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Delhi : गुरुग्राम के थाने में वकील से दुष्कर्म के आरोप पर हरियाणा पुलिस को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, जवाब तलब

Sat, 07 Jun 2025 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 07 Jun 2025 06:10 AM IST
सार

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा व जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने उपरोक्त अधिकारियों को चार हफ्ते के भीतर अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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Supreme Court notice to Haryana police on allegation of a lawyer in Gurugram police station
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार, राज्य पुलिस व गुरुग्राम के सेक्टर 50 पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को एक महिला वकील की याचिका पर नोटिस जारी किया। इसमें पुलिस अधिकारियों पर दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न व अन्य अपराध करने का आरोप लगाया गया है।

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जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा व जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने उपरोक्त अधिकारियों को चार हफ्ते के भीतर अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। महिला वकील के वकील ने निष्पक्षता पर चिंताओं का हवाला देते हुए अदालत से जांच को गुरुग्राम से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की थी और निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का अनुरोध किया था। 
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वकील ने याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए अदालत से निर्देश भी मांगा। हालांकि, पीठ ने इस स्तर पर इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और संबंधित राज्य अधिकारियों को उनके जवाब के लिए नोटिस जारी करने तक ही खुद को सीमित कर लिया। 
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शिकायतकर्ता ने कहा कि 21 मई को वह अपने मुवक्किल के साथ गुरुग्राम के सेक्टर 51 महिला पुलिस थाने गई थी, जिसे उसकी पत्नी के दर्ज कराए गए मामले की जांच में शामिल होना था। उन्होंने बताया कि जब वह जांच के बाद दिल्ली लौट रही थीं, तो उनके मुवक्किल की पत्नी ने उनकी कार रोकी और गाली-गलौज करने लगीं। 

उन्होंने कार की खिड़की पर पत्थर भी फेंका। इसके बाद शिकायतकर्ता और उनके मुवक्किल ने 112 नंबर पर कॉल किया और सेक्टर 50 थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे। 

जब उनका मुवक्किल शिकायत लिखवा रहा था, तो एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें रोकने की कोशिश की। आरोप है कि जब अधिवक्ता ने कांस्टेबल की हरकत पर आपत्ति जताई, तो उन्हें जबरन एसएचओ के कमरे में ले जाया गया। जब उन्होंने एसएचओ से शिकायत की, तो उन्होंने उन्हें धमकाया भी।

एसएचओ ने धमकाया- आप गुरुग्राम में हैं दिल्ली में नहीं, यहां रोज आते हैं 365 वकील 
दिल्ली पुलिस की एफआईआर के अनुसार एसएचओ ने कहा, आप गुरुग्राम में खड़ी हैं, दिल्ली में नहीं। यहां रोजाना 365 वकील आते हैं। मैं आपको वकालत सिखाऊंगा। आपको हमारी ताकत का पता नहीं है, मैं जो चाहूंगा, करूंगा। 

इसके बाद महिला कांस्टेबल को कमरे से बाहर जाने का आदेश दिया गया। घटना के बाद अधिवक्ता के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया। उन्हें सुबह तक हिरासत में रखा गया। उसके बाद उन्हें पुलिस जमानत पर रिहा कर दिया गया। 


अगले दिन 22 मई को दिल्ली के सब्जी मंडी थाने में उक्त घटना की जीरो एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि, महिला वकील के अनुसार, बाद में मामले को गुरुग्राम के उसी थाने में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां आरोपी अधिकारी तैनात हैं। इसलिए, उन्होंने मामले को गुरुग्राम से बाहर स्थानांतरित करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया। उन्होंने मामले की एसआईटी जांच की भी मांग की थी।

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