सीलिंग : प्रदर्शन के चलते इतने रुपयों का व्यापार हुआ प्रभावित, सरकार को भी उठाना पड़ा भारी नुकसान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में चल रहे सीलिंग के खिलाफ मंगलवार दिल्ली का व्यापार ठप रहा। खुदरा व थोक व्यापारी दुकानों पर दिनभर ताला लगाए रहे और बाजारों में प्रदर्शन किया। दिल्ली के करीब दो हजार व्यापारिक संगठनों के 7 लाख व्यापारी हड़ताल में शामिल हुए।
कहीं व्यापारियों ने गले में ताले लटका तो कहीं कटोरा लेकर भीख मांग कर विरोध जताया। खास बात यह है कि तीनों पार्टियों के समर्थक व्यापारी सीलिंग के विरोध में दिखे।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन के आह्वान पर केमिस्ट व गली-मोहल्लों के परचून की दुकानों को छोड़कर दिल्ली के थोक व रिटेल बाजार पूरी तौर पर बंद रहे और कारोबार नहीं हुआ।
इस बंद में भाजपा, कांग्रेस और आप ने भी व्यापारियों के व्यापार बंद को अपना समर्थन दिया है। व्यापारियों के एक बड़े वर्ग ने करोल बाग इलाके में जहां कटोरा लेकर प्रदर्शन किया तो वहीं सदर बाजार के व्यापारियों ने गले में ताला लटका कर प्रदर्शन किया।
दिल्ली के कई मार्केट में व्यापारियों ने सीलिंग के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। रोहतास नगर में आप विधायक सरिता सिंह के नेतृत्व में सीलिंग और एफडीआई के विरोध में प्रदर्शन किया।
20 लाख लोगों के कार्य घंटे भी व्यर्थ हुए
व्यापारिक संगठनों के एक अनुमान के अनुसार, एक दिन के व्यापार बंद के दौरान दिल्ली में 1500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। इस वजह से सरकार को लगभग 125 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
20 लाख लोगों के कार्य घंटे भी व्यर्थ हुए। व्यापारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है की दिल्ली को सीलिंग से बचाने के लिए तुरंत एक अध्यादेश लाया जाए।
31 दिसंबर 2017 तक दिल्ली में बिल्डिंग अथवा कमर्शियल यूज जहां है जैसा है के आधार पर एक एमनेस्टी स्कीम व्यापारियों के हक में दे। व्यापारियों के एक बड़े वर्ग ने कहा कि बंद के बाद हम सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार करेंगे।
सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हुई तो दिल्ली के व्यापारी अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए संसद से लेकर सड़क तक लड़ाई जारी रखेंगे ओर एक बड़ा आंदोलन करेंगे। न्यायालय जाने में कोई कोताही नहीं बरतेंगे।
क्या कहते हैं अधिकारी
'केंद्र सरकार सीलिंग के मामले पर तुरंत हस्तक्षेप करे। 351 सड़कों को दिल्ली सरकार तुरंत अधिसूचित करे व अतिरिक्त निर्माण पर फ्लोर एरिया रेश्यो बढ़ाए। दस साल तक कन्वर्जन शुल्क देने वालों से अब यह शुल्क नहीं वसूला जाए। सरकार ने बात नहीं मानी तो संसद से सड़क तक लड़ाई जारी रहेगी।' -प्रवीण खंडेलवाल, राष्ट्रीय महामंत्री, कंफेडरेशन ऑफ ट्रेडर्स एसोसिएशन
'केंद्र व दिल्ली सरकार के कारण दिल्ली के व्यापारियों की दयनीय स्थिति हो गई है। सीलिंग के कारण व्यापारी सड़क पर आ गए हैं। इसके लिए केंद्र के साथ ही दिल्ली सरकार भी जिम्मेवार है।' - अजय अरोड़ा, अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ ट्रेडर्स एसोसिएशन दिल्ली
'सीलिंग के चलते रोजी-रोटी का संकट आ गया है। हम आतंकी नहीं हैं, लेकिन हमारे साथ उससे भी बुरा व्यवहार हो रहा है। पहले नोटबंदी फिर जीएसटी अब सीलिंग लाकर हमारे व्यापार को बर्बाद किया जा रहा है।' -परमजीत सिंह पम्मा, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन
'दिल्ली की जिम्मेवारी ना तो एमसीडी और न दिल्ली सरकार उठाने को तैयार है। आजादी के बाद से आज तक कॅमर्शियल एरिया नहीं विकसित किया गया। वॉल सिटी जहां 62 साल से कॅमर्शियल एक्टिविटी चल रही है वहां भी सीलिंग का कोई मतलब नहीं है। कोई कहता है कि 10 साल कनवर्जन लगेगा तो कोई 19 साल। जनता को पता तो चले कि सीलिंग से बचने का क्या नियम है।' -अरुण सिंहानिया, प्रधान, दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन
'कनवर्जन चार्ज तो वसूले जाते है, लेकिन बाजारों में मूलभूत सुविधा नहीं दी जाती। करोड़ों का कनवर्जन चार्ज देने के बावजूद सीलिंग की मार झेलने को व्यापारी मजबूर हैं। सरकार अपनी जिम्मेवारियों से भाग रही है। अब सीलिंग का स्थायी हल व्यापारियों को चाहिए।' -कंवल कुमार बल्ली, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ होलसेल रेडीमेड गारमेंट्स गांधी नगर अशोक बाजार
बंद रहे मुख्य बाजार