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स्मार्ट सिटी में बनाने के लिए स्लम को शिफ्ट करना बड़ी चुनौती

Wed, 10 Feb 2016 06:24 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 10 Feb 2016 06:24 PM IST
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Smart City to create a big challenge to shift slum.

नगर निगम की नाकामी के हालात यह हैं कि जिस स्लम को कम करना था। वो लगातार बढ़ता गया। कुछ समय पहले जहां शहर में स्लम की संख्या करीब 62 थी वहीं अब बढ़कर 67 से अधिक हो गई है।

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इसे रोकने के लिए न तो निगम के अधिकारियों ने कोई योजना तैयार की और न  ही कोई कार्रवाई की।  अगर शहर को स्मार्ट सिटी  की दौड़ में लाना है तो निगम निगम को अपनी पुरानी गलतियों से सीखने की काफी जरूरत है।
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निगम के सामने शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कई चुनौतिया हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती शहर में स्लम को शिफ्ट करने की है। मुंबई के बाद फरीदाबाद देश का दूसरा ऐसा शहर है जहां सबसे ज्यादा स्लम है।
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यहीं स्लम शहर को स्मार्ट बनने से रोकता है। निगम ने कई बार  स्लम को शिफ्ट करने के प्रयास भी किए हैं लेकिन हर बार नाकामयाब रहा है। स्लम क्षेत्र में बसे लोग अपने स्थान को छोड़कर कहीं अन्य स्थान पर जाने के लिए राजी नहीं हैं।

जहां सरकारी जमीन दिखी वहीं बस गए
स्लम बस्तियों को आगे बढ़ाने में जहां सरकारी तंत्र बिलकुल फेल नजर आ रहा है। वहीं इसे आगे बढ़ाने में राजनैतिक संरक्षण लगातार हावी रहा है।

शहर के नेताओं ने अपने वोट और फायदे के लिए लोगों को सरकारी जमीन पर बसा दिया। शहर में जब इंडस्ट्री बसना शुरू हुई थी। सरकार की ओर से इन इंडस्ट्री में काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों के रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की।

ऐसे में इन मजदूरों को इंडस्ट्री के पास जहां भी सरकारी जमीन खाली दिखी वहीं इन लोगों नें झुग्गी बना ली और परिवार के साथ रहने लग गए।

डबुआ कॉलोनी और बापू नगर योजना हुई फेल साबित
नगर निगम ने स्लम क्षेत्र में बसे लोगों को घर प्रदान करने के लिए बल्लभगढ़ में बापू नगर योजना और डबुआ कॉलोनी में इन लोगों को आवासीय परिसर बनाकर  दिए थे।


बल्लभगढ़  बापू नगर योजना में इन लोगों के लिए करीब 1300 फ्लैट बनाए, लेकिन  सिर्फ 150-200 फ्लैट्स ही आवंटित हो पाए हैं। इसी प्रकार फरीदाबाद में डबुआ कॉलोनी में स्लम क्षेत्र मे बसे लोगों के लिए करीब 2200 फ्लैट्स बनकर तैयार पड़े हैं। लेकिन यहां भी करीब 2 हजार फ्लैट खाली पड़े हैं। ऐसे में निगम के लिए लोगों को यहां बसाना बड़ी चुनौती है।

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