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Delhi Hospital Fire: ...तो टाला जा सकता था बेबी केयर सेंटर अग्निकांड, जांच में हुए ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे

Mon, 27 May 2024 09:31 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 27 May 2024 09:31 PM IST
सार

विवेक विहार का बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है। वर्ष 2021 में काम के दबाव में एक नर्स ने नवजात के साथ मारपीट की थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

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Shocking revelation regarding fire in baby care center Vivek Vihar
Fire in Delhi Hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विवेक विहार के बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग लगने के मामले में छानबीन के दौरान बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच के दौरान पुलिस टीम को पता चला है कि पीसीआर कॉल से करीब 34 मिनट पहले अस्पताल में आग लग गई थी। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने आग की सूचना न तो पुलिस को दी और न ही दमकल विभाग को। इसकी जगह स्टाफ खुद ही आग बुझाने का प्रयास करता रहा। इसी बीच शॉर्ट सर्किट से अस्पताल की बत्ती गुल हो गई और अंधेरा छा गया। हालात बेकाबू होने के बाद 11:29 से 11:32 बजे के बीच पांच पीसीआर कॉल्स की गईं।

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जांच में पता चला कि आग सामने की ओर वाले कमरे के पास लगी थी, इसलिए वहां मौजूद सात बच्चे उसकी चपेट में आ गए, जबकि पीछे वाले कमरे में भर्ती पांच बच्चों को स्टाफ ने लोगों, पुलिस व दमकल कर्मियों की मदद से समय रहते निकालकर दूसरे अस्पताल भेज दिया। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर आग लगने की सूचना मिलती तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता। अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है।

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उधर, पुलिस ने सोमवार को अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन कीची और ड्यूटी डॉ. आकाश को कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया। अदालत ने दोनों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि हादसे का पता चलते ही मालिक नवीन कीची जयपुर भाग गया था, लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया।

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वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच के दौरान डीवीआर की पड़ताल करने पर पता चला कि अस्पताल में 10:55 बजे ही शाॅर्ट सर्किट से आग लग गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। करीब 34 मिनट बाद अस्पताल प्रशासन और लोगों ने कॉल कर पुलिस व दमकल को सूचना दी।

आग का कारण जानने के लिए एफएसएल और क्राइम टीम ने सैंपल उठाए
बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल में आग कैसे लगी, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है। पुलिस अस्पताल की पहली मंजिल से आग लगने की बात कर रही है। वहीं छानबीन के दौरान पुलिस को आग लगने की अलग-अलग थ्योरी का पता चला। कुछ लोगों ने दावा किया है कि आग अस्पताल के बाहर बिजली के खंभे में चिंगारी निकलने से लगी। कुछ लोगों का कहना है कि अस्पताल के भूतल पर ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिलिंग का काम होता था। आग वहां से लगी और ऊपर बच्चों के कमरों तक पहुंच गई।

पहली मंजिल पर बनी रसोई से फैली आग?
एक अन्य थ्योरी के अनुसार, आग पहली मंजिल पर बनी रसोई से लगी। पुलिस आग लगने की वजहों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। क्राइम टीम के अलावा एफएसएल की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने के अलावा वहां की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करवाई है। पुलिस अस्पताल के स्टाफ से भी पूछताछ कर रही है। इस बात का भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि भूतल पर क्या वाकई ऑक्सीजन सिलिंडर रिफिलिंग का काम होता था।

दिल्ली-एनसीआर के अलावा हरियाणा-यूपी के डॉक्टर भेजते थे मरीज
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के अलावा हरियाणा व यूपी के दूरदराज के इलाकों से नवजात बच्चों को नवीन कीची के अस्पताल में रेफर किया जाता था। सूत्रों का कहना है कि इसके बदले अस्पताल की ओर से रेफर करने वाले डॉक्टरों को मोटा कमिशन भेजा जाता था। अस्पताल में हर दिन के लिए मरीज के परिजनों से मोटी रकम वसूल की जाती थी। आरोपी पैसे बचाने के लिए अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए स्टाफ भी ठीक नहीं रखता था। अच्छा डॉक्टर रखने के लिए मोटी रकम देना पड़ती थी। वहीं बीएएमएस डॉक्टर कम पैसों में ही मिल जाते थे। फिलहाल अस्पताल में चार डॉक्टरों के अलावा 20 नर्स थीं। घटना वाले दिन छह नर्स, दो डॉक्टर व एक गार्ड ही मौजूद था।

पहले भी विवादों में रहा है अस्पताल
विवेक विहार का बेबी केयर न्यू बॉर्न अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है। वर्ष 2021 में काम के दबाव में एक नर्स ने नवजात के साथ मारपीट की थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटना के बाद हंगामा भी हुआ था। बच्चे के परिजनों ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज किया था।

दो नवजात के शव पोस्टमार्टम के बाद आज सौंपे गए
हादसे के बाद रविवार को दो नवजात बच्चों का शव नहीं हुआ था। पुलिस ने सोमवार को इन दोनों के शव पोस्टमार्टम के बाद परिवार के हवाले कर दिए। उधर हादसे में बचे पांच मासूमों की हालत स्थिर बताई जा रही है। उनका पास के ही एक अन्य अस्पताल में इलाज जारी है।

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