अश्लील वेबसाइट्स पर लगेगी पाबंदी!
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सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग के सचिव को हलफनामा दाखिल करके यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या केंद्र सरकार अश्लील साइट, विशेषकर बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री दिखाने वाली साइटस को रोकने का इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को निर्देश देने में सक्षम है।
जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने आदेश में कहा कि दूरसंचार सचिव एक सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि क्या दूरसंचार या केंद्र सरकार का कोई अन्य विभाग इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को ऐसी साइट्स नहीं दिखाने का निर्देश देने के लिये सक्षम है।
अदालत ने यह आदेश उस वक्त दिया जब सेवा प्रदाताओं ने कहा कि वे सरकार के निर्देश के बिना स्वत: ही ऐसी साइट रोक नहीं सकते हैं। इंदौर निवासी वकील कमलेश वासवानी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।
'अपराध बढ़ा रही हैं ये वेबसाइट'
इस याचिका में कहा गया है कि हालांकि अश्लील वीडियो देखना दंडनीय नहीं है लेकिन अश्लीलता वाली साइट्स पर पाबंदी लगायी जानी चाहिए क्योंकि महिलाओं के प्रति अपराध में इसकी सबसे बड़ी भूमिका रहती है।
याचिकाकर्ता के वकील विजय पंजवानी ने कहा कि सरकार अभी तक ऐसी इंटरनेट साइट को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं कर सकी है और इस बारे में इंटरनेट कानूनों के अभाव की वजह से लोग अश्लील वीडियो देखते हैं क्योंकि यह अपराध नहीं है।
गौरतलब है कि याचिका में कहा गया है कि मौजूदा समय बाजार में बीस करोड़ से अधिक अश्लील वीडियो या क्लीपिंग सहजता से उपलब्ध हैं जिन्हें इंटरनेट या अन्य वीडियो सीडी के जरिये आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।