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ये है जुर्म की दुनिया की नई क्वीन, तबाह की हजारों मासूम जिंदगियां

Mon, 29 Jun 2015 03:29 PM IST
Updated Mon, 29 Jun 2015 03:29 PM IST
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queen of trafficking arrest in ranchi

पंद्रह साल पहले जब लता लकरा झारखंड से दिल्ली आई थी तब जिंदगी उसके लिए इतनी आसान नहीं थी। घरों में काम करके 2000 महीने की सैलरी में घर चलाना बहुत मुश्किल हो रहा था।

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आज पंद्रह साल बाद उसी लता के पास दिल्ली में एक फ्लैट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स इसके साथ ही उसके गृहनगर में बहुत सारे जमीन जायदाद हैं। इन सबके बावजूद वो आज सलाखों के पीछे है।
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वो हाल ही में रांची से लगभग 25 किमी. दूर चानो में 23 जून को पकड़ी गई है। पुलिस के अनुसार जब उसे गिरफ्तार किया गया उस वक्त भी उसने दो किलो सोने के जेवर पहन रखे थे।

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शकुरपुर में चलाती थी अवैध प्लेसमेंट एजेंसी

queen of trafficking arrest in ranchi

गौरतलब है कि गिरफ्तार होने से पहले लता लकरा पश्चिम दिल्ली के शकुरपुर इलाके में अवैध प्लेसमेंट एजेंसी चलाती थी। पुलिस के अनुसार यहीं से लता ने अपने मानव तस्करी का साम्राज्य खड़ा किया था। इसी प्लेसमेंट एजेंसी की आड़ में वो झारखंड से 1500 नाबालिग बच्चों की तस्करी कर चुकी है।

झारखंड पुलिस की एंटी-ह्युमन ट्रैफिकिंग ईकाई जिसने लता को गिरफ्तार किया की हेड अराधना सिंह कहती हैं कि लता को गिरफ्तार करने के बाद अब उनका अगला लक्ष्य उन बच्चों को ढूंढना है जो झारखंड से दिल्ली लाए गए।

अराधना बताती हैं कि झारखंड में लता के बारे में कोई नहीं बोलता लेकिन अब चूंकि वो सलाखों के पीछे है तो शायद वो मां-बाप आगे आएं जिनके बच्चों को अगवा कर लता दिल्ली लाई थी।

पैसे की लालच में करने लगी बच्चे अगवा

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बता दें कि हर साल झारखंड जैसे गरीब राज्य से लगभग 33000 लड़के और लड़कियों की तस्करी की जाती है। इनमें से ‌अधिकतर बच्चे बहुत ही बुरी हालत में घरेलू कामों को करने के लिए लगा दिए जाते हैं।

इसके साथ ही अधिकतर लड़कियों को या तो वेश्यावृत्ति की ओर धकेल दिया जाता है या उनसे कई गुना अधिक उम्र के व्यक्ति से उनकी शादी करा दी जाती है।

रांची के चानो के एक छोटे से ब्लॉक की मूल निवासी लता लकरा किस्मत वाली थीं। वो दिल्ली में पैसे कमाने ‌के लिए आईं। काफी समय तक उन्होंने घरों और अस्पतालों में काम किया।

इसी बीच उनकी मुलाकात एक मानव तस्कर से हो गई। उन्हें लगा कि यहां काफी पैसा है क्योंकि दिल्ली में काम करने वालों की काफी मांग है।

2003 में पहली बार की थी बच्ची अगवा

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2003 में लता ने पहली बार एक नाबालिग लड़की को दिल्ली के एक घर में काम करने के लिए रखवाया था। उसने अपने गांव के कई मर्दों को एजेंट के रूप में काम दिया।

ये सभी एजेंट बच्चों के माता-पिता को बच्चों के अच्छे भविष्य और मोटी सैलरी का झूठा सपना दिखाकर बच्चों की सप्लाई का काम करते थे।

मानव तस्करी झारखंड में एक बड़ी समस्या है। इस प्रदेश से बड़ी संख्या में दिल्ली जैसे महानगरों में घरेलू काम के लिए बच्चों की तस्करी की जाती है। हालांकि बाल मजदूरी के‌ खिलाफ कई कड़े कानून बन गए हैं लेकिन सिके बावजूद भारत बाल मजदूरी में सबसे आगे है।

प्लेसमेंट एजेंसियां ऐसे करती हैं काम

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दिल्ली पुलिस के एक ‌अधिकारी ने नाम ने छापने के शर्त पर बताया कि ऐसी एजेंसियां एक बहुत ही साधारण से फार्मूले पर काम करती हैं। बच्चे सप्लाई करने के एवज में ये कम से कम 20000 रुपए लेती हैं।

इसके साथ ही ये एजेंसियां बच्चों की सैलरी का भी एक निश्चित हिस्सा लेती हैं। जो लड़कियां घर का काम अच्छे से करती हैं उनके मालिक से ये एजेंसियां 5000 प्रति माह लेती हैं जबकि एक औसत लड़की के मालिक से 4000 प्रति माह।

लकरा को बच्चों को अगवा करने में कोई संकोच या परेशानी नहीं होती थी। उसने तो कई लड़कियां खाड़ी देशों में भी बेची हैं। लता के नाम पर अगवा करने के कई मामले दर्ज हैं।

ऐसी है लता की निजी जिंदगी

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लता का ट्रैफिकिंग का नेटवर्क बहुत ही फैला हुआ था। वह अपने एजेंटों से दिल्ली के चर्चों में मिलती थी। गांववालों को अपनी बातों पर यकीन दिलाने ‌के लिए वह अपने पति को सीबीआई ऑफिसर बताती थी जबकि वो कोयले की कंपनी में क्लर्क का काम करता है।

उसकी राजशाही वाली जिंदगी गांववालों के बीच चर्चा का विषय रहती थी। लता के दो बच्चों दिल्ली के बहुत महंगे स्कूल में पढ़ रहे हैं। उसका शकुरपुर में एक फ्लैट है। साथ ही झारखंड में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के साथ बहुत बड़ी सं‌पत्ति है। इस वक्त पुलिस उसके सभी बैंक अकाउंट्स की जांच कर रही है।

खबर है कि मानव तस्करी के खिलाफ काम करने वाले स्वयं सेवी संस्थाओं ने दिल्ली पुलिस की नाकामी की खासी आलोचना की है। उनका कहना है कि ये दिल्ली पुलिस की बहुत बड़ी नाकामी है कि जो महिल झारखंड पुलिस द्वारा भेजे गए 35 गिरोहों की लिस्ट में मुखिया है वो राजधानी में इतने समय से अपना धंधा चला रही थी।

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