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River Pollution: यमुना को जहरीला बना रहीं जींस की 61 फैक्टरियों पर चला डंडा, बिजली-पानी काटा... जुर्माना

Fri, 10 Oct 2025 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 10 Oct 2025 03:37 AM IST
सार

नरेला, बवाना, मायापुरी और लॉरेंस रोड जैसे औद्योगिक इलाकों में अवैध रूप से चल रहीं जींस की 61 फैक्टरियों पर कार्रवाई की गई है।

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River Pollution: Action taken against 61 jeans factories poisoning Yamuna
यमुना नदी file - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दम तोड़ती यमुना को स्वच्छ करने की दिशा में उम्मीद जगी है। जींस को रंगने व धोने वाली फैक्टरियों से निकलने वाले जहरीले रसायन नदी को काला कर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सख्त आदेश और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की कार्रवाई ने जहरीले प्रवाह पर रोक लगाने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है। 

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डीपीसीसी ने रिपोर्ट में बताया है कि नरेला, बवाना, मायापुरी और लॉरेंस रोड जैसे औद्योगिक इलाकों में अवैध रूप से चल रहीं जींस की 61 फैक्टरियों पर कार्रवाई की गई है।  इनसे निकलने वाला बिना गंदा पानी सीधे यमुना में बहाया जा रहा था जो नदी के प्रदूषण का मुख्य स्रोत बन चुका था।  
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दरअसल, शिकायतकर्ता वरुण गुलाटी ने एनजीटी में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि अवैध फैक्टरियां यमुना को जहरीला बना रही हैं। इनसे निकलने वाला रासायनिक पानी नदी में गिरने से जलीय जीव मर रहे हैं और पानी पीने लायक नहीं बचा है। इसके बाद एनजीटी ने डीपीसीसी को तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। अब डीपीसीसी ने रिपोर्ट में बताया है कि टीमों ने 61 जगहों पर छापे मारकर कई  फैक्ट्रियों पर एक से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया है।
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बिजली-पानी कनेक्शन काटे, कई को बंद किया
डीपीसीसी ने बवाना की एक फैक्टरी पर नौ लाख रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईडीसी) लगाकर बंद कर दिया। मायापुरी में कई फैक्टरियों की बिजली और पानी काटने के आदेश दिए गए। इसके अलावा 28 गैर-अनुपालक फैक्टरियों को जल प्रदूषण रोकथाम कानून की धारा 33(ए) के तहत बंद किया गया। साथ ही, एमसीडी से इन जगहों को सील करने की भी मांग की गई। लॉरेंस रोड में 3, बवाना में 24, नरेला में 12 और मायापुरी में 22 फैक्ट्रियों की जांच हुई।


जींस में इस्तेमाल हो रहे रंग व रसायन खतरनाक
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जींस बनाने में इस्तेमाल होने वाले रंग और रसायन बहुत खतरनाक होते हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी फैक्टरियां यमुना के पानी को इतना गंदा कर देती हैं कि वह खुद साफ होने की क्षमता खो देती है। इससे मछलियां मरती हैं, पानी पीने लायक नहीं रहता और आसपास के लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। डीपीसीसी के पर्यावरण इंजीनियर संदीप कुमार ने अपने हलफनामे में कहा है कि ये इकाइयां बिना अनुमति के चल रही थीं जो कानून का उल्लंघन है। हमने सख्त कदम उठाए ताकि प्रदूषण रुके।

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