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RapidX : 25 साल में साकार हुआ रैपिडएक्स का सपना, पीएम करेंगे एनसीआर परिवहन में आज से नये युग की शुरुआत

Fri, 20 Oct 2023 05:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 20 Oct 2023 05:24 AM IST
सार

रीजनल रेल चलाने पर सरकार की ओर से पहली बार मंथन 1998 में हुआ। सोचा गया कि दिल्ली से एनसीआर के शहरों को हाई-स्पीड ट्रेन से जोड़ा जाए। इसका मकसद दिल्ली में बढ़ती आबादी के दबाव को कम करना था।

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RapidX's dream came true in 25 years
RAPIDX - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रैपिडएक्स का सपना सच होने में 25 साल का लंबा वक्त लगा। रीजनल रेल चलाने पर सरकार की ओर से पहली बार मंथन 1998 में हुआ। सोचा गया कि दिल्ली से एनसीआर के शहरों को हाई-स्पीड ट्रेन से जोड़ा जाए। इसका मकसद दिल्ली में बढ़ती आबादी के दबाव को कम करना था।

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इसके बाद वर्ष 2006 में शहरी विकास मंत्रालय की ओर से एक टास्क फोर्स का गठन किया गया। वर्ष 2009 मे स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया गया। 2009 में ही आठ कॉरिडोर को चयनित किया गया। इसमें पहले चरण में दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-अलवर को प्राथमिकता दी गई। मार्च 2010 में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की ओर से मैसर्स दिल्ली इंटिग्रेटेड मल्टीमीडिया मॉडल ट्रांजिट को दिल्ली-मेरठ और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के लिए व मैसर्स अर्बन मास ट्रांजिट कंपनी लिमिटेड को दिल्ली-अलवर की व्यावहारिकता (फिजिबिलिटी) का अध्ययन करने और डीपीआर बनाने के लिए नियुक्त किया गया। 
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2011 में केंद्र सरकार ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी। इसके बाद इसे एनसीआर मोबिलिटी प्लान में शामिल किया गया। पहले चरण के लिए तीन कॉरिडोर विकसित किए जाने पर सहमति बनी। ये हैं दिल्ली-मेरठ (82 किमी.), दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर (198 किमी.) और दिल्ली-सोनीपत (103 किमी.)। 2013 में एनसीआर ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन
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(एनसीआरटीसी) को रीजनल रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाने के लिए एक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया। इस प्रोजेक्ट को गति मिली पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आठ मार्च 2019 को। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ में इसका शिलान्यास किया। इसी के साथ दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर काम शुरू हो गया। तीन महीने बाद जून से ट्रैक बिछाया जाने लगा। गुजरात के सांवली में कोच तैयार किए जाने का काम होने लगा।

2011 में राज्य सरकारों से हुआ था अनुबंध
सभी तैयारियां होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) का गठन किया गया। इसके बाद रैपिड रेल कॉरिडोर के निर्माण में भाग लेने वाले राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच एक संयुक्त साझेदारी कर अनुबंध किया गया। साझेदारी के लिए सहमति जताते हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर 29 जून, 2011 को इन सभी राज्यों व केंद्र सरकार की ओर से हस्ताक्षर किए गए। एनसीआरटीसी में एक पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक, पदेन निदेशक और सहायक स्टाफ के साथ भारत सरकार से चार नामित निदेशक हैं।

30,000 करोड़ का प्रोजेक्ट है दिल्ली-मेरठ का 

  • 17,00 लोग एक ट्रेन में एक बार में कर सकेंगे सफर
  • 30 ट्रेनें चलेंगी दिल्ली मेरठ कॉरिडोर पर
  • 10 ट्रेनें साहिबाबाद-दुहाई के बीच चलेंगी
  • 72 सीट स्टैंडर्ड कोच में, 62 प्रीमियम कोच में
  • छह कोच की ट्रेन, एक कोच महिलाओं के लिए रहेगा आरक्षित

आम आदमी का बदलेगा जीवन
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने एक्स पर कहा, पीएम मोदी का शहरी गतिशीलता पर बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) से रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) तक फोकस रहा है। गुजरात के सीएम के रूप में नरेंद्र मोदी ने बीआरटीएस की अनूठी अवधारणा को सफल बनाया, जबकि पूरे देश में यह विफल रही थी। गुजरात ज्वलंत उदाहरण है, कैसे बीआरटीएस जैसी शहरी परिवहन परियोजना को सफल कर जनता का जीवन आसान बना सकते हैं।

