3700 करोड़ की महाठगी : समर्थन जुटाने को अनुभव मित्तल के पक्ष में सोशल मीडिया पर चल रही ऑनलाइन वोटिंग
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वेब पोर्टल सोशल ट्रेड डॉट बिज के जरिये ठगी करने वाले अनुभव मित्तल के पक्ष में समर्थकों ने निवेशकों के बीच ऑनलाइन वोटिंग शुरू कर दी है। ऑनलाइन वोटिंग अभियान में निवेशकों से पूछा जा रहा है कि वो क्या मानते हैं अभिनव मित्तल सही हैं या गलत। लोगों को वोट करने के लिए केवल हां या न के बटन को क्लिक करना है।
इसे व्हाट्स एप, फेसबुक, यू-ट्यूब और ट्विटर के जरिये निवेशकों के बीच प्रसारित किया जा रहा है। शनिवार सुबह समर्थकों ने ऑनलाइन वोटिंग शुरू की, शाम पांच बजे तक इस पर लगभग 57000 लोग प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
जिनके पैसे फंसे हैं, वही कर रहे वोटिंग
वोटिंग करने के साथ ही इस लिंक पर कुल वोटों की स्थिति भी प्रदर्शित की जा रही है। इसके अनुसार 97 फीसदी लोगों ने अनुभव के पक्ष में वोटिंग की। हालांकि, कुछ ऐसे भी निवेशक हैं जिनका कहना है कि वह इसलिए पक्ष में वोटिंग कर रहे हैं क्योंकि उनके पैसे फंसे हुए हैं।
अगर विपक्ष में वोटिंग की तो हो सकता है आगे चलकर कंपनी उनके पैसे वापस करने में आनाकानी करे। वहीं, कुछ निवेशकों का कहना है कि उनके परिचित ने जबरन पक्ष में वोटिंग करा दी। वहीं, तीन फीसदी लोगों ने अनुभव को गलत भी ठहराया है।
शनिवार रात तक फेसबुक पर अनुभव के समर्थन में तीन पेज थे, रविवार को इनकी संख्या 28 हो गई। इन पर लोगों से अपील की जा रही है कि वह एसटीएफ या पुलिस से शिकायत न करें। अगर शिकायत की तो अनुभव का ऑनलाइन पोर्टल सोशल ट्रेड डॉट बिज और एबलेज कंपनी हमेशा के लिए बंद हो जाएगी।
कुछ पोस्ट में निवेशकों को धमकी भरे लहजे में कहा गया है कि अगर उन्होंने पुलिस से शिकायत की तो उनका पैसा कभी नहीं मिल सकेगा।
यू-ट्यूब पर समर्थकों पर चुटकी
समर्थकों की भी जांच में जुटी एसटीएफ
एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि निवेशकों को भ्रमित करने वाले 100-150 लोगों का एक समूह है, जिन्हें कंपनी से मोटी कमाई हो रही थी। ये निवेशकों और कर्मचारियों का एक कोर ग्रुप भी हो सकता है।
ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। एसटीएफ सोशल ट्रेड से शुरुआत में जुड़े उन लोगों की भी जांच कर रही है जिन्होंने मोटा मुनाफा कमाया है। ऐसे लोगों के बैंक खाते भी जल्द खंगाले जाएंगे।
आशंका है कि कंपनी ने कोर ग्रुप के सदस्यों को अन्य सदस्यों से ज्यादा मुनाफा दिया। ये भी आशंका है कि अनुभव और कंपनी प्रबंधन के लोगों ने अपनी भी काफी संख्या में फर्जी आईडी बनाकर सोशल ट्रेड में लगाई हो। इन आईडी पर ज्यादा भुगतान किया जा रहा हो।