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाएं
-सांस लेने में ज्यादा परेशानी या लगातार सीने में दर्द और भारीपन।
-होंठ या चेहरे का रंग नीला पड़ना।
-चार-पांच दिन बाद भी खांसी का लगातार बढ़ना।
-बहुत ज्यादा सुस्ती या भ्रम की स्थिति।
-बच्चों में पेशाब कम होना।
-दवा लेने के 48 घंटे बाद भी बुखार कम न होना।
-पहले 48 घंटे में दवा ज्यादा असरदार
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