  • प्रधानमंत्री के रूप में अब नरेंद्र मोदी दिल्ली को 150 किमी दूर के कस्बों और शहरों से जोड़ने के लिए आरआरटीएस की अवधारणा को साकार कर रहे हैं। यह अग्रणी पहल भारत में पहली बार शुरू की जा रही है। 

सड़कों से हटेंगे एक लाख वाहन, हवा भी होगी साफ
रैपिडएक्स रेल कॉरिडोर पर दिल्ली से मेरठ तक ट्रेनें चलने से न केवल लोगों को सुगम यात्रा का बेहतरीन माध्यम मिलेगा, बल्कि पर्यावरण को भी राहत मिलेगी। एनसीआरटीसी के अनुसार, 2025 में रैपिडएक्स ट्रेनों से रोजाना करीब आठ लाख लोग सफर करने लगेंगे। अनुमान है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सशक्त माध्यम मिलने से इस मार्ग पर करीब एक लाख वाहन कम हो जाएंगे। इससे वायु प्रदूषण भी घटेगा।

  • मेरठ, मोदीनगर, मुरादनगर से गाजियाबाद व दिल्ली के बीच रोजाना लाखों लोग बसों और निजी वाहनों से सफर करते हैं। इनके अलावा मालवाहक भी बड़ी संख्या में दौड़ते हैं। सराय काले खां से मेरठ तक कॉरिडोर पूरा हो जाने के बाद लोगों को निजी वाहनों का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली से मेरठ तक का सफर आसान हो जाएगा। 

टोल के झंझट से भी मुक्ति
निजी वाहन से अगर सफर करते हैं तो वाया मोदीनगर होकर जाना मुश्किल होता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से सफर कर रहे हैं। इस पर लोगों को महंगा टोल शुल्क देना पड़ता है। रैपिडएक्स का परिचालन मेरठ तक शुरू हो जाने के बाद लोग इन ट्रेनों में कार जैसा आरामदायक सफर कर सकेंगे। लोगों को न तो महंगे पेट्रोल-डीजल पर खर्च करना पड़ेगा, न टोल पर जेब ढीली करनी होगी।

नोएडा, गुुुरुग्राम, फरीदाबाद तक भी जाएगी रैपिडएक्स

  • पहला चरण : दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर के अलावा दिल्ली से वाया गुरुग्राम होते हुए अलवर और दिल्ली से पानीपत तक दो और कॉरिडोर बनाकर परिचालन शुरू करने की योजना है। दिल्ली से गुरुग्राम कॉरिडोर पर अलाइनमेंट तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर कॉरिडोर पर निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके बाद पहले चरण के दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर पर काम शुरू होगा। 
  • दूसरा चरण : दिल्ली-फरीदाबाद-पलवल कॉरिडोर, गाजियाबाद-खुर्जा कॉरिडोर, दिल्ली-बहादुरगढ़-रोहतक कॉरिडोर, गाजियाबाद-हापुड़ कॉरिडोर, दिल्ली-शाहदरा-बडौत कॉरिडोर का काम शुरू होगा। दोनों चरण पूरे हो जाने से यूपी के पांच जिले गाजियाबाद, मेरठ, खुर्जा, हापुड़ और बागपत रैपिडएक्स कॉरिडोर से जुड़ जाएंगे।

महज 55 मिनट में पूरा  होगा पांच घंटे का सफर
रैपिडएक्स ट्रेनें नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी सहूलियत लेकर आई हैं।  न सिर्फ गाजियाबाद, साहिबाबाद बल्कि मुरादनगर, मोदीनगर और मेरठ से रोजाना लाखों की संख्या में लोग नौकरी करने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम व फरीदाबाद जाते हैं। मेरठ से गाजियाबाद और दिल्ली तक जाम से जूझते हुए उन्हें यह सफर तय करने में पांच घंटे तक लग जाते हैं। रैपिडएक्स रेल कॉरिडोर मेरठ से दिल्ली तक शुरू हो जाने के बाद यह सफर रोजाना महज 55 मिनट का रह जाएगा।

सुबह छह बजे से पटरी पर दौड़ेगी ट्रेन
मोदीनगर, मुरादनगर, मेरठ और गाजियाबाद के लोगों को अब नौकरी के लिए दिल्ली में बसने की जरूरत नहीं है। वह रैपिडएक्स रेल के माध्यम से रोजाना आवागमन कर सकते हैं। मेट्रो की तरह रैपिडएक्स का परिचालन सुबह छह बजे से शुरू होगा और रात 11 बजे आखिरी ट्रेन चलेगी। यानी शाम की पाली में काम करने वाले कर्मचारी भी आसानी से इस ट्रेन से ड्यूटी पर जा सकते हैं। इस ट्रेन के संचालन से न केवल दिल्ली से मेरठ के बीच की दूरी घट जाएगी, बल्कि ऐसे लोगों के लिए यह सफर किफायती भी होगा, जिन्हें नौकरी के लिए मेरठ को छोड़कर दिल्ली में बसना पड़ रहा था।

