फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Resident doctors' strike: Medical system totally precarious, an elderly woman's death

रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से चरमराई राजधानी की चिकित्सा व्यवस्था, महिला की मौत

Fri, 27 May 2016 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 May 2016 12:56 PM IST
विज्ञापन
Resident doctors' strike: Medical system totally precarious, an elderly woman's death
हड़ताल से डीडीयू अस्पताल में खाली पड़ी ओपीडी - फोटो : अमर उजाला

सातवें वेतन आयोग की सिफारिश से नाराज दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बृहस्पतिवार को एक दिन के लिए टोकन हड़ताल की। इस वजह से दिल्ली की चिकित्सा-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ओपीडी से लेकर वार्ड में भर्ती मरीजों और आपातकालीन व्यवस्था भी पर असर पड़ा। 

विज्ञापन


दिल्ली सरकार के 38 व केंद्र सरकार के तीन अस्पतालों में हड़ताल का असर रहा, जबकि एम्स में इसका असर नहीं रहा। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोरडा) की ओर से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों ने पूरी तरह चिकित्सा सेवा ठप कर दी।
विज्ञापन



हड़ताल से मह‌िला की मौत

दिल्ली सरकार के अस्पतालों में स्थिति ज्यादा खराब दिखी

Resident doctors' strike: Medical system totally precarious, an elderly woman's death
डीडीयू अस्पताल में खाली पड़ी ओपीडी - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली सरकार के अस्पतालों में स्थिति ज्यादा खराब दिखी, जबकि केंद्र सरकार के अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टर्स के हड़ताल का मिलाजुला असर दिखा। दिल्ली सरकार ने हड़ताल से निपटने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए थे, जबकि केंद्र के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पहले से ही प्रशासन की ओर से वैकल्पिक इंतजाम किए गए थे।

सारे वरिष्ठ चिकित्सकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई थी। सूत्रों की मानें तो सफदरजंग अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर्स दो गुट में बंट गए थे, जिसकी वजह से यहां कुछ रेजिडेंट डॉक्टर्स काम कर रहे थे कुछ ने काम ठप कर रखा था।

लंबी लाइन पर डॉक्टर नदारद

Resident doctors' strike: Medical system totally precarious, an elderly woman's death
छाता लगाकर हड़ताल में शामिल डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेजिडेंट डॉक्टरों ने पहले ही इस हड़ताल में शामिल नहीं होने का फैसला कर लिया था। दोपहर करीब डेढ़ बजे रेजिडेंट डॉक्टर्स लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एकत्र हुए, इसके बाद पोस्टर-बैनर के साथ जंतर-मंतर तक मार्च निकाला। डॉक्टरों ने कहा कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो एक जून से देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं।

लंबी लाइन पर डॉक्टर नदारद
डॉक्टरों की हड़ताल से बृहस्पतिवार को मरीज इलाज के लिए भटकते रहे। रजिस्ट्रेशन के बाद जब मरीज ओपीडी पहुंचे तो वहां चिकित्सक नदारद थे। कुछ विभाग में चिकित्सक थे तो वहां मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। हालांकि पंजीकरण के दौरान ही ज्यादातर मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जा रहा था कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं।

विज्ञापन

हड़ताल के चलते समय से उपचार नहीं मिला

Resident doctors' strike: Medical system totally precarious, an elderly woman's death
जंतर मंतर तक मार्च निकालते रेजिडेंट डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से बृहस्पतिवार को एक मरीज की मौत हो गई। एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती 70 वर्षीय शाबरा बेगम किडनी की बीमारी से पीड़ित थी। परिजनों का आरोप है कि हड़ताल के चलते समय से उपचार नहीं मिला।

बुजुर्ग महिला की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और अस्पताल के सामने जाम लगा दिया। बाद में पुलिस ने लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। महिला के बेटे साबिर ने कहा कि यदि डॉक्टर समय से उसकी मां का इलाज कर देते तो जान बच जाती।

बड़ी मिन्नतें करने के बाद मां को लगाया इंजेक्शन

Resident doctors' strike: Medical system totally precarious, an elderly woman's death
इलाज न मिलने से बुजुर्ग महिला की मौत पर विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला

किडनी की बीमारी से पीड़ित अपनी मां को इलाज के लिए 10.30 बजे लोक नायक अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचा था  लेकिन डॉक्टरों ने उसे देखने में आनाकानी की। एक घंटे के बाद पहली बार उसे  डॉक्टरों ने देखा। साबिर का कहना है कि बड़ी मिन्नत के बाद डॉक्टर ने एक इंजेक्शन लगाया और उसके कुछ देर बाद मुंह से झाग आने लगा और फिर मौत हो गई।

बड़ी मिन्नतें करने के बाद मां को लगाया इंजेक्शन

लोक नायक अस्पताल में 70 वर्षीय सावरा  बेगम की मौत के बाद उनके बेटे साबीर ने कहा कि यदि डॉक्टर समय से मां का  इलाज कर देते तो उनकी जान बच जाती। किडनी की बिमारी से पीड़ित अपनी को इलाज  के लिए साबिर 10.30 बजे लोक नायक अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचा था  लेकिन डॉक्टरों ने उसे देखने में आनकानी की और एक घंटे के बाद पहली बार उसे  डॉक्टरों ने देखा।

साबिर का कहना है कि बड़ी मिन्नत के बाद डॉक्टर ने एक  इंजेक्शन लगाया उसके कुछ देर बाद मुंह से झाग आने लगा और फिर मौत हो गई।  साबिर का आरोप है कि यदि उसकी मां को समय से इलाज मिल जाता और डॉक्टर ने  लापरवाही नहीं की होती तो जान बचाई जा सकती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed