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किसान आंदोलनः फिर नहीं निकल पाया कोई समाधान, अब 9 दिसंबर को होगी छठे दौर की वार्ता

Sat, 05 Dec 2020 07:10 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 05 Dec 2020 07:10 PM IST
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sixth round of talks will be held on 9 December between the farmer leaders and the central government
किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच खत्म हुई पांचवें दौर की वार्ता - फोटो : एएनआई

नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज (शनिवार) 10वां दिन है। इन कानूनों पर बीच का रास्ता निकालने के लिए किसान नेताओं और सरकार के बीच दिल्ली के विज्ञान भवन में पांचवें दौर की बैठक हुई। हालांकि यह बैठक भी पहले के चार बैठकों की तरह ही बेनतीजा रही और कोई समाधान नहीं निकल सका। अब 9 दिसंबर को किसानों और केंद्र सरकार के बीच छठे दौर की बाचतीच होगी। 

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केंद्र के साथ पांचवें दौर की बातचीत खत्म होने के बाद किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने कहा है कि वे 9 दिसंबर को हमें एक प्रस्ताव भेजेगी। किसान संगठनों में इस पर चर्चा होगी। इसके बाद उसी दिन केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच छठे दौर की बातचीत होगी।
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बैठक खत्म होने के बाद विज्ञान भवन से बाहर आकर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने बताया कि सरकार एक मसौदा तैयार करेगी और हमें देगी। केंद्र ने कहा है कि वे इस पर राज्यों से भी सलाह लेंगे। उन्होंने बताया कि आज की बैठक में न्यूनत समर्थन मूल्य पर भी चर्चा हुई है लेकिन हमने कहा कि कानूनों पर भी बातचीत हो और इसे वापस लिया जाए। वहीं प्रस्तावित भारत बंद के बारे में उन्होंने कहा कि 8 दिसंबर को भारत बंद किया जाएगा।
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इस बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान नेताओं से अपील की कि वो इस आंदोलन से बुजुर्गों और बच्चों को घर भेज दें। उनकी इस अपील पर किसान नेताओं ने ठुकरा दिया, उन्होंने कहा कि हमारे पास एक साल की सामग्री है। सरकार को तय करना है वो क्या चाहती है। किसान नेताओं ने सरकार से कहा कि आप बता दीजिए कि आप हमारी मांग पूरी करेंगे या नहीं। 

बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि हम सरकार से चर्चा नहीं, ठोस जवाब चाहते हैं वो भी लिखित में। अब तक बहुत चर्चा हो चुकी है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार सितंबर में लागू तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के बारे में नहीं सोच रही तो वे बैठक छोड़कर चले जाएंगे। ब्रेक में किसान नेताओं ने अपने साथ लाया भोजन और जलपान किया।

केंद्र की ओर से वार्ता की अगुवाई कर रहे तोमर ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि सरकार किसान नेताओं के साथ ‘शांतिपूर्ण वार्ता’ के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती।

सूत्रों ने बताया कि कृषि मंत्री ने तीनों कृषि कानूनों पर प्रतिक्रियाओं और सुझावों का स्वागत किया, वहीं कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने किसान नेताओं के साथ पिछले चार दौर की बातचीत की संक्षिप्त जानकारी दी।

इससे पहले किसान आंदोलन को लेकर चर्चा के लिए आज सुबह पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी के घर पर बैठक हुई जो करीब दो घंटे तक चली। इसमें गृहमंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद थे।


वहीं भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) नेता एचएस लखोवाल ने कहा कि सरकार के सामने किसान संगठनों के 40 नेताओं ने बैठक के दौरान तीनों कृषि कानून की खामियों पर बिंदुवार अपनी बात रखी है। केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्र सरकार ने भी माना है कि किसानों की कई मांगों पर विचार किया जाएगा। हमनें सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है। किसान संगठन राजेवाल गुट के नेता का कहना है कि सरकार का संशोधन का प्रस्ताव मंजूर नहीं होगा। केंद्र सरकार को तीनों कानूनों को वापस लेना पड़ेगा।

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