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Delhi NCR News: हवाई फायरिंग मामले में बिल्डर की एफआईआर रद्द करने से इन्कार
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थान पर हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी बिल्डर को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि हथियारों से जुड़े गंभीर अपराधों को केवल आपसी समझौते के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की एकल पीठ ने आरोपी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने शस्त्र अधिनियम और अन्य धाराओं में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने याचिका को निरर्थक बताते हुए आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए।
एफआईआर के अनुसार, संपत्ति विवाद को लेकर आरोपी बिल्डर ने शिकायतकर्ता पर पिस्टल तान दी थी। आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी दी और व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर हवाई फायरिंग कर लोगों में भय का माहौल पैदा किया। पुलिस जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के पिता और आरोपी के बीच पुराना संपत्ति विवाद चल रहा था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि सार्वजनिक स्थान पर फायरिंग जैसी घटनाएं केवल निजी विवाद नहीं मानी जा सकतीं, क्योंकि इससे आम लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। राज्य सरकार ने भी दलील दी कि शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज अपराध समाज के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं और इन्हें केवल समझौते के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने पुलिस और राज्य सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि भीड़भाड़ वाले इलाके में हथियार लहराना और हवाई फायरिंग करना गंभीर अपराध है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे मामलों में समझौते के आधार पर राहत दी जाती रही तो हथियार रखने वाले लोगों में कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
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नई दिल्ली। सार्वजनिक स्थान पर हवाई फायरिंग कर दहशत फैलाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपी बिल्डर को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि हथियारों से जुड़े गंभीर अपराधों को केवल आपसी समझौते के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की एकल पीठ ने आरोपी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने शस्त्र अधिनियम और अन्य धाराओं में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने याचिका को निरर्थक बताते हुए आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराई जाए।
एफआईआर के अनुसार, संपत्ति विवाद को लेकर आरोपी बिल्डर ने शिकायतकर्ता पर पिस्टल तान दी थी। आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी दी और व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर हवाई फायरिंग कर लोगों में भय का माहौल पैदा किया। पुलिस जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के पिता और आरोपी के बीच पुराना संपत्ति विवाद चल रहा था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि सार्वजनिक स्थान पर फायरिंग जैसी घटनाएं केवल निजी विवाद नहीं मानी जा सकतीं, क्योंकि इससे आम लोगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। राज्य सरकार ने भी दलील दी कि शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज अपराध समाज के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आते हैं और इन्हें केवल समझौते के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने पुलिस और राज्य सरकार की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि भीड़भाड़ वाले इलाके में हथियार लहराना और हवाई फायरिंग करना गंभीर अपराध है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे मामलों में समझौते के आधार पर राहत दी जाती रही तो हथियार रखने वाले लोगों में कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
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