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किसानों की उम्मीदों पर मौसम की मार: बालोद में बेमौसम बारिश ने मचाई तबाही, धान की फसल बर्बाद
Tue, 29 Apr 2025 08:10 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: श्याम जी.
Updated Tue, 29 Apr 2025 08:10 PM IST
सार
बालोद में दो दिनों से बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान ने फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया। इसके बाद से किसान अपनी फसलों को बचाने और संभालने में जुट गए हैं। किसान नोहर मंडावी ने बताया कि उनकी लगभग तीन एकड़ धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
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बारिश और आंधी से फसल को नुकसान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिछले दो दिनों से छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में बेमौसम बारिश और आंधी-तूफान ने किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। सबसे ज्यादा प्रभावित धान की फसल हुई है, जो अब कटाई के लिए तैयार थी। तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसल बिखर गई, धान की बालियां टूट गईं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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विशेष रूप से बीती शाम की मूसलाधार बारिश ने फसलों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया। इसके बाद से किसान अपनी फसलों को बचाने और संभालने में जुट गए हैं। किसान नोहर मंडावी ने बताया कि उनकी लगभग तीन एकड़ धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। वे कुछ ही दिनों में इस फसल की कटाई करने वाले थे, लेकिन अब उनका सारा प्रयास बेकार हो गया।
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दो दिनों से खराब मौसम
बालोद जिले में पिछले दो दिनों से मौसम की बेरुखी देखने को मिल रही है। विभिन्न विकासखंडों में अलग-अलग समय पर खंड वर्षा दर्ज की गई है। इस बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। सुबह से ही किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों में डटे हुए हैं। सब्जी की फसलों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है, लेकिन धान और गेहूं की फसलों को भारी क्षति पहुंची है।
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धान कटाई में देरी की चिंता
बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने धान उत्पादक किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में मक्के की फसल भी तैयार होने की स्थिति में है, लेकिन किसान अब मक्के और धान की कटाई को लेकर चिंतित हैं। कुछ किसानों की धान की फसल कटाई के लिए तैयार है, जबकि कुछ को अभी फसल के पकने का इंतजार करना पड़ रहा है। इस मौसम ने उनकी योजनाओं को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
पानी की कमी और अब मौसम की मार
बालोद जिला मुख्यालय के आसपास के कुछ गांवों में भीषण गर्मी के कारण पानी की कमी से पहले ही फसलें बर्बाद हो चुकी थीं। कई किसानों ने पानी के अभाव में अपनी फसलों को मवेशियों के हवाले कर दिया, क्योंकि नलकूप और बोरवेल सूख गए हैं। बार-बार चेतावनी के बावजूद किसान धान की खेती में रुचि लेते रहे, जिससे पेयजल संकट और भूमिगत जल स्तर में कमी आई। पहले पानी की कमी ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, और अब जब फसलें पककर तैयार होने की स्थिति में थीं, तब बेमौसम बारिश और तूफान ने किसानों को पूरी तरह तबाह कर दिया।