स्टेप बाई स्टेप केसः बच्चों के जहरीला खाना खाने से लेकर प्रशासन के पहुंचने तक, पूरी टाइमलाइन व Facts
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बाद में 20 बच्चों को गंभीर हालत में नोएडा के जेपी, मैक्स और दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्कूल प्रबंधन पर जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप है। जानिए इस पूरे मामले में कब क्या हुआ-
टाइमलाइनः
-सवेरे 11 बजे बच्चों के पेट में दर्द शुरू हुआ
-11.45 पर डॉक्टरों की टीम स्कूल पहुंची
-1.30 बजे स्कूल की तरफ से अभिभावकों को सूचना दी गई
-2 बजे डॉक्टरों की सलाह पर बच्चे अस्पतालों में भर्ती कराए गए
-4 बजे के करीब सूचना पाकर चौकी इंचार्ज स्कूल पहुंचा
-5 बजे खाद्य विभाग की टीम जांच करने स्कूल पहुंची, प्रवेश नहीं
-6 बजे खाद्य अभिहीत अधिकारी टीम के साथ पहुंचे, सैंपल लिए
-7 बजे सिटी मजिस्ट्रेट व अन्य अधिकारी पहुंचे
-9 बजे तक स्कूल के गेट पर प्रशासन व पुलिस अधिकारी रहे, प्रवेश नहीं
आगे पढ़िए इस स्कूल के बारे में कुछ ऐसे तथ्य जो हैरान करने वाले हैं।
जांच के लिए पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट को स्कूल प्रबंधन ने घुसने नहीं दिया
स्टेप बाई स्टेप स्कूल में जांच के लिए पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट को स्कूल प्रबंधन ने घुसने नहीं दिया। डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट की तहरीर पर थाना एक्सप्रेसवे पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
अपर जिला सूचना अधिकारी राकेश चौहान ने बताया कि स्टेप बाई स्टेप स्कूल की घटना को जिलाधिकारी बीएन सिंह ने काफी गंभीरता से लिया। डीएम के ही निर्देश पर नगर मजिस्ट्रेट महेंद्र कुमार जांच के लिए पहुंचे थे लेकिन प्रबंधन द्वारा उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया।
रात करीब 9:30 बजे सरकारी काम में बाधा डालने पर धारा 328, 322 व 341 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को बच्चों के स्वास्थ्य की जांच, बीमार बच्चों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा।
2016 में भी हुई है ऐसी घटना
बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में भी स्कूल में इस तरह का हादसा हो चुका है। उस वक्त स्कूल प्रबंधन ने सत्ता में मजबूत पकड़ होने की वजह से पुलिस-प्रशासन को चंगुल में ले लिया था।
बताया जा रहा है कि स्टेप बाई स्टेप स्कूल प्रबंधन की शासन स्तर के अधिकारियों और राजनीतिक गलियारे में मजबूत पकड़ है। इसी वजह से स्कूल प्रबंधन ने घटना के बाद जांच करने पहुंची टीम को अंदर तक घुसने नहीं दिया।
सरकारी स्कूल में भी चखते हैं खाना पर इस स्कूल में नहीं
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मिड डे मील के लिए तीन स्तरीय निगरानी कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं, लेकिन गुणवत्ता युक्त खाना देने के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे निजी स्कूलों के लिए क्या नियम हैं, इसको लेकर प्रशासन भी खामोशी साधे हुए हैं।
सिस्टम पर भारी पड़ा रसूख
सुबह नाश्ता खाकर बीमार पड़े बच्चों की सूचना अभिभावकों तक पहुंची, लेकिन दिनभर यह खबर बाहर नहीं आ पाई। इसे अभिभावकों पर स्कूल की तरफ से नाजायज दबाव ही माना जाएगा। शाम को पुलिस-प्रशासन के अधिकारी स्कूल के बाहर खड़े रहे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने सिस्टम को खुली चेतावनी देते हुए किसी को अंदर घुसने तक नहीं दिया। इसे रसूख की धौंस ही कहा जाएगा।
स्कूल ने दी मां-बाप को धमकी, मिडिया से बात की तो....
स्टेप बाई स्टेप स्कूल को जैसे ही पता चला कि मामला बढ़ता जा रहा है। वैसे ही स्कूल ने अभिभावकों को चुप रहने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं जिन अस्पतालों में बच्चे भर्ती किए गए थे, उन अस्पतालों से भी कह दिया गया कि किसी भी तरह की जानकारी बाहर नहीं जानी चाहिए।
एक अभिभावक ने बताया कि स्कूल की तरफ से साफ कहा गया कि वो किसी से बात ना करें। अगर किसी अभिभावक का मीडिया में कोट आया तो उसके बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाएगा। ऐसे में अभिभावक डर गए। मीडिया वालों से बात करने से कन्नी काटते रहे।
डेढ़ घंटे तक खाद्य विभाग की टीम को घुसने नहीं दिया
स्टेप बाई स्टेप स्कूल में बृहस्पतिवार को विषाक्त भोजन खाने से बच्चे बीमार होने की सूचना पर खाद्य विभाग की टीम जांच करने के लिए स्कूल पहुंची, लेकिन स्कूल प्रशासन ने डेढ़ घंटे तक टीम को घुसने नहीं दिया। जब मीडिया की टीम पहुंची तो टीम को अंदर जाने दिया गया। इसके बाद टीम ने जांच करते हुए आशीर्वाद आटा, अजवाइन व तेल के नमूने लिए।
दरअसल, नोएडा ही नहीं, बल्कि जिले का सबसे नामचीन स्कूल स्टेप बाई स्टेप बच्चों को खाना स्कूल में ही मुहैया कराता है। बृहस्पतिवार को रोजाना की तरह स्कूल की ओर से आलू का पराठा बच्चों को खाने के लिए दिया गया था, लेकिन उसे खाने के बाद बच्चे बीमार हो गए और आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जबकि कुछ बच्चों का इलाज स्कूल में ही कराया गया। खराब खाने की सूचना पर अभिहीत अधिकारी संजय शर्मा ने तीन सदस्यीय टीम को स्कूल में जांच करने के लिए भेजा, लेकिन स्कूल प्रशासन ने टीम को जांच के लिए अंदर ही नहीं घुसने दिया।
अभिहीत अधिकारी समेत कई अन्य अफसरों ने स्कूल से संपर्क साधा पर कोई फायदा हनीं हुआ। अंत में अधिकारी को स्वयं मौके पर आना पड़ा और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद टीम स्कूल में घुस पाई।
हालांकि, बाद में टीम ने खाने और रसोई समेत अन्य पदार्थों का निरीक्षण करते हुए नमूने लिए। अधिकारियों ने बताया कि अभी नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया है, उसके बाद रिपोर्ट आएगी तभी कुछ कहा जा सकेगा।