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Delhi NCR News: सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली पर सवाल, एनएसयूआई की याचिका खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत समस्याओं को जनहित याचिका के जरिये नहीं उठाया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) की याचिका खारिज की। पीठ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इसी तरह की एक याचिका पहले ही खारिज कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का मामला प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत कार्रवाई का विषय है। छात्र सीबीएसई के निर्धारित ढांचे के तहत अपनी शिकायतों का निवारण कर सकते हैं।
याचिका की मुख्य मांगें
एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद झाखड़ ने अपनी याचिका में छात्रों को क्षतिपूर्ति अंक देने की मांग की थी। यह उन छात्रों के लिए था जिनकी उत्तर-पुस्तिकाएं गायब, धुंधली या गलत मूल्यांकित पाई गईं। याचिका में ओएसएम प्रणाली में अनियमितताओं और तकनीकी खामियों की स्वतंत्र जांच की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को एक अतिरिक्त महीने के लिए खुला रखने के निर्देश भी मांगे थे। सीबीएसई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पोर्टल फिर से खोलने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इन्कार किया था।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत समस्याओं को जनहित याचिका के जरिये नहीं उठाया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) की याचिका खारिज की। पीठ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इसी तरह की एक याचिका पहले ही खारिज कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का मामला प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत कार्रवाई का विषय है। छात्र सीबीएसई के निर्धारित ढांचे के तहत अपनी शिकायतों का निवारण कर सकते हैं।
याचिका की मुख्य मांगें
एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद झाखड़ ने अपनी याचिका में छात्रों को क्षतिपूर्ति अंक देने की मांग की थी। यह उन छात्रों के लिए था जिनकी उत्तर-पुस्तिकाएं गायब, धुंधली या गलत मूल्यांकित पाई गईं। याचिका में ओएसएम प्रणाली में अनियमितताओं और तकनीकी खामियों की स्वतंत्र जांच की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को एक अतिरिक्त महीने के लिए खुला रखने के निर्देश भी मांगे थे। सीबीएसई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पोर्टल फिर से खोलने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इन्कार किया था।
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