हैं तैयार हम : स्टाफ कराएगा सुखद यात्रा
रैपिडएक्स ट्रेन के सफर को सुखद और आरामदायक बनाने के लिए एनसीआरटीसी और ट्रेन का परिचालन, प्रबंधन और रखरखाव संभालने वाली कंपनी डीबी इंडिया का करीब 150 कर्मचारियों की टीम दिन रात काम करेगी। इन कर्मचारियों में करीब 60 फीसदी महिला कर्मचारी ट्रेन चलाने से लेकर स्टेशन कंट्रोलिंग का काम करेंगी और आपको समय पर गंतव्य तक पहुंचाएंगी। बाकी तकरीबन 40 फीसदी टीम में पुरुष कर्मचारी टिकट काउंटर से लेकर ट्रेनों का परिचालन का काम संभालेंगे।

बेटियों के कंधों पर रफ्तार का जिम्मा
रैपिडएक्स ट्रेनों को चलाने और स्टेशन पर बैठकर रेल ट्रैफिक को कंट्रोल करने में गाजियाबाद की बेटियां भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। गाजियाबाद की रहने वाली रेशम कई महीने से साहिबाबाद से दुहाई तक प्राथमिकता वाले खंड पर ट्रेन का संचालन कर रही हैं। देश की पहली रैपिडएक्स रेल चलाकर रेशम का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। 

  • साहिबाबाद स्टेशन पर स्टेशन कंट्रोलर के रूप में गाजियाबाद की ही रहने वाली अंजू गोस्वामी जिम्मेदारी निभा रही हैं। इनके समेत कई महिला कर्मचारी रैपिडएक्स ट्रेनों के संचालन में अहम भूमिका निभाकर बदलते भारत में नाम रोशन कर रही हैं।

 मरीजों के लिए ट्रेन में मिलेगी स्ट्रेचर
देश की पहली सेमी हाईस्पीड में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी होगी। उनके लिए अलग स्थान चिह्नित किया गया है। पहली बार की गई इस व्यवस्था से मेरठ या गाजियाबाद से रेफर किए गए मरीजों को दिल्ली ले जाना और लाना आसान होगा। मेरठ से अक्सर मरीज दिल्ली के लिए रेफर किए जाते रहे हैं। मेट्रो रेल समेत किसी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में अभी तक मरीजों को लाने-ले जाने की अलग से सुविधा नहीं है। रैपिडएक्स में यह सुविधा मौजूद होगी। दिल्ली में स्टेशन पर उतरकर एंबुलेंस की मदद से मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकेगा।

स्क्रीन पर दिखेगी ट्रेन की रफ्तार
रैपिडएक्स ट्रेन के प्रीमियम कोच में दो डिस्प्ले स्क्रीन लगाई गई हैं। हवाई जहाज की तरह इस स्क्रीन में ट्रेन की गति की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा ट्रेन की लोकेशन भी स्क्रीन पर दिखाई देगी। स्क्रीन पर देखकर पता चल सकेगा की ट्रेन किस स्टेशन पर पहुंचने वाली है।

ट्रेन के दरवाजे खुद खोल सकेंगे यात्री
रैपिडएक्स ट्रेनों के दरवाजे फिलहाल मेट्रो रेल की तरह ऑटोमेटिक तरीके से खुलेंगे और बंद होंगे। रैपिडएक्स में दरवाजों को खोलने के लिए अंदर और बाहर दोनों ओर एक खास बटन दिया गया है। स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने के बाद इस बजट में हरे रंग की लाइट जलेगी, इसके बाद यात्री इस बटन को दबाकर खुद भी दरवाजा खोल सकेंगे। ट्रेन के सफर में होने के दौरान यह बटन लॉक हो जाएगा और इसे नहीं खोला जा सकेगा। एनसीआरटीसी के अधिकारियों का कहना है कि जब लोग इस बटन के काम करने के तरीके से वाकिफ हो जाएंगे, तब कोच के गेट को मैनुअली खोला-बंद किया जाएगा। यानी जिस कोच के दरवाजे को खोलने की जरूरत होगी, सिर्फ उसी को खोला जा सकेगा। इससे बिजली की बचत हो सकेगी।

