यहां हर वक्त पीछे रहती है मौत की ‘परछाई’, सूरत हादसे से भी दिल्ली प्रशासन नहीं ले रहा सबक
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सूरत में हुई हृदय विदारक घटना के बाद भी निगमों ने सबक नहीं लिया है। आलम यह है कि विकास मार्ग स्थित लक्ष्मी नगर से निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन के बीच तमाम कोचिंग संस्थानों, दुकानों व अन्य स्थानों पर आग से सुरक्षा और पार्किंग समेत मानकों की अनदेखी की जा रही है। एमसीडी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत का यह सिलसिला नहीं थमा तो सूरत जैसा हादसा कभी भी हो सकता है। रिहायशी इलाकों में भी सैकड़ों पेइंग गेस्ट (पीजी) बगैर अनुमति चल रहे हैं।
पूर्वी दिल्ली के विकास मार्ग पर सभी प्रोफेशनल कोर्स और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। तंग सीढ़ियां, आग से बचाव के नाकाफी इंतजाम, प्रवेश और निकासी के लिए एक ही रास्ता होने के अलावा हर तरफ बिजली की तारें उलझी हुई देखी जा सकती हैं। यदि इनमें से किसी भी बिल्डिंग में आग लग जाए तो राहत और बचाव तो दूर, कमरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाएगा। अधिकतर बिल्डिंगों के बाहर लगे होर्डिंग खिड़कियों के बाहर लगे हैं, जो हादसे के वक्त परेशानी और बढ़ा देंगे। एक कोचिंग संस्थान के संचालक ने बताया कि उन्होंने आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र के अलावा तमाम उपाय किए हैं। आपात स्थिति से बचने के लिए समय-समय पर छात्र-छात्राओं को दिशा-निर्देश भी दिए जाते हैं।
अधिकतर पीजी ने नहीं ली है अनुमति
कोचिंग संस्थान में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स खासतौर पर लड़कियों के लिए लक्ष्मी नगर में सैकड़ों पीजी हैं। अधिकतर के पास न तो संचालन की अनुमति है और न ही सुरक्षा के इंतमाम किए गए हैं। पीजी में रहने वाली अधिकतर छात्राएं दूसरे राज्यों से हैं। पीजी संचालन से मालिकों की कमाई तो हो रही है, परंतु नियमों की अनदेखी पर भी इन पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। आग से सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी होने के बावजूद इनका संचालन क्यों और कैसे हो रहा है? यह अहम सवाल है। स्थानीय लेागों का आरोप है कि पुलिस और एमसीडी कर्मियों की मिलीभगत से पीजी और कोचिंग संस्थान चलाए जा रहे हैं। पूर्वी निगम के एक अधिकारी का कहना है कि बिल्डिंगों में आग से बचाव, पार्किंग सहित अन्य मानकों की जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है।
रिहायशी भवनों में चल रही हैं वाणिज्यिक गतिविधियां
दिल्ली के करोल बाग के होटल अर्पित में लगी आग में हुई मौत के बावजूद वाणिज्यिक गतिविधियों का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है। फोटो स्टेट, मोबाइल, रेस्तरां, डेकोरेशन सहित तमाम गतिविधियां चल रही हैं। निगम अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से इस पर पाबंदी नहीं लगाए जाने का स्थानीय लोग भी परेशान हैं।
कमाई के चक्कर में सुरक्षा मानकों की जारी है अनदेखी
अधिकतर कोचिंग संस्थान किराये पर संचालित हो रहे हैं। भवन मालिकों से किराये पर जगह लेने के वक्त न तो सुरक्षा से संबंधित पहलुओं का ध्यान दिया जाता है और न ही इसके लिए कोई फिक्रमंद है। संचालकों की कोशिश रहती है कि कम से कम खर्च में अधिक से अधिक कमाई कैसे की जाए। इस चक्कर में अपना भविष्य संवारने के लिए संस्थानों पर पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं पर लगातार हादसों का खतरा बना हुआ है।
डॉ. बृजेश सिंह, एडीसी, पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने बताया कि, सूरत की घटना के बाद ऐसे संस्थानों और प्रतिष्ठानों को नोटिस भेजकर मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही उन पर कार्रवाई की जाएगी। अभी भी ऐसे संस्थानों और प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों सहित अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।