राजधानी की छतें कर सकती हैं बिजली की जरूरत पूरी
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सिर्फ छतों पर सोलर पैनल लगाकर राजधानी को रोशन किया जा सकेगा। इसका खुलासा द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) की एक रिपोर्ट से हुआ है।
शोध में दिल्ली के क्षेत्रफल के 10 फीसदी हिस्से को शामिल किया गया है। रिपोर्ट छत से सौर ऊर्जा पैदा करने का पूरा खाका पेश करती है।
सिर्फ रूफटॉप से पैदा होगी 2200 मेगावाट बिजली
टेरी के रिसर्च एसोसिएट अलेखा दत्त बताते हैं कि दिल्ली में सिर्फ रूफटॉप प्लांट से न्यूनतम 2200 मेगावाट बिजली पैदा हो सकती है।
रिपोर्ट में ड्रेन आदि दूसरे विकल्पों पर विचार नहीं किया गया है। हालांकि दत्ता की नसीहत है कि पहले फेज में एक हजार मेगावाट बिजली को सीधा ग्रिड में डाला जा सकता है।
जबकि दूसरे फेज में 1200 मेगावाट बिजली के स्टोरेज का इंतजाम होना चाहिए। इससे ग्रिड सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। टेरी ने अपनी रिपोर्ट दिल्ली सरकार को सौंप दी है।
डीईआरसी ने बनाए हैं दिशा-निर्देश
डीईआरसी ने डिस्कॉम्स को निर्देश जारी किया है कि वह रूफ टॉप सोलर प्लांट को सीधे ग्रिड से जोड़ने का इंतजाम करें। इसके लिए उपभोक्ताओं को अपने मौजूदा मीटर की जगह बाइडायरेक्शनल मीटर लगाना जरूरी होगा।
इससे मीटर में ऑटोमैटिकली छत से पैदा होने वाली सौर ऊर्जा रिकॉर्ड होती रहेगी। डिस्कॉम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभी छह उपभोक्ताओं को ग्रिड से जोड़ा गया है। इससे करीब दो मेगावाट की बिजली पैदा हो रही है। हालांकि अभी तक सौर ऊर्जा की कीमत तय नहीं हुई है।
उम्मीद कल की
-पिछले एक दशक में राजधानी में बिजली की मांग करीब दो गुना बढ़ी है। 2003 के 3,097 मेगावाट की तुलना में 2015 की पीक डिमांड 6600 पहुंचने का अनुमान।
-डिस्कॉम्स के ग्रिड सिस्टम में पहुंच रही करीब दो मेगावाट सौर ऊर्जा।
-उम्मीद इसलिए है कि दिल्ली साल में करीब 350 दिन पर्याप्त मात्रा में सूर्य की रोशनी में नहाई रहती है।
-अनुमानत: 10 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में हर घंटे एक केवी बिजली पैदा हो सकती है।
कीमत
- फिलहाल बैकअप के साथ एक केवी के प्लांट पर 1.20-1.30 लाख के बीच निवेश करना पड़ता है। जबकि सीधा ग्रिड से जोड़ने पर सिर्फ 80,000 का खर्चा आएगा। ग्रिड में जुड़ने से रखरखाव पर खर्च नहीं।
- दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में सौर ऊर्जा की प्रति यूनिट लागत 6.22 रुपये होगी, फिलहाल यह 8.34 रुपये है। वहीं, पारंपरिक स्रोतों से पैदा हुई बिजली 4.20 से 5.79 रुपये होगी। अगले 10 वर्षों में यह फर्क भी खत्म हो जाएगा।
- एक अनुमान के मुताबिक सन 2020 तक सौर ऊर्जा के उपयोग से दुनिया भर में 15.40 करोड़ लाख टन कार्बन डाई आक्साइड को वायुमंडल में जाने से रोका जा सकेगा।
कुछ दूसरे तथ्य
-सूर्य की किरणें धरती पर 500 सेकेंड में पहुंचती हैं।
-वायुमंडल में शोषित होकर धरती पर करीब 0.95 मेगावाट ऊर्जा तुरंत आ जाती है।
-सूर्य की ऊपरी सतह का ताप 6000 डिग्री सेंटीग्रेड है।
-धरती के वायुमंडल की ऊपरी सतह पर मिलने वाली सौर ऊर्जा 1.353 किलोवाट प्रति वर्ग मीटर होती है।