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दिल्ली: रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान को होगा थर्ड पार्टी ऑडिट, अभियान से इस प्रकार के बदलाव की थी उम्मीद
Thu, 17 Mar 2022 09:26 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: आकाश दुबे
Updated Thu, 17 Mar 2022 09:26 PM IST
सार
दिल्ली सरकार ने रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान के प्रभाव का आंकलन करने के लिए पर्यावरण मंत्री गोपाल राय को प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार ने थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की योजना बनाई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ऑडिट का कार्य शुरू होगा। जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार ने 16 अक्तूबर 2020 को रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान शुरू किया था।
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रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की योजना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदूषण को लेकर चलाए गए रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान का दिल्ली सरकार ने थर्ड पार्टी ऑडिट कराने की योजना बनाई है। इस संबंध में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय को प्रस्ताव भेजा गया है। मंत्री की ओर से मंजूरी मिलते ही ऑडिट की कार्रवाई शुरू होगी, जिससे प्रदूषण को लेकर इसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
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राजधानी में वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने 16 अक्तूबर 2020 को रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान शुरू किया था। इसके तहत वाहन चालकों को लाल बत्ती के दौरान वाहनों का इंजन बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। एक अधिकारी का कहना है कि प्रस्ताव को मंत्री के पास भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही अभियान से प्रदूषण पर पड़ने पर प्रभाव का आकलन किया जाएगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस साल भी इस अभियान की योजना बनाई गई है।
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लालबत्ती पर वाहनों के बंद करने पर 15 से 20 फीसदी प्रदूषण कम होने की थी उम्मीद
अक्तूबर 2020 में आईटीओ चौराहे पर अभियान की शुरुआत के दौरान पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा था कि यदि वाहन चालक लाल बत्ती पर वाहनों के इंजन को बंद कर दें तो दिल्ली में वाहनों के प्रदूषण को 15 से 20 फीसदी तक कम किया जा सकता है। वहीं, पेट्रोलियम कंजर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन (पीसीआरए) के आंकड़ों से पता चलता है कि यदि लोग लाल बत्ती पर इंजन बंद कर देते हैं, तो प्रदूषण में 13 से 20 फीसदी तक की कटौती की जा सकती है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, परिवहन क्षेत्र दिल्ली में पीएम 2.5 उत्सर्जन का 28 फीसदी हिस्सा है।
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प्रति एक हजार लोगों पर दोगुनी से अधिक हुई वाहनों की संख्या
वाहनों का योगदान भी दिल्ली की हवा में 80 फीसदी नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड बनाता है। दिल्ली में इस समय कुल 1.33 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। प्रति एक हजार लोगों पर वाहनों की संख्या 2005-06 में 317 से 2019-20 में दोगुनी से अधिक 643 दर्ज की गई थी। वहीं, प्रदूषण के अभियान को लेकर एक आरटीआई में जवाब मिला था कि सरकार ने वर्ष 2020-21 में अभियान से संबंधित विज्ञापनों पर 10.46 करोड़ रुपये खर्च किए थे, हालांकि विज्ञापन एजेंसी शब्दार्थ ने इस तरह के खर्च से इंकार किया था।
गौरतलब है कि रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान के तहत प्रमुख यातायात चौराहों पर नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया था। विभाग ने पिछले साल 18 अक्तूबर से 18 दिसंबर तक अभियान के शुरुआती चरण में 100 यातायात चौराहों पर सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे और दोपहर दो से रात आठ बजे की दो पालियों में लगभग 2500 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया था। सरकार ने पिछले साल केंद्रीय जल मंत्रालय की एक कंसल्टेंसी फर्म वाप्कोस द्वारा पराली को लेकर भी पूसा बायो डीकंपोजर का ऑडिट करवाया था।