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रेडियो ने बदली तिहाड़ के कैदियों की जिंदगी, कारगर रही पहल, बंदी हो रहे जागरूक 

Sat, 14 Nov 2020 07:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव कुमार, नई दिल्ली
राजीव कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 14 Nov 2020 07:04 AM IST
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Radio changed the life of Tihar inmates
Tihar Jail - फोटो : अमर उजाला
मैं आरजे मोहित... टीजे (तिहाड़ जेल) एफएम रेडियो में आपका स्वागत करता हूं। अब आप सुनेंगे अपनी फरमाइश के गीत, लेकिन इससे पहलेे एक जरूरी सूचना। आज देश व विश्व कोरोना महामारी को लेकर चिंतित है, इससे सतर्क रहने की जरूरत है। आपको इससे खुद का बचाव करना है। इसके लिए जरूरी है कोविड नियमों का पालन करना। अपने हाथों को लगातार धोना-सैनिटाइज करना, मास्क पहनना और एक दूसरे से दूरी बनाए रखना। तभी कोरोना जैसे महामारी पर काबू पा सकेंगे।
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कोरोना काल में कुछ ऐसा ही अंदाज है तिहाड़ जेल नंबर 4 से चलने वाले एफएम रेडियो का। इस पर जेल में बंद कैदी अपनी फरमाइश के गीत सुनते हैं। जेल अधिकारियों के मुताबिक कैदियों के खालीपन को दूर करने के लिए टीजे एफएम रेडियो की शुरुआत की गई। इसका संचालन भी कैदी ही करते हैं। कोरोना काल में जेल प्रशासन की ओर से रेडियो के माध्यम से कैदियों को गीत सुनाने के साथ कोरोना से बचाव के टिप्स दिए जा रहे हैं। यह पहल केवल तिहाड़ जेल ही नहीं बल्कि रोहिणी और मंडोली जेल में भी कारगर साबित हुई है।
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कानूनी विशेषज्ञ देंगे कैदियों के सवालों के जवाब
जेल में बंद कैदियों का जीवन खालीपन में नीरस न हो जाए और वे फिर से अपराध की ओर अग्रसर न हो जाएं, जेल प्रशासन लगातार इस बात का ध्यान रखता है। खालीपन को दूर करने के लिए कैदियों से जहां फैक्टरी में काम कराया जाता है वहीं उनके मनोरंजन के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2013 में जेल नंबर 4 में एफएम रेडियो की शुरुआत की गई और इसे सभी जेलों से जोड़ा गया। जेल प्रशासन का मकसद कैदियों के हुनर को तराशना है, ताकि वे जेल से बाहर निकलने के बाद इस क्षेत्र में हाथ आजमा सकें।
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जेल में बंद कैदी अपनी फरमाइश के गीत सुनने के लिए रेडियो स्टेशन के बाहर रखे रजिस्टर पर गीत के बोल लिखते हैं। इसके बाद रेडियो पर गीत प्रसारित किया जाता है। जेल का यह एफएम रेडियो काफी सुर्खियां बटोर रहा है। अब जेल के इस रेडियो को कानून की पाठशाला भी बनाया जा रहा है, जिससे कैदी कानूनी जानकारी ले सकें। कैदियों के सवालों का कानूनी विशेषज्ञ जवाब देंगे।

एफएम रेडियो पर कोरोना को लेकर दिए गए संदेश काफी कारगर साबित हुए और कैदियों में बदलाव नजर आया है। वह भी कोरोना को लेकर उतने ही सतर्क दिखे, जितने अन्य लोग हैं। बैरक में बंद होने के बावजूद उन्होंने नियम का पालन किया। इससे जेल में कोरोना पर लगाम लगाने में कामयाबी मिली। 
-संदीप गोयल, महानिदेशक, तिहाड़ जेल  

तिहाड़ के बारें में कुछ खास
  • देश का ही नहीं तिहाड़ दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा जेल परिसर है। इसकी क्षमता 5200 कैदियों की है। हालांकि यहां की 9 जेलों में इस समय 12 हजार से ज्यादा कैदी बंद हैं।  
  • तिहाड़ जेल को तिहाड़ आश्रम भी कहा जाता है, जो चाणक्यपुरी से 7 किमी दूर तिहाड़ा गांव में स्थित है।
  • इस कारागृह का मुख्य मकसद कैदियों को शिक्षित और जागरूक करके आम नागरिक बनाना है और उन्हें कानून की जानकारी और शिक्षा देना है ताकि कानून की इज्जत करना सीखें। यहां कैदियों के लिए पुनर्वास की भी व्यवस्था है।
  • सन् 2015 में तिहाड़ जेल के दो कैदियों ने रात के दौरान एक दीवार के नीचे से 10 फीट की सुरंग खोद डाली थी, ताकि वे वहां से भाग सके।
  • जी स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी ए राज, कनिमोझी, शाहिद उस्मान बलवा हो या फिर जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा या कॉमनवेल्थ घोटाले के आरोपी सुरेश कलमाडी और बिहार के बाहूबली पप्पू यादव जैसे दबंग नेता कभी न कभी इस जेल में बंद रहने को मजबूर हुए हैं।
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