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Delhi NCR News: डीयू के कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा भारतीय इतिहास में सिख शहादत
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- इस कोर्स को सामान्य वैकल्पिक पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाएगा
-अकादमिक काउंसिल ने इस कोर्स को दी स्वीकृति
- अब डीयू में छात्र बन सकेंगे रेडियो जॉकी, स्किल एन्हेंसमेंट कोर्सेज को रेडियो जॉकिंग के गुर सिखाए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र अब भारतीय इतिहास में सिख शहादत को पढ़ेंगे। इस कोर्स को सामान्य वैकल्पिक पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसे डीयू के स्वतंत्रता एवं विभाजन केंद्र की ओर से प्रस्तुत किया गया है। सभी कॉलेजों के लिए प्रस्तुत यह स्नातक कोर्स चार क्रेडिट का है। शनिवार को डीयू की अकादमिक काउंसिल ने इस पाठ्यक्रम को स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके अलावा स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज की सूची में कुछ नए कोर्सेज जोड़ने को भी काउंसिल ने मंजूरी दी है। इसमें से एक कोर्स रेडियो जॉकिंग का होगा, जिसमें छात्रों को रेडियो जॉकिंग के गुर सिखाए जाएंगे।
डीयू की शनिवार सुबह शुरू हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक देर शाम समाप्त हो गई। इसमें भारतीय इतिहास में सिख शहादत नाम से एक कोर्स प्रस्तुत किया गया जिसे मंजूरी दे दी गई। इसमें दाखिले के लिए किसी भी स्ट्रीम में कक्षा 12वीं पास होना आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य सिख समुदाय के साथ जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ एवं सिख शहादत के प्रमुख ऐतिहासिक उदाहरणों, धार्मिक उत्पीडऩ और आधिपत्य पूर्ण राज्य उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध को समझना है।
इसके माध्यम से छात्र मुगल राज्य और समाज पर विशेष रूप से तथा सामान्य रूप से भारतीय इतिहास पर उभरते इतिहास लेखन में विद्यमान अंतराल को समझ सकेंगे। कोर्स में यूनिट एक के तहत विद्यार्थियों को सिख धर्म का विकास, मुगल राज्य और समाज, पंजाब सिख धर्म में शहादत और शहादत की अवधारणा, सिख गुरुओं के अधीन सिख, गुरु नानक देव से गुरु रामदास तक सिख धर्म का ऐतिहासिक संदर्भ पढ़ाया जाएगा। यूनिट दो में शहादत की गाथा के तहत आधिपत्य मुगल राज्य और दमन, गुरु अर्जन देव, जीवन और शहादत, राज्य की नीतियों पर प्रतिक्रियाएं, गुरु हरगोबिंद से गुरु हरकृष्ण तक, गुरु तेग बहादुर के जीवन और शहादत, भाई मति दास, भाई सती दास, भाई दयाला के संदर्भ पढ़ाए जाएंगे।
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बैठक की शुरूआत में डीयू के पूर्व कार्यवाहक कुलपति स्व. प्रो. पीसी जोशी को श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में शून्य काल के दौरान एक सदस्य द्वारा पेपर चेकिंग की पेमेंट में देरी का मुद्दा उठाए जाने पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने आदेश दिया कि सभी विभाग लंबित बिलों को जल्दी जमा करें। साथ ही परीक्षा शाखा एवं वित्त विभाग जल्द भुगतान सुनिश्चित करें। कुलपति ने कहा कि शिक्षकों को भुगतान समय पर मिलना चाहिए।
रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता द्वारा एजेंडा प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार शैक्षणिक मामलों पर अकादमिक परिषद की स्थायी समिति की बैठकों में की गई सिफारिशों पर विचार करते हुए स्नातक पाठ्यक्रम रूपरेखा (यूजीसीएफ-2022) के आधार पर विभिन्न संकाय के पाठ्यक्रमों को भी चर्चा के बाद स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम रूपरेखा पीजीसीएफ 2024 के आधार पर विभिन्न संकाय के पाठ्यक्रमों को मामूली संशोधनों के साथ स्वीकृति दी गई।
एसईसी में छात्र सीख सकेंगे रेडियो जॉकिंग के गुर
