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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Responsibility for sewage and wastewater lies with state and local agencies: Environment Ministry

सीवर और गंदे पानी की राज्य व स्थानीय एजेंसियों की जिम्मेदारी : पर्यावरण मंत्रालय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 08:39 PM IST
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- यमुना नदी के प्रदूषण और ओ-जोन की 161 अवैध कॉलोनियों से बिना उपचारित सीवेज नदी में जाने के मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण में अपना जवाब दाखिल किया
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। यमुना नदी के प्रदूषण और ओ-जोन की 161 अवैध कॉलोनियों से बिना उपचारित सीवेज नदी में जाने के मामले में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपना जवाब दाखिल किया है। मंत्रालय ने हलफनामे में कहा कि उसका मुख्य काम पर्यावरण संरक्षण के लिए नीतियां बनाना और प्रदूषण नियंत्रण के मानक तय करना है। इन मानकों का पालन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियों के माध्यम से कराया जाता है।
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मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2014 से गंगा और उसकी सहायक नदियों, जिनमें यमुना भी शामिल है। उनके संरक्षण, विकास और प्रदूषण नियंत्रण का विषय जल शक्ति मंत्रालय को सौंपा जा चुका है। इस काम के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है। हलफनामे के अनुसार, जलापूर्ति, सीवर व्यवस्था और स्वच्छता का काम मुख्य रूप से राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र सरकार का आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय केवल नीतिगत मार्गदर्शन और अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत और अमृत 2.0) जैसी योजनाओं के माध्यम से तकनीकी व वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
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दिल्ली के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि सीवर नेटवर्क, सीवेज संग्रह, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और गंदे पानी के निस्तारण की जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी), दिल्ली सरकार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नगर निगमों और अन्य संबंधित एजेंसियों की है। मंत्रालय ने जवाब में कहा कि यमुना में बिना उपचारित सीवेज छोड़े जाने, ठोस कचरा प्रबंधन और नदी प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई करना संबंधित राज्य सरकार, स्थानीय निकायों और जिम्मेदार एजेंसियों का दायित्व है। इस मामले में उठाए गए अधिकांश मुद्दे उन्हीं विभागों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
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