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राकेश अस्थाना का कोर्ट को जवाब: पुलिस आयुक्त के रूप में उनकी नियुक्ति को चुनौती देना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग, इसके पीछे बदले की भावना

Fri, 17 Sep 2021 05:44 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 17 Sep 2021 05:44 PM IST
सार

अस्थाना ने कहा कि उनकी नियुक्ति के गुण-दोष के बारे में केवल केंद्र सरकार ही विचार कर सकती है। उन्होंने कहा न केवल यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है बल्कि इसके अलावा एक निरंतर सोशल मीडिया अभियान चलाया जा रहा है जो इस आशंका की पुष्टि करता है कि मेरी नियुक्ति के लिए चुनौती या तो कुछ प्रतिशोध का परिणाम है।

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Rakesh Asthana to high court Challenge to appointment as Delhi CP abuse of process of law, result of vendetta
राकेश अस्थाना, दिल्ली पुलिस आयुक्त - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली पुलिस आयुक्त एवं भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के गुजरात काडर के अधिकारी राकेश अस्थाना ने आरोप लगाया कि जब से उन्हें सीबीआई का विशेष निदेशक नियुक्त किया गया है तब से कुछ संगठन उन्हें निशाना बना रहे हैं। अपनी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में उनकी नियुक्ति को चुनौती कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है तथा इसके पीछे बदले की भावना है।

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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपनी नियुक्ति के खिलाफ एक जनहित याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए अस्थाना ने कहा जब से उन्हें सीबीआई का विशेष निदेशक नियुक्त किया गया है, तब से कुछ संगठन उन्हें निशाना बनाकर उनके खिलाफ याचिका दायर कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा, 'कॉमन कॉज' और 'सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' नाम के दो संगठन हैं जो पेशेवर जनहित याचिकाकर्ता हैं और सार्वजनिक सेवा के एकमात्र तरीके के रूप में मुकदमे दायर करने के लिए आस्तित्व में हैं। एक या दो व्यक्ति इन संगठनों पर गहरे और व्यापक नियंत्रण का आनंद लेते हुए दोनों संगठन चलाते हैं।
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अस्थाना ने कहा कुछ परोक्ष और प्रत्यक्ष अज्ञात कारणों से उन्हें (संगठनों को) चलाने वाले व्यक्तियों ने हाल के दिनों में प्रतिशोध या किसी व्यक्ति के इशारे पर मेरे खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने यह जवाब अधिवक्ता सादरे आलम की जनहित याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है। याचिका में मांग की गई है कि अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त बनाने का गृह मंत्रालय का 27 जुलाई का आदेश रद्द किया जाए।

अस्थाना ने कहा कि उनकी नियुक्ति के गुण-दोष के बारे में केवल केंद्र सरकार ही विचार कर सकती है। उन्होंने कहा न केवल यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है बल्कि इसके अलावा एक निरंतर सोशल मीडिया अभियान चलाया जा रहा है जो इस आशंका की पुष्टि करता है कि मेरी नियुक्ति के लिए चुनौती या तो कुछ प्रतिशोध का परिणाम है।

केंद्र ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था से जुड़ी विविध चुनौतियों के मद्देनजर अस्थाना की नियुक्ति जनहित में की गई है। केंद्र ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस आयुक्त के रूप में अस्थाना की नियुक्ति में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है और उनकी नियुक्ति सभी नियम-कायदों को ध्यान में रखकर की गई है।


25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा था कि वह दिल्ली पुलिस कमिश्नर के तौर पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति के खिलाफ लंबित याचिका पर दो सप्ताह के भीतर फैसला करे।

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