डिवाइस के जरिये कर सकेंगे ट्रेन ऑपरेटर से बात  
आपातकाल में यात्री ट्रेन ऑपरेटर से बात कर सकेंगे। इसके लिए प्रत्येक कोच में एक डिवाइस लगाई गई है। इसमें लगे बटन को दबाने पर ट्रेन ऑपरेटर के पास सूचना पहुंच जाएगी। वह इससे कनेक्ट कर यात्री से बात कर समस्या जान सकेगा।

तीन स्कूलों के 250 बच्चों के साथ सफर करेंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रैपिडएक्स ट्रेन के सफर में तीन परिषदीय विद्यालयों के करीब 250 बच्चे साथ होंगे। सभी बच्चे पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी हैं। इन विद्यार्थियों को पूरे कार्यक्रम के बारे में बता दिया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रियों के पदों से परिचित कराया जा चुका है।

इनमें इस्लाम नगर जूनियर हाईस्कूल, कैला जनरल और हिंडन विहार कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं। नगर क्षेत्र के इन तीनों स्कूल के प्रधानाचार्यों को बृहस्पतिवार को कॉल कर बताया गया कि वह अपने यहां से बच्चों को लेकर महामाया स्टेडियम के मुख्य द्वार पर सुबह 11:30 बजे पहुंचें। यहां से बच्चों को रैपिडएक्स के लिए ले जाया जाएगा। अभी शिक्षकों को यह नहीं बताया गया कि वह वह भी बच्चों के साथ ट्रेन में होंगे या नहीं, फिलहाल बच्चों को पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य व शिक्षकों को दी गई है। 

स्कूल यूनिफार्म में होंगे बच्चे : परिषदीय विद्यालय के यह बच्चे स्कूल यूनिफार्म में होंगे। स्कूल स्तर पर बच्चों की सूची तैयार कर उनके माता-पिता को भी सूचित कर दिया गया कि वह समय से बच्चों को साफ सुथरे यूनिफार्म में स्कूल भेजा जाए। बच्चों को देश की पहली रैपिडएक्स ट्रेन के बारे में पहले ही बताया जा चुका है। 



किराया ज्यादा तो खास भी बहुत है प्रीमियम कोच
रैपिडएक्स ट्रेन में स्टैंडर्ड और प्रीमियम दो श्रेणी के कोच लगाए गए हैं। कुल छह कोच की प्रत्येक ट्रेन में एक कोच प्रीमियम श्रेणी का होगा। इसका किराया स्टैंडर्ड कोच से दोगुना निर्धारित किया गया है। एनसीआरटीसी के अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन में प्रीमियम कोच लगाए जाने का मकसद ऐसे यात्रियों को रैपिडएक्स ट्रेन का सफर करने में दिलचस्पी पैदा करना है जो अपनी निजी गाड़ी से आवागमन करना पसंद करते हैं। उन्हें रैपिडएक्स ट्रेन में कार जैसी यात्रा का अनुभव होगा। प्रीमियम कोच में उन्हें अपना सामान रखने की जगह, आरामदायक रिक्रलाइनर सीटें मिलेंगी। इसके अलावा कोच की खिड़की से आने वाली धूप और रोशनी को रोकने के लिए ब्लैक स्क्रीन लगाने का विकल्प मिलेगा। यात्री कार जैसी यात्रा कार से कम खर्च पर कर सकेंगे।

प्रीमियम कोच-----स्टैंडर्ड कोच 

  • कोच में सीट -62    72
  • फुट रेस्ट    फुट रेस्ट की सुविधा नहीं
  • न्यूनतम किराया 20 रुपये    40 रुपये
  • मोबाइल, लैपटॉप चार्जर    मोबाइल, लैपटॉप चार्जर
  • डायनेमिक रूट मैप    डायनेमिक रूट मैप
  • कोर्ट हैंगर, मैगजीन व पानी बोतल होल्डर    यह सुविधा नहीं
  • कोच में फूड वेंडिंग मशीन    यह सुविधा नहीं
  • प्रीमियम कोच में अटेंडेंट तैनात रहेगा।    स्टैंडर्ड कोच में आपात स्थिति में अटेंडेंट पहुंचेगा
  • सुरक्षा की दृष्टि के लिए पैनिक बटन    सुरक्षा की दृष्टि के लिए पैनिक बटन
  • ट्रेन का दरवाजा मैनुअली खोलने की सुविधा।    ट्रेन का दरवाजा मैनुअली खोलने की सुविधा
  • इस कोच में सफर करने वालों के लिए लाउंज।    स्टैंडर्ड श्रेणी के यात्रियों को यह सुविधा नहीं मिलेगी
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