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Delhi: 31 साल से सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम कर रहा सद्भावना कैंप, मुस्लिम लगाते कांवड़ियों के लिए कैंप

Wed, 23 Jul 2025 07:43 AM IST
विजय पुंडीर फिरदौस आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
फिरदौस आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 23 Jul 2025 07:43 AM IST
सार

सीलमपुर विधानसभा में मुस्लिम समुदाय की ओर से कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए यह शिविर 1994 से लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम में आपसी भाई-चारा बनाए रखना और देश की संस्कृति को मजबूत करना है।

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Sadbhavna Camp has been setting an example of communal harmony for 31 years
कांवड़ यात्रा - फोटो : PTI

विस्तार

न मैं हिन्दू था, न मुसलमान था, जब मैं पैदा हुआ, तो सिर्फ इंसान था। इस लाइन को साकार करते हुए 31 साल पहले पूर्वी दिल्ली स्थित सीलमपुर के पूर्व विधायक चौधरी मतीन अहमद ने कांवड़ियों के लिए शिविर लगाना शुरू किया था। उसी परंपरा को कायम रखते हुए उनके पुत्र व सीलमपुर से विधायक चौधरी जुबैर अहमद ने भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कांवड़ियों के लिए अंतिम दिन तक शिविर लगाया। 

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सीलमपुर विधानसभा में मुस्लिम समुदाय की ओर से कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए यह शिविर 1994 से लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम में आपसी भाई-चारा बनाए रखना और देश की संस्कृति को मजबूत करना है। कार्यकर्ता सैय्यद नासिर जावेद, मकसूद जमाल, जमील अहमद, रियाजुद्दीन राजू और हाजी शाहिद ने बताया कि इसके लिए दिल्ली में पांच जगहों पर हर साल शिविर लगाए जाते हैं। 
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यह शिविर शास्त्री पार्क, मौनी बाबा मंदिर, गोकुलपुरी चौक के पास, सीलमपुर तिकोना पार्क और बस अड्डा मेन रोड के पास लगाए जाते हैं। इन शिविरों में भोले के भक्तों के लिए खाना, पानी, कोल्ड्रिंक, फल-फ्रूट और मेडिकल की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। 
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उन्होंने बताया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने की वजह से पहले इन इलाकों से गुजरने वाले कांवड़ियों की संख्या बहुत कम हुआ करती थी लेकिन जब से यहां शिविर लगने शुरू हुए कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगी।

हमारी भारतीय संस्कृति में हिंदू और मुसलमान दोनों मिलकर रहते हैं। यही हमारे देश की पहचान और ताकत है। शिविरों को लगाने का उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारे को बनाए रखना है। -चौधरी जुबैर अहमद, सीलमपुर विधायक


हम सबकी यही कोशिश रहती है कि इस इलाके से गुजरने वाले किसी भी कांवड़िये को परेशानी न हो। इसके लिए हम सब मिलकर हर साल उनके लिए रहने और खाने-पीने का इंतजाम करते हैं। -सैय्यद नासिर जावेद, कार्यकर्ता

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