फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Renowned poet manglesh dabral passed away 

मंगलेश डबरालः थक गए थे, घर आना चाहते थे ...मगर

Thu, 10 Dec 2020 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, साहिबाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 10 Dec 2020 02:05 AM IST
सार

  • साहित्यकार मंगलेश को याद कर लोग हुए गमगीन
  • बेटी से कागज पर लिखकर मांगी थी चाय या कॉफी
  • आखिरी बार वीडियो कॉल से हुई थी बात
  • सोसायटी और मिलने-जुलने वालों में छाया मातम 

विज्ञापन
Renowned poet manglesh dabral passed away 
मंगलेश डबराल

विस्तार

वरिष्ठ साहित्यकार मंगलेश डबराल के निधन की खबर से जनसत्ता सोसायटी में शोक की लहर दौड़ गई। साहित्य प्रेमियों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।  चार दिसंबर की रात में उन्हें बेटी व भांजे ने वसुंधरा के अस्पताल से एम्स की आईसीयू में रेफर कराया था। 

विज्ञापन


72 वर्षीय कवि मंगलेश डबराल वसुंधरा की जनसत्ता सोसायटी में पत्नी संयुक्ता डबराल और बेटी अलमा डबराल (30) के साथ रहते थे। वह वर्ष 2012 में गाजियाबाद स्थित वसुंधरा में फ्लैट पर आए थे। बेटा मोहित (36) गुरुग्राम की एक कंपनी में स्क्रिप्ट राइटर हैं। वह पत्नी और बेटी के साथ गुरुग्राम में ही रहते हैं।
विज्ञापन


अलमा ने बताया कि 27 नवंबर को मंगलेश डबराल की तबीयत खराब होने पर उन्हें वसुंधरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। अस्पताल में इलाज से उनकी तबीयत ठीक हो गई थी। लेकिन किडनी में बढ़ते इंफेक्शन से उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें अलमा और भांजे प्रमोद ने चार दिसंबर की रात में एंबुलेंस से दिल्ली के एम्स ले जाकर आईसीयू में भर्ती करा दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉक्टरों ने तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद पांच दिसंबर को मंगलेश को वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया। इस बीच ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। अस्पताल में बुधवार की शाम करीब साढ़े छह बजे उन्हें पहली बार दिल का दौरा पड़ा था आया और 07:10 बजे दूसरी बार दौड़ा पड़ने से उनका निधन हो गया। 

आखिरी बार बेटी और पत्नी से की वीडियो कॉल, मांगी  कॉफी 
बेटी अलमा ने बताया कि उनके पिता मंगलेश डबराल से आखिरी बार बात तीन-चार दिन पहले वीडियो कॉल से हुई थी। पिता ने कहा कि वह अब थक चुके हैं, उन्हें कब अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाएगा। अब वह घर पर आना चाहते हैं। इससे पहले चार दिसंबर की रात में भी अलमा ने पिता को एम्स में रेफर कराने के दौरान उनके पैरों को मसला था। जिससे मंगलेश को काफी आराम हुआ। तब उन्होंने कागज पर लिखकर बेटी से चाय या कॉफी मांगी थी।    


इतिहास और उपलब्धियां
16 मई 1948 को टिहरी गढ़वाल के काफलपानी गांव में जन्मे मंगलेश डबराल की शिक्षा और दीक्षा देहरादून में हुई थी। दिल्ली में कई काम करने के बाद वह मध्यप्रदेश चले गए थे। वहां कला परिषद, भारत भवन से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका पूर्वाग्रह में सहायक संपादक रहे। लखनऊ और इलाहाबाद से प्रकाशित अम्रत प्रभात में भी नौकरी की थी। इसके बाद वह वर्ष 1963 में  दिल्ली में जनसत्ता में साहित्य संपादक भी रहे। वर्तमान में वह नेशनल बुक ट्रस्ट से भी जुड़े थे। उन्होंने पांच काव्य संग्रह भी लिखें। जिनमें पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं आवाज भी एक जगह है और नए युग में शत्रु शामिल हैं। उन्हें कई बड़े अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुके थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed