मरीज से बात करते-करते निकाल दिया दिमाग से ट्यूमर
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सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल के न्यूरोसर्जन की टीम ने दिल्ली निवासी प्रकाशवती (60वर्ष) के दिमाग का ट्यूमर उनसे बात करते-करते निकाल दिया।
डॉक्टरों के मुताबिक मरीज को बहुत मामूली सा एनेस्थीसिया दिया गया था और ऑपरेशन का हिस्सा सुन्न कर दिया गया था। ऑपरेशन की इस अवेक क्रेनीटोमी विधि में मरीज होशो हवास में रहता है। डॉक्टरों का दावा है कि एनसीआर में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन है।
न्यूरोसर्जन डॉ. देबब्रत मुखर्जी ने बताया कि प्रकाशवती के चेहरे पर टेढ़ापन और शरीर के बाएं हिस्से में हल्का पैरालिसिस था। बातचीत में पता लगा कि उन्हें अक्सर सिर में दर्द होता था।
तीन अक्तूबर को वह अस्पताल लाई गई थीं और एमआरआई में ट्यूमर की पुष्टि के बाद नौ अक्तूबर को उनके दिमाग की सर्जरी की गई। वह डायबिटीज से भी पीड़ित हैं।
मरीज को आईसीयू में भी रखने की नहीं जरूरत
दिमाग के स्पीच और मोटर कॉरटेक्स के ऊपर करीब चार सेंटीमीटर का ट्यूमर था। मोटर कॉरटेक्स के जरिए हाथ और पैर चलने का सिस्टम कंट्रोल होता है।
उन्होंने बताया कि डेढ़ घंटे की इस सर्जरी में मरीज के शरीर की गतिविधि और बातचीत जरूरी हैं क्योंकि मरीज बताता रहता है कि उसके शरीर में किसी तरह की दिक्कत महसूस हो रही है या नहीं।
बेहोश करके ऑपरेशन किया जाएगा तो मरीज दिक्कत नहीं बता पाएगा। उसकी आवाज जा सकती है व पूरा शरीर पैरालिसिस हो सकता है। उन्होंने बताया कि कनाडा समेत कई देशों में मरीज की सुबह सर्जरी की जाती है और शाम को छुट्टी दे दी जाती है।
न्यूरोसर्जन डॉ. वरुण भार्गव ने बताया कि इस विधि से ऑपरेशन में मरीज को आईसीयू और वेंटिलेटर पर रखने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। मरीज को जल्दी अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है।