डीयू के स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज (एसईसी) के तहत अब विद्यार्थी रेडियो जॉकिंग के गुर भी सीखेंगे। इसमें आवाज प्रशिक्षण, उच्चारण, स्टूडियो संचालन और रियल टाइम शो होस्टिंग सहित मॉक स्टूडियो अभ्यास और पेशेवरों के साथ बातचीत जैसे कार्यों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों को दिया जाएगा। आवाज़ का वार्म-अप, सांस पर नियंत्रण, रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसके अलावा एसईसी में कुछ नए कोर्सेज को जोडऩे की मंजूरी भी अकादमिक परिषद ने दी है। इसमें वैक्यूम टेक्नोलॉजी, इको-प्रिंटिंग ऑन टेक्सटाइल, सर्फेस ओर्नामेंटेशन, डिजिटल टूल्स फॉर इंटीरियर डिजाइनिंग, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, मेथड्स इन एपिडेमिओलोजिकल डाटा एनालिसिस और मेथड्स इन एपिडेमिओलोजिकल डाटा कलेक्शन नामक आठ कोर्सेज शामिल हैं।
चौथे वर्ष में शोध प्रबंध के लिए मसौदा पेश
डीयू में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्नातक कार्यक्रमों में चौथे वर्ष को लागू कर रहा है। इसमें यूजी स्तर पर पहली बार छात्रों को तीन ट्रैक प्रदान किए गए हैं, जिनमें शोध प्रबंध, शैक्षणिक परियोजनाएं और उद्यमिता शामिल हैं। इसके लिए एक मसौदा दिशानिर्देश तैयार किया गया है। परिषद की बैठक में इन पर चर्चा के बाद पारित कर दिया गया।
इसके अनुसार संकाय पर्यवेक्षण के लिए सभी संकाय सदस्य पीएचडी के साथ या उसके बिना, शोध, शोध प्रबंध या उद्यमिता परियोजनाओं को लेने वाले छात्रों के पर्यवेक्षण के लिए पात्र होंगे। प्रत्येक छात्र के अनुसंधान के लिए एक सलाहकार समिति गठित की जाएगी। एक संकाय सदस्य अधिकतम 10 छात्रों का पर्यवेक्षण कर सकता है। शोध प्रबंध लेखन एक छात्र द्वारा व्यक्तिगत रूप से किया जाएगा। छात्र को हर महीने एक बार शोध सलाहकार समिति के समक्ष मूल्यांकन तथा आगे के मार्गदर्शन के लिए अपने काम की प्रगति की प्रस्तुति देनी होगी।
बैकलॉग पूरा करने की मिल सकती है अनुमति
शैक्षणिक सत्र 2016-2017 में डीयू में दाखिला लेने वाले वे सभी छात्र जो किसी कारण से अपने प्रोग्राम के लिए निर्धारित न्यूनतम अवधि की सामान्य अवधि के भीतर पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें डिग्री के लिए योग्य होने पर बैकलॉग को पूरा करने के लिए सामान्य अवधि से दो साल आगे की अनुमति मिल सकती है। सीबीसीएस से यूजीसीएफ में परिवर्तन के कारण पाठ्यक्रम ढांचे में इस तरह के बदलाव से ऐसी स्थिति पैदा हो गई है
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-अकादमिक काउंसिल ने इस कोर्स को दी स्वीकृति
- अब डीयू में छात्र बन सकेंगे रेडियो जॉकी, स्किल एन्हेंसमेंट कोर्सेज को रेडियो जॉकिंग के गुर सिखाए जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र अब भारतीय इतिहास में सिख शहादत को पढ़ेंगे। इस कोर्स को सामान्य वैकल्पिक पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसे डीयू के स्वतंत्रता एवं विभाजन केंद्र की ओर से प्रस्तुत किया गया है। सभी कॉलेजों के लिए प्रस्तुत यह स्नातक कोर्स चार क्रेडिट का है। शनिवार को डीयू की अकादमिक काउंसिल ने इस पाठ्यक्रम को स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके अलावा स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज की सूची में कुछ नए कोर्सेज जोड़ने को भी काउंसिल ने मंजूरी दी है। इसमें से एक कोर्स रेडियो जॉकिंग का होगा, जिसमें छात्रों को रेडियो जॉकिंग के गुर सिखाए जाएंगे।
डीयू की शनिवार सुबह शुरू हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक देर शाम समाप्त हो गई। इसमें भारतीय इतिहास में सिख शहादत नाम से एक कोर्स प्रस्तुत किया गया जिसे मंजूरी दे दी गई। इसमें दाखिले के लिए किसी भी स्ट्रीम में कक्षा 12वीं पास होना आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य सिख समुदाय के साथ जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ एवं सिख शहादत के प्रमुख ऐतिहासिक उदाहरणों, धार्मिक उत्पीडऩ और आधिपत्य पूर्ण राज्य उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध को समझना है।
