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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Rohtak Road slum-like structures illegal, no rehabilitation: DUSIB

रोहतक रोड की झुग्गी-जैसी संरचनाएं अवैध, पुनर्वास नहीं मिलेगा : डूसिब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 09:04 PM IST
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-दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में दाखिल की अपनी स्टेटस रिपोर्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में स्पष्ट दाखिल किया कि रोहतक रोड पर अशोक पार्क मेट्रो स्टेशन के पास बनी झुग्गी-जैसी संरचनाएं अवैध अतिक्रमण हैं और इन्हें किसी भी प्रकार का पुनर्वास लाभ नहीं मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, ये संरचनाएं डूसिब की आधिकारिक 675 झुग्गी बस्तियों (जेजे) की सूची में शामिल नहीं हैं। इस कारण इन पर दिल्ली स्लम व जेजे पुनर्वास एवं पुनर्वास नीति 2015 लागू नहीं होती। बोर्ड ने साफ कहा कि सड़क, फुटपाथ, पार्क या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बने ऐसे अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी संबंधित भूमि मालिक एजेंसी की होगी, न कि डूसिब की।
बिना वैकल्पिक आवास दिए नहीं हटा सकते : डूसिब ने अपने बयान में यह भी बताया कि वह 2010 के कानून के तहत गठित एक वैधानिक संस्था है, जिसे झुग्गी बस्तियों के सुधार और पुनर्वास की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले यह कार्य नगर निगम के स्लम विभाग के पास था। बोर्ड के अनुसार, केवल उन्हीं बस्तियों को पुनर्वास का लाभ दिया जाता है जो उसकी आधिकारिक सूची में दर्ज हैं। नीति के अनुसार, 1 जनवरी 2006 से पहले बनी झुग्गी बस्तियों और 1 जनवरी 2015 से पहले बनी झुग्गियों को बिना वैकल्पिक आवास दिए नहीं हटाया जा सकता। हालांकि, यह नियम उन अतिक्रमणों पर लागू नहीं होता जो सार्वजनिक स्थानों जैसे सड़क या फुटपाथ पर बनाए गए हों।
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बोर्ड ने कहा, कानून के अनुसार ही होगी कार्रवाई : बोर्ड ने यह भी जानकारी दी कि हाई पावर कमेटी के साथ मिलकर सवदा घेवरा क्षेत्र में जेएनएनयूआरएम योजना के तहत बने लगभग 2500 खाली मकानों का उपयोग पुनर्वास के लिए किया जा रहा है। लेकिन रोहतक रोड की ये संरचनाएं इस योजना के दायरे में नहीं आतीं। यह रिपोर्ट एक मामले के तहत ट्रिब्यूनल में पेश की गई है, जिसमें डूसिब ने अपने अधिनियम, 2015 की नीति और अन्य संबंधित दस्तावेज भी जमा किए हैं। बोर्ड ने कहा कि वह अदालत के सभी निर्देशों का पालन करेगा, लेकिन तय नियमों और कानून के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
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