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इन दो भाइयों की कहानी पढ़कर दिल भर आएगा!

Fri, 12 Sep 2014 12:23 PM IST
Updated Fri, 12 Sep 2014 12:23 PM IST
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story of two brothers who lives in india and pakistan.

'क्या बताऊं जी। भाई साल भर बाद आया है। इसका बड़ा करोबार है और पाकिस्तान के साथ कई देशों में आउटलेट हैं। दिल्ली भी कारोबार के सिलसिले में ही आना होता है। प्रदर्शनी के चलते ही मुलाकात हो पाई है। फिर भी, तसल्ली से बात नहीं हो पाती। रविवार की शाम ही इसकी वापसी है।'

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प्रगति मैदान में एएफ टेक्सटाइल पर यह बात दिलशाद मियां ने कही। भाई से मुलाकात की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी।

दिलशाद फिलहाल चांदनी चौक में रहते हैं, जबकि भाई फरीद 1947 में पाकिस्तान चला गया था। फरीद ने बताया कि शुरुआत में बड़ी परेशानी उठानी पड़ी, लेकिन धीरे-धीरे कारोबार चल निकला। उन्होंने कहा कि कारोबारी का हिंसा से कोई ताल्लुक नहीं होता। कट्टरता भी उसमें नहीं होती। दुबई में मेरे दो आउटलेट हैं, इसमें आठ हिंदू काम करते हैं।

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सभी का साथ-साथ खाना और रहना होता है। आपसी टकराव जैसी बात ही नहीं रहती। फिर, वहां बड़ी तादाद में हिंदू हैं। लेकिन वहां तो कभी दंगा नहीं हुआ। सब अपने-अपने काम में मस्त हैं। भारत-पाक का तनाव सियासतदानों की दिमागी उपज है।
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पाक एक्सपोर्टर व सलीम एसोसिएट्स के अध्यक्ष अब्दुल सबूर ने कहा कि दोनों देशों में फर्क नहीं है। तहजीब तो एक जैसी है ही, आप भारत में घूमिए या पाकिस्तान में, रास्ते भी एक से लगेंगे।

वैसे ही फुटपाथ, बिजली के खंभे, वाहनों की रेलमपेल, दूर-दूर तक फैले गांव, शहरों की घनी बसावट, ढाबे-रेस्त्रां। सीमा न पड़े तो पता भी नहीं होगा कि आप पाकिस्तान में हैं या भारत में। जबकि यूरोप या अमेरिका दूसरी दुनिया लगता है।

हिस्टोरिक टेंपल्स इन पाकिस्तान का भी स्टॉल

story of two brothers who lives in india and pakistan.

पाक पत्रकार रीमा अब्बासी की हालिया प्रकाशित पुस्तक हिस्टोरिक टेंपल्स इन पाकिस्तान भी आलीशान पाकिस्तान का हिस्सा है। इसका एक स्टॉल प्रगति मैदान में लगाया गया है। करीब 1200 रुपये की पुस्तक सचित्र है।

इसमें हिंगलाज मंदिर, कालका गुफा मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, शिवाला मंदिर समेत पाकिस्तान में स्थित 24 मंदिरों के बारे में विस्तार में जानकारी दी गई है। पहले दिन लोगों का इसके प्रति खासा रुझान दिखा।

पहले संस्करण ने बढ़ाया था उत्साह
आलीशान पाकिस्तान का आयोजन इससे पहले 2012 में हुआ था। आयोजकों के मुताबिक, पिछली प्रदर्शनी काफी उत्साहवर्धक रही। इसमें 70 लाख अमेरिकी डॉलर का कारोबार हुआ। जबकि करीब 2.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के भावी सौदों पर भी बातचीत हुई थी। इसी का परिणाम रहा कि गुल अहमद और जुनैद जमशेद समेत कई पाकिस्तानी कारोबारियों ने भारत में अपने आउटलेट्स खोले हैं।

'पूरी तरह बंद नहीं होते बातचीत के दरवाजे'

story of two brothers who lives in india and pakistan.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित का मानना है कि समय पुरानी बातों को भूलकर नई शुरुआत करने का है। फिलहाल जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हालात भयावह हैं। दोनों देशों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

पाक उच्चायुक्त बृहस्पतिवार दोपहर प्रगति मैदान में आलीशान पाकिस्तान के उद्घाटन के बाद मीडिया से बात कर रहे थे। चार दिवसीय प्रदर्शनी में पाकिस्तान के अलग-अलग क्षेत्रों से
करीब 250 कारोबारी हिस्सा ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत-पाक रिश्ते अनूठे हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान से असहमति जताते हुए पाक उच्चायुक्त ने कहा कि कूटनीति कभी बंद नहीं होती। इसके आधे दरवाजे हमेशा खुले रखे जाते हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू त्रासदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिट्ठी पर पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के जवाब से दोनों नेताओं की कोशिश के स्तर का पता चलता है। फिलहाल समय आ गया है कि दोनों देश पुरानी बातें भूलकर नई शुरूआत करें।

वहीं, आलीशान पाकिस्तान के बारे में बासित का कहना है कि हमारे देश की कई खूबियां हैं। कारोबार से न सिर्फ व्यापारी फायदे में रहता है, बल्कि आम लोग भी नजदीक आते हैं। इस तरह के एक्सपो दोनों देशों में लगने चाहिए।

बता दें कि प्रगति मैदान के हॉल नंबर 14 और 18 में चार दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन ट्रेड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान (टीडीएपी) ने किया है। इसमें फैशन, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, कालीन, फर्नीनर, मार्बल, ग्रेनाइट, एग्रो उत्पादों व सेवा क्षेत्रों से करीब 250 कारोबारी हिस्सा ले रहे हैं।

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