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Scoliosis: बच्चे की टेढ़ी रीढ़ होगी सीधी, लकवे की आशंका भी कम; एम्स के विशेषज्ञों ने तैयार की तकनीक

Thu, 20 Feb 2025 08:21 PM IST
श्याम जी. राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Thu, 20 Feb 2025 08:21 PM IST
सार

एक हजार में एक बच्चे में जन्मजात स्कोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी से जुड़ा रोग) होने की आशंका रहती है। इसमें जन्म से बच्चे की रीढ़ धनुष के आकार में मुड़ने लगती है। आगे चलकर समस्या गंभीर हो जाती है। 
 

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Spine experts develop new technique to treat congenital scoliosis
एम्स के आर्थोपेडिक विभाग में स्पाइन सर्जन डॉ. भावुक गर्ग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जन्म से टेढ़ी बच्चे की रीढ़ अब आसानी से सीधी हो सकेगी, ऐसे रोग के इलाज के लिए स्पाइन के विशेषज्ञों ने नई तकनीक विकसित की है। नई तकनीक की सर्जरी से अंग में लकवा होने की आशंका भी खत्म हो जाएगी। इसका खुलासा एम्स के एक शोध में हुआ है।

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एम्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, एक हजार में एक बच्चे में जन्मजात स्कोलियोसिस (रीढ़ की हड्डी से जुड़ा रोग) होने की आशंका रहती है। इसमें जन्म से बच्चे की रीढ़ धनुष के आकार में मुड़ने लगती है। आगे चलकर समस्या गंभीर हो जाती है। इस समस्या के इलाज के लिए स्पाइन की सर्जरी करनी पड़ती है। पहले इस सर्जरी में पूरे स्पाइन को काटना पड़ता था, जो काफी जोखिम भरी सर्जरी होती थी। ऐसी सर्जरी में 40 फीसदी मामलों में प्रभावित क्षेत्र में लकवा होने की आशंका रहती थी। इसी समस्या को देखते हुए डॉक्टरों ने हाई-पीओएडी (हाई-डेंसिटी पेडिकल स्क्रू, पोंटे ऑस्टियोटॉमी, एसिमेट्रिक रॉड कॉन्टूरिंग और डायरेक्ट वर्टिब्रल रोटेशन) तकनीक विकसित की।
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एम्स के आर्थोपेडिक विभाग में स्पाइन सर्जन डॉ. भावुक गर्ग ने बताया कि पुरानी तकनीक काफी जोखिम भरी थी। सर्जरी के दौरान बच्चे को लकवा होने की आशंका रहती थी। नई तकनीक से सर्जरी में जोखिम घटा है। बच्चे पहले के मुकाबले जल्द रिकवर हो रहे हैं। नई तकनीक में स्क्रू के नंबर बढ़ा दिए गए। स्पाइन में बड़े कट की जगह छोटे-छोटे कट लगाए गए। इंप्लांट लगाने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इससे सर्जरी में जोखिम घटकर एक फीसदी से भी कम हो गया जो पहले 40 फीसदी तक था। परिणाम भी काफी बेहतर आ रहे हैं।
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आईसीयू की जरूरत नहीं
नई तकनीक से सर्जरी करने के दौरान रक्त का रिसाव काफी कम होता है। मरीज को आईसीयू में जाने की जरूरत नहीं होती। कुछ मामलों में एक दिन के लिए मॉनिटरिंग के लिए रखना पड़ सकता है। मरीज भी तीन से पांच दिन में घर चला जाता है, जबकि पुरानी तकनीक में 14 दिन तक मरीज को अस्पताल में रहना पड़ सकता है। आईसीयू की भी जरूरत पड़ सकती है।


एक हजार में एक में होने की आशंका
जन्मजात स्कोलियोसिस रीढ़ की हड्डी से जुड़ा रोग है। एक हजार में से एक बच्चे में यह रोग होने की आशंका रहती है। ऐसे रोग से पीड़ित बच्चों में कभी-कभी दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी होती है। इसमें किडनी या मूत्राशय से जुड़ी दिक्कत शामिल है।

रीढ़ 50 डिग्री तक हो सकती है सीधी
शोध के दौरान 38 रोगियों की पूर्वव्यापी समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि जन्मजात स्कोलियोसिस से पीड़ित रोगी की रीढ़ को 50 डिग्री तक सही किया जा सका।

इन पर शोध
कुल मरीज
- 38
पुरुष - 13
महिला - 25

फॉलोअप - दो से आठ साल

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