डेरामुखी को दोषी करार दिए जाने के बाद सीबीआई कोर्ट परिसर से भगाने की साजिश में भी डेरा प्रेमी का ही हाथ है। पुलिस को इसके भी पुख्ता सुराग हाथ लग चुके हैं।
पुलिस को थी इस बात की चिंता
दोषी करार होने के बाद बाहर आने पर राम रहीम का लाल रंग का बैग मांगना भी साजिश का हिस्सा था। लाल रंग को खतरे के कोडवर्ड के तौर पर प्रयोग किया गया। इसके बाद ही डेरा अनुयायी हिंसा पर उतारू हुए। गुरुग्राम में पत्रकारों से बातचीत आईजी केके राव ने बताया कि जैसे ही डेरा मुखी को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहराया, उसने अपने सहयोगी से लाल रंग का बैग मांगा। यह बैग सिरसा से लाया गया था।
राव ने बताया कि डेरा मुखी ने कहा कि बैग में उसके कपड़े हैं लेकिन वास्तव में यह संकेत था जिससे उसके समर्थकों को संदेश मिल जाए कि अब उपद्रव शुरू कर देना है। उन्होंने बताया कि जैसे ही बैग गाड़ी से बाहर निकाला गया, दो तीन किलोमीटर दूर से आंसू गैस के गोले छूटने की आवाजें आने लगीं। आईजी ने कहा, तब पुलिस को समझ आया कि लाल बैग मांगना बाबा की ओर से अशांति फैलाना का हिस्सा था।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अफसरों को इस बात से और भी ज्यादा संदेह हुआ कि डेरा मुखी और उसकी दत्तक पुत्री हनीप्रीत काफी देर तक अदालत परिसर के गलियारों में खड़े रहे। जबकि उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं थी। असल में वे लोग गाड़ी में बैठने से पहले थोड़ा समय चाहते थे जिससे उनके लोगों को यह संदेश फैला सकें कि वे लोग कोर्ट परिसर से जा रहे हैं। उनसे यह कहा गया कि अब वे वहां खड़े नहीं रहें। भीड़ कभी भी कोर्ट परिसर तक पहुंच सकती है।
आईजी ने कहा कि अगर सेक्टर एक तक हिंसक भीड़ पहुंच जाती तो हालात बेकाबू हो जाते। तब पुलिस ने उन्हें डीसीपी (क्राइम) सुमित कुमार की गाड़ी में बैठाया जबकि वे दूसरी गाड़ी से आए थे। जब हमलोग उसे गाड़ी में बैठा रहे थे तभी कई वर्षों से बाबा की सुरक्षा में लगे कमांडो ने उसे घेर लिया।