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Delhi NCR News: पहली पत्नी के भरण-पोषण मामले में दूसरी को प्रतिवादी बनने की जरूरत नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 May 2026 07:22 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट में भरण-पोषण से जुड़ी याचिका की हुई सुनवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पहली पत्नी की ओर से दायर भरण-पोषण (मेंटेनेंस) के मामले में दूसरी पत्नी को प्रतिवादी के रूप में शामिल करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने दूसरी पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकलपीठ ने कहा कि धारा-125 सीआरपीसी के अंतर्गत भरण-पोषण की कार्यवाही संक्षिप्त और त्वरित होती है। अगर दूसरी पत्नी को शामिल किया गया तो इसकी प्रकृति बदल जाएगी और कार्यवाही अनावश्यक रूप से लंबी हो जाएगी।

दंपती का विवाह 2005 में हुआ था। दोनों ने 2022 में तलाक की याचिका दायर की थी। परिवार अदालत ने जनवरी, 2024 में पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली। जुलाई, 2024 में उसने दूसरी शादी कर ली। इसके बाद पहली पत्नी ने खुद और दो बच्चों के भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर की। परिवार अदालत ने बच्चों के लिए भरण-पोषण की याचिका स्वीकार की, लेकिन पहली पत्नी को भरण-पोषण देने से इन्कार कर दिया। उसने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसी दौरान दूसरी पत्नी ने अर्जी देकर प्रतिवादी बनाने की मांग की।
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