DUSU: डूसू चुनाव अप्रत्यक्ष रुप से कराने का प्रस्ताव लटका, छात्रों का विरोध; लिगंदोह की सिफारिशों का हवाला
ईसी की बैठक में रखे गए मिनट्स में कहा गया कि अप्रत्यक्ष चुनाव के प्रस्ताव को डीयू के विभिन्न हितधारकों, कॉलेज, यूनियनों, डूसू कॉलेज प्रिंसिपल, विभागाध्यक्षों, केंद्रों के प्रभारी संस्थानों के पास चर्चा के लिए इस मॉडल को अपनाने के लिए भेजा जा सकता है। मालूम हो कि अभी तक डीयू में डूसू चुनाव के लिए प्रत्यक्ष प्रणाली को अपनाया जाता है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (डूसू) अप्रत्यक्ष तौर पर कराने की तैयारी की जा रही है। डीयू की कार्यकारी परिषद की बैठक में इस आशय को मिनट्स के तौर पर लाया गया। हालांकि छात्रों के विरोध को देखते हुए अभी यह मामला लटक गया है। परिषद की बैठक में भी मिनट्स के तौर पर रिपोर्ट किए गए इस प्रस्ताव को सदस्यों के विरोध का सामना करना पड़ा। इस कारण से यह मामला अभी ठंडे बस्ते में चला गया है।
मालूम हो कि डीयू की ओर से गठित की गई एक समिति ने डूसू चुनाव के दौरान दीवारों को पोस्टर, बैनर, पर्ची से गंदा किए जाने के कारण हाई कोर्ट से मिली फटकार के बाद इसे एक सिफारिश के तहत प्रस्ताव दिया था। देश में आपातकाल से पहले डीयू में अप्रत्यक्ष रुप से चुनाव होते थे। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद छात्र संगठन, एबीवीपी ने तो कला संकाय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। जबकि एनएसयूआई, आइसा और एसएफआई ने भी कड़ा एतराज जताया।
समिति ने जो सिफारिश दी है उसके अनुसार केंद्रीकृत एकल स्तरीय डूसू चुनाव को दो स्तरीय चुनाव में बदला जा सकता है। इस तरह से कालेज, विभाग, केंद्र, संस्थान अपने स्तर पर चुनाव आयोजित कर सकते हैं। इनकी संघ बन जाने के बाद इनके अध्यक्ष के साथ केंद्रीय पार्षदों को दूसरे स्तर पर चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिल सकती है। इससे ही डूसू पदाधिकारियों का चुनाव किया जा सकता है। वर्ष 2009 में आई लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में भी यह बात कही गई है।
ईसी की बैठक में रखे गए मिनट्स में कहा गया कि अप्रत्यक्ष चुनाव के प्रस्ताव को डीयू के विभिन्न हितधारकों, कॉलेज, यूनियनों, डूसू कॉलेज प्रिंसिपल, विभागाध्यक्षों, केंद्रों के प्रभारी संस्थानों के पास चर्चा के लिए इस मॉडल को अपनाने के लिए भेजा जा सकता है। मालूम हो कि अभी तक डीयू में डूसू चुनाव के लिए प्रत्यक्ष प्रणाली को अपनाया जाता है। इसमें छात्र ही अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व सहसचिव को चुनते हैं। जबकि जो नया प्रस्ताव है उसमें कॉलेज के अध्यक्ष व पार्षद की ओर से डूसू पदाधिकारियों के चयन का अधिकार देने की बात कही गई है। डीयू के अधिकारी के अनुसार इसे एजेंडा के तौर पर बैठक में नहीं रखा गया।
कार्यकारी परिषद के सदस्यों के संज्ञान में लाने के लिए इसे मिनट्स में रखा गया। डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ अमन कुमार ने कहा कि बैठक में सभी सदस्यों ने इसका विरोध किया। वैसे यह मिनट्स में लाया गया। इसके लिए एक सब कमेटी बनाकर इसे एजेंडा के तौर पर लाकर इस पर चर्चा कराने की मांग की गई है। इसको लेकर काफी देर तक बैठक में हंगामा भी हुआ।