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वेबवर्क फर्जीवाड़ा: आरोपियों की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, ये है पूरा मामला

Sun, 11 Jun 2017 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 11 Jun 2017 09:58 AM IST
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  question raise on police action on accused in webwork fraud case
demo pic - फोटो : File Photo

इंटरनेट पर विज्ञापन लिंक लाइक कराने के नाम पर 40 हजार लोगों से 260 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने वाली वेबवर्क कंपनी की जांच में नोएडा पुलिस ने बड़े पैमाने पर लीपापोती की। शिकायतकर्ता अमित किशोर जैन के मुताबिक थाना सेक्टर-20 पुलिस द्वारा तैयार चार्जशीट के अनुसार 17 फरवरी 2017 की दोपहर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दोनों आरोपी सूरजपुर कोर्ट में वकील से मिलने जा रहे हैं। 

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दोपहर करीब 12 बजे पुलिस ने कोर्ट के पास सादे कपड़ों में घेराबंदी की। करीब 12:30 बजे वेबवर्क कंपनी के निदेशक  संदेश वर्मा और अनुराग गर्ग टैक्सी से उतरे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के वक्त पुलिस अधिकारियों ने ही मीडिया को जानकारी दी थी कि दोनों आरोपी सूरजपुर स्थित कार्यालय में तत्कालीन एसएसपी धर्मेंद्र सिंह से मिलने पहुंचे थे। एसएसपी ने ही अपने ऑफिस बुलवाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करवाया था।
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मोटी कमाई करने वालों का स्पष्ट बयान नहीं
पुलिस ने वेबवर्क केस में लाखों रुपये की मोटी कमाई करने वाले 50 से ज्यादा लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया था। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने चार्जशीट में बयान को स्पष्ट तौर पर दर्ज नहीं किया। 

जैसे पुलिस ने कृष्णापुरी, प्रेमपुरी मुजफ्फरनगर निवासी सुशील कुमार को नोटिस जारी किया था। सुशील ने वेबवर्क से 34.87 लाख रुपये की कमाई की थी।  सुशील द्वारा 34.87 लाख रुपये कमाने और किस काम के लिए उसे कंपनी ने ये भुगतान किया, चार्जशीट में इसका स्पष्ट जिक्र नहीं है।

पुलिस को मिली कुल 737 शिकायतें

  question raise on police action on accused in webwork fraud case
DEMO PIC

वेबवर्क कंपनी का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पुलिस को कंपनी के खिलाफ कुल 737 शिकायतें मिलीं। पुलिस ने चार्जशीट में फर्जीवाड़े का शिकार होने वाले प्रत्येक व्यक्ति का नाम, पता, मोबाइल नंबर और उसकी डूबी हुई रकम का ब्योरा सूचीबद्ध किया है।

चार्जशीट में केस के पहले जांच अधिकारी अनिल प्रताप सिंह ने अपने खर्च पर 87600 रुपये की हार्ड डिस्क खरीदने का जिक्र किया है। उसने लिखा है कि मामला काफी संवेदनशील था और कंपनी से फॉरेंसिक जांच आदि के लिए काफी मात्रा में डिजिटल सबूत एकत्र करने थे। इसके लिए उसे विभाग से पैसे नहीं मिले, लिहाजा उसने 30 मार्च 2017 को अपने पास से 87600 रुपये खर्च 22 हार्ड डिस्क नेहरू प्लेस से खरीदी थीं।

थाना सेक्टर-20 में वेबवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने वाले गाजियाबाद के अमित किशोर जैन की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो मई को केस की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। 8 मई को हाईकोर्ट का आदेश वेबसाइट पर अपलोड हुआ और 10 मई को संबंधित पक्षों को आदेश की कॉपी दे दी गई थी। आदेश में हाईकोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के लिए एक माह का समय दिया था, जो शनिवार को पूरा हो गया। अब तक सीबीआई ने केस से संबंधित सबूत व दस्तावेज आदि कब्जे में लेने के लिए नोएडा पुलिस से संपर्क नहीं किया है। 

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