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सर्वे: बच्चों से संबंधित है मोबाइल और इंटरनेट का ये खतरनाक सच

Sat, 02 Apr 2016 03:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 02 Apr 2016 03:43 AM IST
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Survey: mobile and Internet dangerous truth is related to Kids
- फोटो : getty images

इलेक्ट्रॉनिक गैजट्स ने न सिर्फ बड़ों बल्कि स्कूली बच्चों की भी नींद उड़ा रखी है। देर रात मोबाइल और इंटरनेट पर चैटिंग करने, रात में उठ कर बार-बार मोबाइल चेक करने की वजह से करीब 50 फीसदी बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है।

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इस वजह से स्कूल में उन्हें नींद आती है। फोर्टिस हेल्थकेयर की ओर से दिल्ली-एनसीआर में 550 स्कूली बच्चों पर किए गए सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। दिल्ली-एनसीआर में किए गए सर्वे में सामने आया है कि करीब 33 फीसदी स्कूली बच्चे रात 11 बजे बिस्तर पर जाते हैं और करीब 15 फीसदी बच्चे मध्य रात्रि में सोने जाते हैं।
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20 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिनके सोने का कोई समय ही निर्धारित नहीं है। 34 फीसदी स्कूली बच्चों ने कहा कि रात की नींद पूरी नहीं होने की वजह से उन्हें स्कूल में नींद आती है। 29 फीसदी बच्चों ने कहा कई बार वे रात में पांच घंटे से भी कम सोते हैं, जबकि 13 फीसदी ने कहा कि वे अक्सर पांच घंटे से कम सोते हैं।

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55 फीसदी स्कूली बच्चों ने कहा कि उन्हें नींद आने में दिक्कत होती है

Survey: mobile and Internet dangerous truth is related to Kids

55 फीसदी स्कूली बच्चों ने कहा कि उन्हें नींद आने में दिक्कत होती है क्योंकि वे जब सोने जाते हैं तो दिमाग में कई चीजें एक साथ चलती रहती हैं। सर्वे में शामिल 62 फीसदी बच्चों ने कहा कि रात में सोते वक्त मोबाइल बंद नहीं करते।

66 फीसदी बच्चों ने कहा कि देर रात दोस्तों से ऑनलाइन चैटिंग की वजह से रात में उन्हें सोने में देर हो जाती है। सर्वे में शामिल 22 फीसदी बच्चों ने यह भी कहा कि रात में उठ-उठकर उन्हें मोबाइल चेक करने की आदत है।

फोर्टिस हेल्थकेयर के मेंटल हेल्थ एंड बिहेवरल साइंस के निदेशक डॉ. समीर पारिख ने कहा कि स्कूली बच्चों की नींद पूरी नहीं होने की वजह से उनमें शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर प्रभाव पड़ता है। डॉ.पारिख ने कहा कि सर्वे दिल्ली-एनसीआर के स्कूली बच्चों पर किया गया है।

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