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श्रीराम के वनगमन से शोकाकुल हुई अयोध्या नगरी

Wed, 05 Oct 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Wed, 05 Oct 2016 01:23 AM IST
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Sri Ram's Ayodhya town was heartbreaking
रामलीला मंचन - फोटो : अमर उजाला

श्रीराम और सीता के विवाह के बाद अयोध्या में सब कुछ अच्छा चल रहा था। महल में हंसी-खुशी व चहल-पहल का वातावरण था कि तभी मंथरा की कुटिल बातों के वशीभूत महारानी कैकेई कोप भवन में चली जाती हैं। 

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अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट को उनके इस रुख से काफी आश्चर्य होता है। वह कैकेई से नाराज होने का कारण पूछते हैं। काफी मनुहार के बाद वह कहती हैं कि देवासुर संग्राम के समय आपने मुझे दो वर देने को कहा था।
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इस पर राजा दशरथ कहते हैं कि दो क्या एक हजार वर मांग लो। कैकेई ने कहा कि नहीं मुझे दो ही वर चाहिए। रानी फिर कहती हैं कि अपने वचन से मुकरोगे तो नहीं।
इस पर राजा कहते हैं कि ‘रधुकुल रीति सदा चलि आई प्राण जाए पर वचन न जाई’। इसके बाद कैकेई भरत को राज और राम को 14 वर्ष के वनवास का वचन मांगती हैं।
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यह दृश्य सोमवार रात श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा द्वारा प्रस्तुत रामलीला का है। कैकेई की बातें सुनकर दशरथ के समक्ष ब्रह्मांड घूमने लगा, मगर वह अपने वचन से बुरी तरह बंध चुके थे। 

जैसे ही कैकेई के दो वचनों के बारे में महल में लोगों को पता चला, तो हर ओर कोहराम मच गया। दशरथ दु:खी हो अपना सुधबुध खो बैठते हैं। राम उनके पास आते हैं और परेशान होने का कारण पूछते हैं। 

जब राम को यह पता चलता है कि वह उन्हें वन जाने का वचन दे चुके हैं। इस पर श्रीराम कहते हैं कि यह परेशान होने वाली बात नहीं है। राम वन जाते के लिए अपनी तैयारी करने लगते हैं।

राम वन जाने के लिए अपनी माता से आज्ञा मांगते हैं। इस दौरान गीत ‘माता तेरे जिगर का ये लाल जा रहा है’ बजने से दर्शकों की आंखों से आंसू निकल आते हैं।


इस मार्मिक दृश्य के बाद सीता का आगमन होता है। वह भी श्रीराम से वन जाने की जिद करती हैं। उन्हें सभी भांति-भांति से समझाते हैं कि वन में काफी दु:ख है। इस पर सीता कहती हैं ‘पृरिय वियोग सम दुख जग नाहीं’। अंत में उन्हें वन जाने की आज्ञा मिल जाती है, तभी मंच पर श्रीराम के छोटे भाई व उनके भक्त लक्ष्मण का आगमन होता है। वह भी श्री राम के साथ वन जाने को कहते हैं। 

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