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इसके माध्यम से छात्र मुगल राज्य और समाज पर विशेष रूप से तथा सामान्य रूप से भारतीय इतिहास पर उभरते इतिहास लेखन में विद्यमान अंतराल को समझ सकेंगे। कोर्स में यूनिट एक के तहत विद्यार्थियों को सिख धर्म का विकास, मुगल राज्य और समाज, पंजाब सिख धर्म में शहादत और शहादत की अवधारणा, सिख गुरुओं के अधीन सिख, गुरु नानक देव से गुरु रामदास तक सिख धर्म का ऐतिहासिक संदर्भ पढ़ाया जाएगा। यूनिट दो में शहादत की गाथा के तहत आधिपत्य मुगल राज्य और दमन, गुरु अर्जन देव, जीवन और शहादत, राज्य की नीतियों पर प्रतिक्रियाएं, गुरु हरगोबिंद से गुरु हरकृष्ण तक, गुरु तेग बहादुर के जीवन और शहादत, भाई मति दास, भाई सती दास, भाई दयाला के संदर्भ पढ़ाए जाएंगे।
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बैठक की शुरूआत में डीयू के पूर्व कार्यवाहक कुलपति स्व. प्रो. पीसी जोशी को श्रद्धांजलि दी गई। बैठक में शून्य काल के दौरान एक सदस्य द्वारा पेपर चेकिंग की पेमेंट में देरी का मुद्दा उठाए जाने पर कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने आदेश दिया कि सभी विभाग लंबित बिलों को जल्दी जमा करें। साथ ही परीक्षा शाखा एवं वित्त विभाग जल्द भुगतान सुनिश्चित करें। कुलपति ने कहा कि शिक्षकों को भुगतान समय पर मिलना चाहिए।
रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता द्वारा एजेंडा प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार शैक्षणिक मामलों पर अकादमिक परिषद की स्थायी समिति की बैठकों में की गई सिफारिशों पर विचार करते हुए स्नातक पाठ्यक्रम रूपरेखा (यूजीसीएफ-2022) के आधार पर विभिन्न संकाय के पाठ्यक्रमों को भी चर्चा के बाद स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम रूपरेखा पीजीसीएफ 2024 के आधार पर विभिन्न संकाय के पाठ्यक्रमों को मामूली संशोधनों के साथ स्वीकृति दी गई।
एसईसी में छात्र सीख सकेंगे रेडियो जॉकिंग के गुर
डीयू के स्किल एन्हांसमेंट कोर्सेज (एसईसी) के तहत अब विद्यार्थी रेडियो जॉकिंग के गुर भी सीखेंगे। इसमें आवाज प्रशिक्षण, उच्चारण, स्टूडियो संचालन और रियल टाइम शो होस्टिंग सहित मॉक स्टूडियो अभ्यास और पेशेवरों के साथ बातचीत जैसे कार्यों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों को दिया जाएगा। आवाज़ का वार्म-अप, सांस पर नियंत्रण, रिकॉर्डिंग सॉफ्टवेयर की बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसके अलावा एसईसी में कुछ नए कोर्सेज को जोडऩे की मंजूरी भी अकादमिक परिषद ने दी है। इसमें वैक्यूम टेक्नोलॉजी, इको-प्रिंटिंग ऑन टेक्सटाइल, सर्फेस ओर्नामेंटेशन, डिजिटल टूल्स फॉर इंटीरियर डिजाइनिंग, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, मेथड्स इन एपिडेमिओलोजिकल डाटा एनालिसिस और मेथड्स इन एपिडेमिओलोजिकल डाटा कलेक्शन नामक आठ कोर्सेज शामिल हैं।
चौथे वर्ष में शोध प्रबंध के लिए मसौदा पेश
डीयू में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से स्नातक कार्यक्रमों में चौथे वर्ष को लागू कर रहा है। इसमें यूजी स्तर पर पहली बार छात्रों को तीन ट्रैक प्रदान किए गए हैं, जिनमें शोध प्रबंध, शैक्षणिक परियोजनाएं और उद्यमिता शामिल हैं। इसके लिए एक मसौदा दिशानिर्देश तैयार किया गया है। परिषद की बैठक में इन पर चर्चा के बाद पारित कर दिया गया।
इसके अनुसार संकाय पर्यवेक्षण के लिए सभी संकाय सदस्य पीएचडी के साथ या उसके बिना, शोध, शोध प्रबंध या उद्यमिता परियोजनाओं को लेने वाले छात्रों के पर्यवेक्षण के लिए पात्र होंगे। प्रत्येक छात्र के अनुसंधान के लिए एक सलाहकार समिति गठित की जाएगी। एक संकाय सदस्य अधिकतम 10 छात्रों का पर्यवेक्षण कर सकता है। शोध प्रबंध लेखन एक छात्र द्वारा व्यक्तिगत रूप से किया जाएगा। छात्र को हर महीने एक बार शोध सलाहकार समिति के समक्ष मूल्यांकन तथा आगे के मार्गदर्शन के लिए अपने काम की प्रगति की प्रस्तुति देनी होगी।
बैकलॉग पूरा करने की मिल सकती है अनुमति
शैक्षणिक सत्र 2016-2017 में डीयू में दाखिला लेने वाले वे सभी छात्र जो किसी कारण से अपने प्रोग्राम के लिए निर्धारित न्यूनतम अवधि की सामान्य अवधि के भीतर पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें डिग्री के लिए योग्य होने पर बैकलॉग को पूरा करने के लिए सामान्य अवधि से दो साल आगे की अनुमति मिल सकती है। सीबीसीएस से यूजीसीएफ में परिवर्तन के कारण पाठ्यक्रम ढांचे में इस तरह के बदलाव से ऐसी स्थिति पैदा हो गई है