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नई आबकारी नीति: दिल्ली वालों को शराब पिलाने पर भिड़ीं भाजपा और आम आदमी पार्टी!

Wed, 31 Mar 2021 02:18 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 31 Mar 2021 02:18 PM IST
सार

  • भाजपा का आरोप- शराब माफियाओं को प्रोमोट कर रही है दिल्ली सरकार,
  • आबकारी विभाग से प्राप्त राजस्व को दूसरे राज्यों में चुनावी फंड के रूप में इस्तेमाल करेगी केजरीवाल सरकार: भाजपा  
  • वर्तमान में आबकारी विभाग से लगभग 6000 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व
  • नई आबकारी नीति से 1500-2000 करोड़ रुपये राजस्व वृद्धि की उम्मीद

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Row over Delhi Government New Liquor Policy 2021 between aam aadmi party and BJP
नई आबकारी नीति - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

दिल्ली सरकार द्वारा नई आबकारी नीति को मंजूरी दिए जाने के बाद आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच एक और नया मोर्चा खुल गया है। सरकार ने नई आबकारी नीति को राजधानी में अवैध शराब की बिक्री रोकने, उच्च गुणवत्ता की शराब उपलब्ध कराने और अतिरिक्त राजस्व प्राप्ति करने में सहायक बताया है। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली को नशे की भट्ठी में झोंकना चाहती है। वह दिल्ली में शराब से पैसा कमाकर उसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और गोवा में चुनावी फंड के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।

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भाजपा ने आरोप लगाया है, अरविंद केजरीवाल अपने आन्दोलन के समय गांधी की प्रतिमा और तिरंगे को लहराकर खुद को देश और समाज का सबसे बड़ा सेवक बताते थे, वे आज अपने लाभ के लिए राजधानी के युवा वर्ग को नशे में झोकने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने कहा है कि वह दिल्ली में एक भी नई शराब की दुकान नहीं खुलने देगी। इसके लिए उपराज्यपाल से अपील कर इस कानून को रोकने की कोशिश की जाएगी। इसके आलावा सरकार के खिलाफ आंदोलन कर इस मुद्दे पर जनता को साथ लेने की कोशिश की जाएगी।

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कितनी दुकानें

दिल्ली में शराब की लगभग 720 दुकानें हैं। आबादी की दृष्टि से यह संख्या अभी भी बेंगलुरु या मुंबई जैसे शहरों से कम है। इनमें लगभग 40 फीसदी प्राइवेट लोगों द्वारा संचालित की जाती हैं। अनुमान है कि इनके अलावा लगभग 2000 दुकानें अवैध रूप से चलाई जा रही हैं। सरकार शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाकर 916 करने की तैयार कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे अवैध दुकानों को रोका जा सकेगा। 

भाजपा का आरोप

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा है कि शिक्षा और स्वास्थ्य को अपनी बड़ी उपलब्धि बताने वाली दिल्ली सरकार शराब की दुकानें बढ़ाकर युवाओं को शराब के नशे में झोंकने का काम कर रही है। इससे राजधानी में महिलाओं से छेड़छाड़ और अपराध बढ़ेगा। सरकार दुकानदारों की कमाई बढ़ाकर अवैध तरीके से उनसे पैसों की वसूली करेगी और इन पैसों का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में अपनी पार्टी के विस्तार के लिए करेगी। गुप्ता ने कहा है कि भाजपा आम आदमी पार्टी को किसी भी कीमत पर एक भी दुकान अतिरिक्त नहीं खोलने देगी। इसके लिए उपराज्यपाल से लेकर सड़क पर संघर्ष करने तक सभी रास्तों को अपनाएगी।

दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति में क्या

वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली सरकार अब कोई शराब की दुकानें नहीं चलाएगी। इसे पूरी तरह प्राइवेट स्केटर को सौंपा जायेगा। दिल्ली में ज्यादा शराब की दुकानें खोली जाएंगी। शराब की गुणवत्ता चेक करने के लिए विशेष लैब की स्थापना की जाएगी। राजधानी में 'ड्राई डे' की संख्या 21 से घटाकर केवल तीन कर दी जाएगी। इसके आलावा शराब पीने की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष की गई है।

नई आबकारी नीति से विभाग से प्राप्त होने वाले राजस्व में 20 फीसदी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे सरकार के पास बिजली, पानी, परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था हो सकेगी।     

ये होंगे लाभ

दिल्ली सरकार ने पिछले दो वर्षों में राजधानी में अवैध शराब की भारी मात्रा बरामद की है। इस दौरान 7.9 लाख अवैध शराब की बोतलें पकड़ी गई हैं। इनमें 1864 मामले में एफआईआर हुई है और 1939 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शराब माफियाओं के 1014 वाहन भी जब्त किये गये हैं। अनुमान है कि दिल्ली में इस समय 2000 शराब की अवैध दुकानें चल रही हैं। सरकार का कहना है कि नई आबकारी नीति से दिल्ली में नकली शराब बिकने को रोका जा सकेगा।

नई नीति में शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब इसके लिए न्यूनतम 500 वर्ग फुट की जगह उपलब्ध होगी। सरकार ध्यान रखेगी कि सार्वजनकि जगहों पर शराब न पी जा सके। इसके लिए नियम सख्त किये जायेंगे।

राजधानी में ज्यादा ड्राई डे होने से दिल्ली के लोग इन दिनों में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पास के इलाकों से शराब प्राप्त कर लेते हैं, जहां राजधानी की अपेक्षा काफी कम दिनों में ही ड्राई डे होता है। इससे ड्राई डे का उद्देश्य ख़त्म हो जाता है, तो राजधानी सरकार को भी राजस्व में नुकसान होता है। नई आबकारी नीति में इस विसंगति को हटाने की कोशिश की गई है। 

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