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Delhi: रोहिणी जिले में पुलिस आयुक्त के नहीं DCP के चलते हैं आदेश, थानाध्यक्षों को नहीं मिलता साप्ताहिक रेस्ट

Wed, 01 Mar 2023 08:40 AM IST
शाहरुख खान पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 01 Mar 2023 08:40 AM IST
सार

दिल्ली पुलिस मुख्यालय का आदेश है कि थानाध्यक्ष सप्ताह में एक बार 23 घंटे के लिए अपने घर जा सकता है। ज्यादातर थानाध्यक्ष सप्ताह में शनिवार व रविवार को थाने से अपने घर जाते हैं। आईपीएफ अफसर गुर इकबाल सिद्धू को चार नवंबर, 2022 को रोहिणी जिले की कमान सौंपी गई। उन्होंने आते ही फरमान जारी कर दिया कि थानाध्यक्ष 15 दिन में अपने घर जा सकते हैं।

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station chief are not given weekly rest DCP orders Delhi In Rohini district
दिल्ली पुलिस मुख्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोहिणी जिले में पुलिस आयुक्त के आदेशों को खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां पर दिल्ली पुलिस आयुक्त के नहीं बल्कि डीसीपी गुर इकबाल सिद्धू के आदेश चलते हैं। इस जिले में थानाध्यक्षों को सप्ताह में कोई रेस्ट नहीं दिया जाता है। 
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खास बात ये है कि जिले के पुलिसकर्मियों को सीएल न के बराबर दी जाती है। इसके अलावा जिले में तैनात एसीपी व थानाध्यक्ष समेत सभी पुलिसकर्मियों को जिला डीसीपी से मिलने के लिए टाइम फिक्स हैं। पर्ची बनवाकर ही पुलिस अधिकारी डीसीपी से मिल सकते हैं। डीसीपी के इन तुगलकी फरमानों से जिले के एसीपी व थानाध्यक्ष में असंतोष है।
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दिल्ली पुलिस मुख्यालय का आदेश है कि थानाध्यक्ष सप्ताह में एक बार 23 घंटे के लिए अपने घर जा सकता है। ज्यादातर थानाध्यक्ष सप्ताह में शनिवार व रविवार को थाने से अपने घर जाते हैं। आईपीएफ अफसर गुर इकबाल सिद्धू को चार नवंबर, 2022 को रोहिणी जिले की कमान सौंपी गई। उन्होंने आते ही फरमान जारी कर दिया कि थानाध्यक्ष 15 दिन में अपने घर जा सकते हैं।
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वह भी रात 9.30 बजे उनसे पूछकर जाएंगे और अगले दिन सुबह नौ बजे थाने पहुंचकर अपनी लोकेशन उनको भेजेंगे। जिले के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी थाने के थानाध्यक्ष समेत किसी भी इंस्पेक्टर को पिछले चार महीने में एक भी साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया गया है। डीसीपी किसी को सीएल नहीं देते। 
 

बहुत निवेदन के बाद सीएल मिलती है। जिले में तैनात एक महिला एसीपी के बेटे की शादी थी। डीसीपी ने उन्हें मेहंदी व अन्य रस्म के लिए छुट्टी नहीं दी। सिर्फ शादी के लिए छुट्टी दी। उन्होंने जिले के एडिशनल डीसीपी को भी किसी को छुट्टी देने के लिए मनाही कर रखी है।

 

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिले में किसी भी थाने में कोई मामला दर्ज होता है तो डीसीपी से अनुमति लेनी होती है। अभी तक छोटे-मोटे मामले ऐसे ही दर्ज कर लिए जाते थे। जालसाजी व गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए डीसीपी की अनुमति लेनी होती है। 
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