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School Closed in Delhi: प्रदूषण को देखते हुए पांचवीं तक स्कूल बंद, पूरी तरह से ऑनलाइन मोड में चलेंगी कक्षाएं

Mon, 15 Dec 2025 07:46 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 15 Dec 2025 07:46 PM IST
सार

शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि ऑनलाइन कक्षाओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएं और शिक्षकों को भी इसके लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को घर के अंदर ही रखें और बाहर निकलने से बचें।

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Schools up to fifth grade closed in Delhi due to pollution classes to be held online
दिल्ली में पांचवीं तक के स्कूल बंद - फोटो : adobe stock

विस्तार

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दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण हाल बेहाल है। उच्च वायु गुणवत्ता सूचकांक को देखते हुए दिल्ली सरकार ने नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के लिए स्कूल बंद कर दिए हैं। सरकार ने तत्काल प्रभाव से तथा अगले आदेश तक इन कक्षाओं के बच्चों के लिए व्यक्तिगत रूप से कक्षाएं न लगाने का निर्णय लिया है। दसवीं व बारहवीं को छोड़कर बाकी कक्षाएं हाईब्रिड मोड में चलेंगी।

शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार दिल्ली के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त एवं गैर सहायता मान्यता प्राप्त निजी स्कूल नर्सरी से पांचवीं तक की कक्षाएं ऑनलाइन ही संचालित करेंगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों के स्वास्थय की सुरक्षा है। दिल्ली में खतरनाक वायु स्तर को देखते हुए कक्षा पांचवीं तक के बच्चों के लिए कक्षाएं स्थगित कर उन्हें ऑनलाइन मोड में चलाने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और बच्चों के हित में आगे और फैसले किए जाएंगे।

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दिल्ली की वर्तमान वायु गुणवत्ता एक गंभीर चिंता
दिल्ली इस समय वायु प्रदूषण की एक विकट स्थिति से जूझ रही है। विभिन्न कारकों, जिनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और मौसमी परिस्थितियां शामिल हैं, के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। इस प्रदूषित हवा में सांस लेना न केवल बुजुर्गों और बच्चों के लिए, बल्कि स्वस्थ वयस्कों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य पर प्रभाव
प्रदूषित हवा के कारण श्वसन संबंधी बीमारियां, जैसे खांसी, जुकाम, अस्थमा का दौरा पड़ना और फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों की नाजुक श्वसन प्रणाली पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है।
 
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प्रमुख प्रदूषक
पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) हवा में खतरनाक स्तर पर मौजूद हैं, जो फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
 

बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता
बढ़ते प्रदूषण के खतरे को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए उन्हें सीधे तौर पर प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से बचाना अत्यंत आवश्यक है।

ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प 
स्कूलों को बंद करने के साथ ही, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। सभी पांचवीं तक की कक्षाओं को पूरी तरह से ऑनलाइन मोड पर संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
 

पर्यावरण अनुकूल नीतियां
वाहनों के उत्सर्जन को कम करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के कड़े नियम लागू करने और औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने जैसी नीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है।

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